
JAC पेपर लीक मामला: SIT का गठन, CID को सौंपी जा सकती है जांच की जिम्मेदारी
JAC पेपर लीक मामला: SIT का गठन, CID को मिल सकती है जांच की जिम्मेदारी, कोडरमा से जुड़े हैं पेपर लीक के तार, कई गिरफ्तारियां, डिजिटल डिवाइस जब्त

JAC पेपर लीक मामला: SIT का गठन, CID को मिल सकती है जांच की जिम्मेदारी, कोडरमा से जुड़े हैं पेपर लीक के तार, कई गिरफ्तारियां, डिजिटल डिवाइस जब्त

12 लाख तक की आय को टैक्स फ्री कर निर्मला सीतारमण ने देश के मध्यम वर्ग को बड़ी राहत दी है. किसानों को भी तोहफा मिला है. बजट में हेल्थ सेक्टर पर भी सरकार ने पूरा ध्यान दिया है.

रांची में IAS मनीष रंजन के कांके आवास और चाईबासा में मंत्री मिथिलेश ठाकुर के भाई विनय ठाकुर और सहयोगी वेदांत खिरवाल के ठिकानों में छापेमारी कर ईडी ने 12 घंटे तक सबूतों को खंगाला.

झारखंड के मंत्री मिथिलेश ठाकुर से जुड़े दर्जनों ठिकानों पर सोमवार की सुबह ED ने छापेमारी की. इस दौरान IAS मनीष रंजन और उसकी बहन के आवास पर भी छापेमारी की गई. रांची, चाईबासा के अलावा ED की टीम ने जमशेदपुर में एक साथ छापेमारी की. बता दें कि वर्ष 2012 में पाइपलाइन बिछाने के नाम पर फर्जी बिल के सहारे करोड़ों की अवैध निकासी हुई थी.

मंत्री ने कहा बीजेपी में शामिल होने का दवाब बनाया जा रहा था. जब बीजेपी को इसमें सफलता नहीं मिली, तो उन्हें और उनके परिजनों को बेवजह परेशान किया जा रहा है.
ईडी के केस को मैनेज करने को लेकर करोड़ों की वसूली से जुड़ा हुआ है. इस मामले को लेकर दो दिन पूर्व ही रांची के पंडरा थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी. जिसकी एफआईआर संख्या 0508 है, एफआईआर 6 अक्टूबर को दर्ज कराई गई थी.

जेएसएससी के सचिव सुधीर कुमार गुप्ता कमेटी की अध्यक्षता करेंगे . वहीं आयोग की संयुक्त सचिव मधुमिता कुमारी और उप - सचिव सह परीक्षा नियंत्रक अरविंद कुमार लाल को कमेटी का सदस्य बनाया गया है . एक हफ्ते में यह कमेटी अपनी रिपोर्ट सरकार को देगी.

झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने भी 16 सितंबर को एक्स पर ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन मांझी टैग करते हुए पूरे मामले की निष्पक्षता से जांच कराने की मांग की थी.

2020 में PIL दायर कर पूर्व मंत्री लुईस मरांडी, रणधीर सिंह, नीरा यादव, अमर कुमार बाउरी और नीलकंठ सिंह मुंडा के खिलाफ आय से अधिक सम्पति होने का आरोप लगाते हुए ACB से जांच की मांग की थी.

क्या बीजेपी को अपने नेताओं में काबिलियत नजर नहीं आती है ? खूंटी के विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा जैसे सीनियर आदिवासी लीडर और सीपी सिंह जैसे वरिष्ठ नेताओं को संगठन में पीछे धकेल दिया गया है.

ऐसा लग रहा कि हेमंत सोरेन औरंगजेब जैसा व्यवहार कर रहे हैं. वे विधानसभा चुनाव में करारी हार को देखते हुए पूरी तरह बौखला गए हैं.

मुख्यमंत्री जी , जांच के आदेश दे दीजिये नहीं तो भविष्य में जब ऐसे प्रचंड भ्रष्टाचार के मामलों की जांच हमारी सरकार द्वारा होगी तो इसकी आंच बहुत आगे तक जाएगी.