हजारीबाग सदर से प्रदीप प्रसाद बीजेपी और योगेंद्र साव कांग्रेस के मजबूत दावेदार
बीजेपी के 25 नेताओं ने इस सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है. उधर पूर्व मंत्री योगेंद्र साव और उनकी बेटी अनुप्रिया साव ने भी कांग्रेस से इस सीट पर अपनी दावेदारी पेश की है. बीजेपी से भी पांच नाम की चर्चा काफी हो रही है. इनमें प्रदीप प्रसाद की दावेदारी सबसे मजबूत है.


हजारीबाग :
हजारीबाग सदर विधानसभा सीट पर इस बार दिलचस्प मुकाबला होगा. यह तय है कि बीजेपी यहां से चुनाव लड़ेगी. इंडिया गठबंधन से यहां कांग्रेस ने चुनाव लड़ने का दावा किया है. हजारीबाग सदर बीजेपी की सबसे सुरक्षित सीट मानी जाती है. पिछले 2014 और 2019 में यहां से जीतकर विधायक बनने वाले मनीष जायसवाल इस बार सांसद बन गये हैं. इसलिए इस बार बीजेपी से यहां कोई नया चेहरा होगा. बीजेपी के 25 नेताओं ने इस सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है. उधर पूर्व मंत्री योगेंद्र साव और उनकी बेटी अनुप्रिया साव ने भी कांग्रेस से इस सीट पर अपनी दावेदारी पेश की है. बीजेपी से भी पांच नाम की चर्चा काफी हो रही है. इनमें प्रदीप प्रसाद, अमित सिन्हा, टोनी जैन, सैफाली गुप्ता और अभिमन्यु प्रसाद शामिल हैं. बीजेपी से प्रदीप प्रसाद प्रबल दावेदार के रूप में नजर आ रहे हैं. लोकसभा चुनाव के दौरान भी उनकी सक्रियता काफी अधिक रही. हाल के दिनों में इन्होंने कई ऐसे काम किए हैं जिससे आम जनता से संपर्क बढ़ा है. 2014 में वे निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर बीजेपी से महज 30 हजार वोटों से चुनाव हारे थे. चुनाव लड़ने का अनुभव और वोटर्स में पकड़ होने की वजह से पार्टी प्रदीप प्रसाद पर दांव खेल सकती है.
टिकट के दावेदारों की लंबी कतार
बीजेपी और कांग्रेस के सभी दावेदारों ने अपनी चुनावी तैयारी शुरू कर दी है. पार्टी के प्रदेश और केंद्रीय नेताओं तक पैरवी लगा रहे हैं. विधानसभा क्षेत्र में जनसंपर्क और सामाजिक सरोकार के कार्यों में शामिल होना शुरू कर दिया है. लेकिन बीजेपी और कांग्रेस से किस्मत किसी एक ही शख्स की खुलेगी. कांग्रेस से पूर्व मंत्री योगेंद्र साव और बीजेपी से प्रदीप प्रसाद को टिकट मिलने की संभावना है. प्रदीप प्रसाद पहले भी निर्दलीय चुनाव लड़ चुके हैं. वहीं शेफाली गुप्ता भी इन दोनों हजारीबाग में काफी सुर्खियों में है. वो पिछले 15 सालों से सामाजिक कार्य कर रही हैं. भुरकुंडा के रहने वाले अमित सिन्हा भी मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं. इसके अलावा बीजेपी ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष अमरदीप यादव, जिला अध्यक्ष विवेकानंद सिंह और सुबोध सिंह शिवगीत भी कतार में हैं.
महतो-कुर्मी, साव वोटरों के वोट होते हैं निर्णायक
2011 की जनगणना के मुताबिक हजारीबाग जिले की आबादी 1,734,495 है. इनमें से 890,881 पुरुष और 843,614 महिलाएं हैं. अनुसूचित जाति की आबादी 17.5% तो अनुसूचित जनजाति 7 फीसदी है. यहां हिंदुओं की आबादी 1,397,227 है, जबकि मुस्लिम आबादी 281,247 है. 17,137 ईसाई, 1,312 सिख, 71 बौद्ध, 1,676 जैन समुदाय के लोग रहते हैं. चुनाव में महतो-कुर्मी और साव वोटरों का वोट निर्णायक होता है.
पिछले 2 चुनाव में बढ़ा बीजेपी का वोट प्रतिशत
पिछले 2 चुनाव से यहां बीजेपी की टिकट पर मनीष जायसवाल जीतते रहे हैं. 2014 और 2019 के विधानसभा चुनाव में जायसवाल ने बीजेपी का वोट शेयर काफी बढ़ाया था. 2009 तक बीजेपी जहां वे प्रदीप प्रसाद से 14 फीसदी अधिक वोट लाकर जीते, वहीं 2014 में कांग्रेस प्रत्याशी से करीब 25 अधिक वोट से जीते. 2019 में बीजेपी प्रत्याशी मनीष जायसवाल ने कांग्रेस प्रत्याशी डॉ रामचंद्र प्रसाद को 51,812 वोटों से हराया था. 2014 में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार प्रदीप प्रसाद को 30 हजार वोटों से हराया था. चुनाव हारने के बाद प्रदीप प्रसाद बीजेपी में शामिल हो गये थे. 2014 के पहले दो बार कांग्रेस की टिकट पर सौरभ नारायण सिंह हजारीबाग से विधायक थे. हालांकि, 2014 के चुनाव में कांग्रेस से उम्मीदवार रहे जयशंकर पाठक वोटों में काफी पीछे छूट गए थे.
2004 और 2009 में कांग्रेस ने जमाया था कब्जा
इससे पहले 2005 और 2009 में कांग्रेस के सौरभ नारायण सिंह ने हजारीबाग सदर विधानसभा सीट पर कब्जा जमाया था. 2005 में मनीष जायसवाल के पिता ब्रजकिशोर जायसवाल निर्दलीय चुनाव लड़े थे. वह 24 फीसदी वोट शेयर के साथ दूसरे नंबर पर थे, जबकि बीजेपी के देवदयाल कुशवाहा 18.47 फीसदी वोट शेयर के साथ तीसरे नंबर पर थे. वहीं 2009 में सौरभ नारायण सिंह 45.18 फीसदी वोट लाकर विधायक बने थे. इस बार बीजेपी दूसरे नंबर पर थी. देवदयाल कुशवाहा को 38.18 फीसदी वोट मिले थे.

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