
BJP-AJSU में इन 10 विधानसभा सीटों पर बनी सहमति, आज हो सकती है घोषणा
जिन सीटों पर सहमति बनी है उनमें सिल्ली, रामगढ़, मनोहरपुर, पाकुड़, लोहरदगा, गोमिया, मांडू, ईचागढ़, जुगसलाई और डुमरी शामिल है.

जिन सीटों पर सहमति बनी है उनमें सिल्ली, रामगढ़, मनोहरपुर, पाकुड़, लोहरदगा, गोमिया, मांडू, ईचागढ़, जुगसलाई और डुमरी शामिल है.

बीजेपी ने घोषणा की कि चुनाव के बाद उसकी सरकार आती है तो महिलाओं को मंईयां सम्मान योजना से 1100 रुपये अधिक यानी 2100 रुपये हर महीने दिये जाएंगे. अब वापस झामुमो बीजेपी के नहले पर दहला का दांव खेलते हुए जेएमएम सम्मान योजना शुरू करने जा रही है. इसके तहत महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये दिये जाएंगे.

2019 में सीटिंग सीएम रघुवर दास जमशेदपुर पूर्वी से विधानसभा चुनाव हारे थे. 2014 में सीटिंग सीएम हेमंत सोरेन दुमका विधानसभा सीट से चुनाव हारे थे. शिबू सोरेन 2008 में सीटिंग सीएम रहते हुए तमाड़ विधानसभा उपचुनाव हार गये थे.

इस योजना के तहत लगभग 63,000 आदिवासी गांवों का विकास किया जाएगा. इससे 5 करोड़ से अधिक लोगों को लाभ मिलेगा.

रांची : विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने 40 डीएसपी का तबादला किया है. निर्वाचन आयोग के निर्देश पर यह ट्रांसफर-पोस्टिंग हुई है. आयोग ने तीन साल या उससे अधिक समय तक एक ही स्थान पर पदस्थापित या गृह जिला में कार्यरत पदाधिकारियों-कर्मियों का स्थानांतरण करने का निर्देश दिया था. इसी के तहत यह यह स्थानांतरण ...
मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा कि चुनाव को लेकर अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं. रोल टू पोल के तहत मतदाता सूची साफ सुथरी हो इसके अलावा राजनीतिक दलों को चुनाव प्रचार के लिए निर्धारित समय मिले.

राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी दागी व्यक्ति को भारत स्वीकर नहीं करेगा. हेमंत सोरेन ने स्वस्थ लोकतांत्रिक प्रथाओं से खिलवाड़ किया है. वहीं राहुल गांधी ने विदेश में भारत की छवि धूमिल करने की कोशिश की है.

मीर ने कहा कि वे लगातार सीएम हेमंत सोरेन समेत अन्य झामुमो नेताओं से संपर्क में हैं. कांग्रेस का टारगेट अधिक से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ना नहीं बल्कि अधिक सीटों पर चुनाव जीतना लक्ष्य है.

2024 में बीजेपी झारखंड में हारे हुए नेताओं को आगे करके विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है. सीता सोरेन, गीता कोड़ा, लोबिन हेंब्रम जैसे नेता लोकसभा चुनाव हार चुके हैं. आदिवासी वोटरों को लुभाने के लिए बीजेपी एक बार फिर इनपर दांव लगाने वाली है. पूर्व सीएम चंपई सोरेन भी इसमें शामिल हैं, जो लोकसभा चुनाव में अपने विधानसभा सीट सरायकेला से झामुमो को वोट नहीं दिलवा पाये थे.

चंपई सोरेन का सरायकेला, गीता कोड़ा का जगन्नाथपुर, लोबिन हेंब्रम का बोरियो और सीता सोरेन का जामा से चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है.

क्या बीजेपी को अपने नेताओं में काबिलियत नजर नहीं आती है ? खूंटी के विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा जैसे सीनियर आदिवासी लीडर और सीपी सिंह जैसे वरिष्ठ नेताओं को संगठन में पीछे धकेल दिया गया है.

लोबिन ने कहा कि गुरु जी के समय जो झारखंड मुक्ति मोर्चा था, वो अब नहीं रहा. यहां वरिष्ठ और पुराने नेताओं का अपमान किया जा रहा है.