आक्रोश रैली केस में बीजेपी के 18 नेताओं के खिलाफ पीड़क कार्रवाई पर रोक, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
मोरहाबादी मैदान में आयोजित आक्रोश रैली में बीजेपी कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प हुई थी. बाबूलाल मरांडी समेत 52 नेताओं और 12000 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाते हुए लालपुर थाना में एफआईआर दर्ज कराया गया था.


रांची :
बीजेपी के आक्रोश रैली से जुड़े केस को निरस्त करने को लेकर दायर याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी समेत 18 आरोपियों के खिलाफ पीड़क कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है. जिन नेताओं के खिलाफ पीड़क कार्रवाई पर रोक लगी है उनमें बाबूलाल मरांडी, अमर बाउरी, ढुल्लू महतो, कुशवाहा शशिभूषण मेहता, प्रतुल शाहदेव, शशांक राज, अपर्णा सेनगुप्ता, सत्येंद्रनाथ तिवारी, मंगल मूर्ति तिवारी, अमित कुमार, अमरदीप यादव, नीरा यादव, आरती कुजूर, वरुण कुमार, इंदु शेखर मिश्रा, प्रदीप वर्मा और आदित्य साहू शामिल हैं.
आक्रोश रैली के दौरान पुलिस-कार्यकर्ताओं में हुई थी झड़प
गौरतलब है कि 23 अगस्त को रांची के मोरहाबादी मैदान में आयोजित आक्रोश रैली में बीजेपी कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प हुई थी, जिसमें बड़ी संख्या में बीजेपी कार्यकर्ताओं के अलावा पुलिस के भी जवान घायल हुए थे. घटना के बाद पुलिस की ओर से बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी समेत 52 नेताओं और 12000 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाते हुए लालपुर थाना में एफआईआर दर्ज कराया गया था.
नेताओं पर कार्यकर्ताओं को भड़काने का आरोप
दर्ज प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि बीजेपी कार्यकर्ताओं ने साजिश के तहत पुलिस पर हमला किया, साथ ही बिना आदेश के सीएम आवास मार्च करने की कोशिश की. आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि मोरहाबादी मैदान में बीजेपी की ओर से बनाए गए मंच में मौजूद नेताओं ने कार्यकर्ताओं को बैरेकेडिंग तोड़कर सीएम आवास का घेराव करने को लेकर भड़काया था. आरोपियों पर नाजायज मजमा लगाने और निषेधज्ञा का उल्लंघन करने का भी आरोप लगाया गया है.

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