परिसीमन पर आमने-सामने दो आदिवासी नेता, समीर उरांव के आरोपों पर बंधु तिर्की का पलटवार
झारखंड में परिसीमन को लेकर सियासत गर्म है. आदिवासी एकता महाजुटान के बाद इस मुद्दे पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच बयानबाजी तेज हो गई है
झारखंड में परिसीमन को लेकर सियासत गर्म है. आदिवासी एकता महाजुटान के बाद इस मुद्दे पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच बयानबाजी तेज हो गई है
मध्य प्रदेश के बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत के मामले को लेकर झारखंड प्रदेश आदिवासी कांग्रेस ने रांची में सत्याग्रह और धरना-प्रदर्शन किया. संगठन ने स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के इस्तीफे, उच्चस्तरीय जांच और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की मांग की.
आदिवासी महाजुटान के बाद ग्लाइडसन डुंगडुंग ने बंधू तिर्की की भूमिका पर गंभीर आरोप लगाए. डुंगडुंग का दावा है कि रैली को कांग्रेस के रंग में ढाल दिया गया और हेमंत सोरेन को बुलाने का भी विरोध किया गया था.

परिसीमन को लेकर आदिवासी संगठनों ने पांच सूत्री मांगें रखी हैं.आरक्षित सीटें कम नहीं करने, CNT-SPT एक्ट लागू करने, जमीन वापस दिलाने और पांचवीं अनुसूची के अधिकारों को लागू करने की मांग की गई है.
दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि 4 अगस्त को मनाई जाएगी. नेमरा के लुकैयाटांड़ में मुख्य कार्यक्रम होगा, जहां 14 फीट की प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा. वहीं 9-10 अगस्त को रांची में झारखंड आदिवासी महोत्सव का आयोजन होगा.

केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में चल रहे आदिवासी किसानों के जल सत्याग्रह पर पुलिस ने कार्रवाई की। प्रशासन और आंदोलनकारियों के दावे आमने-सामने हैं।
खूंटी के छप्पन मौजा क्षेत्र में पड़हा राजा के चयन को लेकर नया विवाद सामने आया है. एक पक्ष ने मनीष मुंडा को तो दूसरे ने जेवियर सांगा को पड़हा राजा घोषित किया है. दोनों पक्ष पारंपरिक व्यवस्था का हवाला देते हुए अपने-अपने दावे पर कायम हैं, जिससे समाज में इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है.

हूल दिवस पर भोगनाडीह पहुंचे भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने हेमंत सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक प्रतिबंधों को लेकर सरकार को आदिवासी विरोधी करार दिया तथा सिद्धो-कान्हू के वंशजों के सम्मान से जुड़े सवाल उठाए.
झारखंड आंदोलन के अग्रणी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्मभूषण सम्मान से नवाजा जाएगा. राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में उनकी पत्नी रूपी सोरेन यह सम्मान ग्रहण करेंगी. आदिवासी अधिकारों और झारखंड राज्य निर्माण में उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है.
"परिसीमन का आदिवासी समाज पर प्रभाव एवं संभावित समाधान" विषय पर आयोजित सेमिनार में आदिवासी संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आगामी परिसीमन को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कीं। वक्ताओं ने कहा कि यदि परिसीमन के कारण अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या में कटौती की गई

झारखंड में सरना, सनातन, ईसाई पहचान और डिलिस्टिंग को लेकर बहस तेज हो गई है. चंपई सोरेन के बयान के बाद आदिवासी समाज के भीतर धर्मांतरण, आरक्षण, संवैधानिक अधिकार और सांस्कृतिक पहचान पर नए सवाल खड़े हो गए हैं. क्या यह आदिवासी अस्मिता बचाने की लड़ाई है या समाज के भीतर बढ़ती वैचारिक दरार?
2026 के बाद प्रस्तावित परिसीमन को लेकर झारखंड में आदिवासी समाज की चिंता बढ़ गई है. रांची में आयोजित सेमिनार में ST सीटों में संभावित कटौती, राजनीतिक प्रतिनिधित्व, पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों की सुरक्षा और आदिवासी अधिकारों पर गंभीर सवाल उठाए गए.