बिहार राज्यसभा चुनाव: पवन सिंह का सपना टूटा? पांचवीं सीट पर उपेंद्र कुशवाहा की एंट्री से बदला गेम
“बिहार राज्यसभा चुनाव को लेकर NDA ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. BJP ने नितिन नवीन और शिवेश राम को मैदान में उतारा है, जबकि पांचवीं सीट के लिए उपेंद्र कुशवाहा को समर्थन दिया गया है. इस फैसले के साथ ही पवन सिंह को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया.”

बिहार की पांच राज्यसभा सीटों को लेकर चल रही सियासी अटकलों पर अब विराम लग गया है. NDA ने अपने उम्मीदवारों की तस्वीर साफ कर दी है. BJP ने नितिन नवीन और शिवेश कुमार राम के नाम आगे बढ़ाए हैं, जबकि पांचवीं सीट के लिए सहयोगी दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा को समर्थन देने का फैसला किया गया है. इस ऐलान के साथ ही उन तमाम कयासों का अंत हो गया, जिनमें भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह का नाम भी चर्चा में था. अब सबकी निगाहें नामांकन और संभावित क्रॉस-वोटिंग पर टिकी हैं, क्योंकि पांचवीं सीट का गणित बेहद रोचक होता जा रहा है.
सियासी संतुलन साधने की कोशिश
राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की घोषणा करते हुए BJP ने गठबंधन धर्म को प्राथमिकता दी है. नितिन नवीन और शिवेश कुमार राम को पार्टी की ओर से उतारा गया है, वहीं पांचवीं सीट के लिए उपेंद्र कुशवाहा को NDA उम्मीदवार बनाया गया है. पिछले कुछ दिनों से यह चर्चा थी कि क्या कुशवाहा को दोबारा मौका मिलेगा या समीकरण बदलेंगे. लेकिन शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर बातचीत के बाद तस्वीर साफ हो गई. इस फैसले से संकेत मिला है कि NDA बिहार में अपने सहयोगियों के साथ संतुलन बनाए रखना चाहता है. खासकर तब, जब आगामी चुनावी चुनौतियों को देखते हुए सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को साधना जरूरी माना जा रहा है.
पवन सिंह की अटकलों पर विराम
पांचवीं सीट को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा पवन सिंह के नाम को लेकर थी. कयास लगाए जा रहे थे कि BJP किसी नए चेहरे को सरप्राइज के तौर पर आगे कर सकती है. हालांकि, अंतिम सूची में उनका नाम शामिल नहीं हुआ. गठबंधन ने अनुभवी सहयोगी उपेंद्र कुशवाहा पर भरोसा जताते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि फिलहाल प्राथमिकता संगठनात्मक और राजनीतिक संतुलन को दी जाएगी. इससे यह भी संकेत मिलता है कि NDA ने ग्लैमर की बजाय राजनीतिक गणित और गठबंधन मजबूती को तरजीह दी है.
पांचवीं सीट का गणित और क्रॉस-वोटिंग की संभावनाएं
बिहार में एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 41 विधायकों के प्रथम वरीयता वोट की आवश्यकता होती है. मौजूदा संख्या बल के आधार पर NDA चार सीटें सहज रूप से जीत सकता है, लेकिन पांचवीं सीट के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन की दरकार पड़ेगी. ऐसे में विपक्ष द्वारा उम्मीदवार उतारे जाने की स्थिति में मुकाबला दिलचस्प हो सकता है. राजनीतिक गलियारों में क्रॉस-वोटिंग की संभावना पर भी चर्चा तेज है. यदि कुछ विधायक पाला बदलते हैं या समर्थन देते हैं, तो परिणाम समीकरणों को नया मोड़ दे सकता है. 5 मार्च को नामांकन के दौरान नितिन नवीन और उपेंद्र कुशवाहा का साथ दिखना गठबंधन एकजुटता का बड़ा संदेश माना जा रहा है. अब अंतिम फैसला विधानसभा की वोटिंग पर निर्भर करेगा, जहां हर वोट की अहमियत होगी.



