
रिपोर्ट : फास्ट ट्रैक कोर्ट निपटा रहे 83% मामले, सामान्य अदालतों में निपटारे की दर 10%
रिपोर्ट के मुताबिक सभी फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट को संचालित रखने के अलावा अगर 1000 नई विशेष अदालतों का गठन नहीं हुआ तो शायद लंबित मामले कभी खत्म नहीं होंगे.

रिपोर्ट के मुताबिक सभी फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट को संचालित रखने के अलावा अगर 1000 नई विशेष अदालतों का गठन नहीं हुआ तो शायद लंबित मामले कभी खत्म नहीं होंगे.

विधानसभा चुनाव के प्रत्याशी को लेकर रायशुमारी के लिए बुलाई गई बैठक में विधायक राज सिन्हा और एलबी सिंह के समर्थकों के बीच मारपीट शुरू हो गई.

हेमंत ने कहा, पहले डबल इंजन की सरकार के पास पेंशन देने के लिए पैसा नहीं था, महिलाओं को देने के लिए नहीं था लेकिन बड़े-बड़े अरबपतियों को देने के लिए इनके पास करोड़ो-करोड़ निकलता है.

मोरहाबादी मैदान में आयोजित आक्रोश रैली में बीजेपी कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प हुई थी. बाबूलाल मरांडी समेत 52 नेताओं और 12000 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाते हुए लालपुर थाना में एफआईआर दर्ज कराया गया था.

सरयू ने कहा कि आज जिस तरह के पोस्टर और होर्डिंग मानगो के चौक-चौराहों पर स्वास्थ्य मंत्री के साथ ईश्वर सिंह और चंदन सिंह के लगे हुए हैं, वैसे ही पोस्टर और होर्डिंग पहले स्वास्थ्य मंत्री के साथ अमरनाथ सिंह के लगते थे.

शिवराज ने कहा कि इस सरकार ने 5 साल में एक वादा पूरा नहीं किया. 2 हजार रुपए चूल्हा खर्च देने का वादा किया था. अब चुनाव के समय केवल 1 हजार रुपए पकड़ाकर जाल बिछा रहे हैं .

चुनाव के वक्त इंडिया गठबंधन वाम दलों को एक-दो सीट का लॉलीपॉप थमा देती है. विधानसभा चुनाव से पहले मासस का भाकपा माले में विलय होने से कोयलांचल का राजनीतिक समीकरण बदलेगा.

सीएम उत्कृष्ट विद्यालयों के छात्रों को सीबीएससी पैर्टन पर शिक्षा दिलाने के लिए सरकार ने बड़ी उम्मीद से इन शिक्षकों को दूसरे स्कूलों से उत्कृष्ट विद्यालयों में लाया था, लेकिन इन्होंने सरकार की उम्मीदों पर पानी फेर दिया.
दोनों आरोपियों को वाहन चेकिंग के दौरान न्युक्लियस मॉल के पास पकड़ा गया था, जिसके बाद उन्हें थाना लेकर आया गया. वहां ओडी ऑफिसर ने उनको शांतिपूर्वक बैठने को कहा, लेकिन दोनों ने खुद को नेता बताकर हंगामा शुरू कर दिया. जांच में पता चला की दोनों बीजेपी के नेता नहीं है.

2024 में बीजेपी झारखंड में हारे हुए नेताओं को आगे करके विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है. सीता सोरेन, गीता कोड़ा, लोबिन हेंब्रम जैसे नेता लोकसभा चुनाव हार चुके हैं. आदिवासी वोटरों को लुभाने के लिए बीजेपी एक बार फिर इनपर दांव लगाने वाली है. पूर्व सीएम चंपई सोरेन भी इसमें शामिल हैं, जो लोकसभा चुनाव में अपने विधानसभा सीट सरायकेला से झामुमो को वोट नहीं दिलवा पाये थे.

बीजेपी के 25 नेताओं ने इस सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है. उधर पूर्व मंत्री योगेंद्र साव और उनकी बेटी अनुप्रिया साव ने भी कांग्रेस से इस सीट पर अपनी दावेदारी पेश की है. बीजेपी से भी पांच नाम की चर्चा काफी हो रही है. इनमें प्रदीप प्रसाद की दावेदारी सबसे मजबूत है.

दिलचस्प बात यह है कि अनुराग गुप्ता तो यूपीएससी के पैनल में हैं ही नहीं. इससे पहले भी इस सरकार में नियुक्त किये गये डीजीपी की नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी.