रांची में परिसीमन पर आदिवासी संगठनों की चिंता, 2 अगस्त को होगी 'आदिवासी एकता महाजुटान रैली'
“ "परिसीमन का आदिवासी समाज पर प्रभाव एवं संभावित समाधान" विषय पर आयोजित सेमिनार में आदिवासी संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आगामी परिसीमन को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कीं। वक्ताओं ने कहा कि यदि परिसीमन के कारण अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या में कटौती की गई”

रांची प्रेस क्लब में रविवार को "परिसीमन का आदिवासी समाज पर प्रभाव एवं संभावित समाधान" विषय पर आयोजित सेमिनार में आदिवासी संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आगामी परिसीमन को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कीं। वक्ताओं ने कहा कि यदि परिसीमन के कारण अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या में कटौती की गई, तो इसका लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से विरोध किया जाएगा।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने कहा कि झारखंड में आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संविधान ने अनुसूचित जनजातियों के संरक्षण के लिए विशेष प्रावधान किए हैं और आरक्षित सीटों की संख्या कम करना संविधान की मूल भावना के विपरीत होगा।
सेमिनार में वक्ताओं ने कहा कि झारखंड जैसे आदिवासी बहुल राज्य में परिसीमन केवल निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं तय करने का मामला नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक प्रतिनिधित्व, संवैधानिक अधिकारों, पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों की सुरक्षा और लोकतांत्रिक भागीदारी से जुड़ा विषय है। उनका कहना था कि केवल जनसंख्या के आधार पर परिसीमन किए जाने से आदिवासी बहुल क्षेत्रों की राजनीतिक हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती है।
वक्ताओं ने वर्ष 2002 के परिसीमन आयोग का भी जिक्र किया, जिसमें झारखंड की ST आरक्षित विधानसभा सीटों को 28 से घटाकर 22 और लोकसभा सीटों को 5 से घटाकर 4 करने का प्रस्ताव दिया गया था। हालांकि व्यापक विरोध के बाद वर्ष 2008 में कानून में संशोधन कर इन सीटों को वर्ष 2026 तक यथावत रखा गया।
बैठक में मांग की गई कि अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित सीटों में किसी प्रकार की कटौती नहीं की जाए और यदि सीटों की संख्या बढ़ती है तो ST आरक्षित सीटों की संख्या भी समानुपातिक रूप से बढ़ाई जाए। साथ ही पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों की सामाजिक और सांस्कृतिक एकता बनाए रखने तथा परिसीमन की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग भी उठाई गई।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि परिसीमन से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के लिए एक ड्राफ्टिंग कमेटी बनाई जाएगी। इसके अलावा 2 अगस्त 2026 को रांची में "आदिवासी एकता महाजुटान रैली" आयोजित करने और 28 जून को सभी राजनीतिक दलों की विशेष बैठक बुलाने का भी फैसला लिया गया।



