JPSC-JSSC वार्ता में फिर बदली प्रतिनिधिमंडल की तस्वीर, अजीत कुमार और दोनों पत्रकारों के नाम हटे; अब सिर्फ छात्रों से होगी बात
JPSC-JSSC आंदोलन में सरकार से वार्ता के लिए छात्रों ने संशोधित प्रतिनिधिमंडल की सूची जारी कर दी है. नई सूची से पूर्व महाधिवक्ता अजीत कुमार और दोनों पत्रकारों के नाम हटा दिए गए हैं. अब छात्र बिना वकील और पत्रकार के सरकार की कमेटी से बातचीत करेंगे.

Ranchi: JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों और झारखंड सरकार के बीच प्रस्तावित बातचीत अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है. सरकार से वार्ता के लिए आंदोलनकारी छात्रों ने अपने प्रतिनिधिमंडल की संशोधित सूची जारी कर दी है. नई सूची में पूर्व महाधिवक्ता अजीत कुमार और कल शामिल किए गए दोनों पत्रकारों के नाम हटा दिए गए हैं. यानी अब बातचीत में छात्रों की ओर से सिर्फ छात्र प्रतिनिधि ही अपनी बात रखेंगे. यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब प्रतिनिधिमंडल में गैर-छात्र चेहरों की मौजूदगी को लेकर सरकार की आपत्ति सामने आई थी और जयराम महतो समेत कई लोगों ने छात्रों से वार्ता के रास्ते में व्यावहारिक रुख अपनाने की अपील की थी.
कल 8 छात्र, 2 पत्रकार और अजीत कुमार थे साथ
6 अगस्त को जारी पहली सूची में आठ छात्र प्रतिनिधियों के नाम थे—रविन्द्र पासवान, पीयूष कुमार सिंह, रविन्द्र कुमार रवि, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, कार्तिक सोरेन, संदीप कुमार और शालू सिंह. इनके साथ रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष शंभूनाथ चौधरी और पत्रकार विकास वर्मा को अभिभावक के तौर पर शामिल किया गया था. पूर्व महाधिवक्ता अजीत कुमार को कानूनविद और मार्गदर्शक की भूमिका में रखा गया था. छात्रों ने उस समय साफ किया था कि पत्रकार और कानूनविद सरकार के सामने कोई मांग या तथ्य पेश नहीं करेंगे. उनकी भूमिका केवल अभिभावक और मार्गदर्शक की होगी. यहां तक कहा गया था कि पत्रकारों को बैठक के भीतर कैमरा, माइक या रिकॉर्डिंग उपकरण ले जाने की अनुमति नहीं होगी.
सरकार की आपत्ति के बाद बदली तस्वीर
यहीं से प्रतिनिधिमंडल को लेकर असली पेच सामने आया. सरकार चाहती थी कि छात्रों से होने वाली बातचीत में छात्र प्रतिनिधि ही सीधे अपनी मांग रखें. पूर्व महाधिवक्ता अजीत कुमार की मौजूदगी को लेकर सरकार की सहमति नहीं बन सकी. अजीत कुमार के राजनीतिक जुड़ाव और पहले राजनीतिक पार्टी बनाने के इतिहास का हवाला भी इस पूरे विवाद में दिया गया. जयराम महतो ने भी छात्रों से कहा था कि यदि प्रतिनिधिमंडल में मामूली संशोधन से बातचीत का रास्ता खुलता है तो छात्रों को लचीला रुख अपनाना चाहिए. इस बीच सरकार की ओर से बातचीत के लिए चार मंत्रियों की कमेटी बनाए जाने की जानकारी सामने आई. इससे पहले SDO और ADM स्तर के अधिकारी आंदोलन स्थल पर पहुंचे थे और बातचीत का प्रस्ताव रखा था. छात्रों और सरकार के बीच संवाद की कोशिश 5 अगस्त से तेज हुई थी.
अब संशोधित सूची में कौन-कौन?
संशोधित सूची में आंदोलनकारी छात्रों की ओर से जारी नाम हैं—रविन्द्र पासवान, पीयूष कुमार, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, अंकित राज, कार्तिक सोरेन, शालू कुमारी, रविन्द्र कुमार रवि, आनंद कुमार और अंकित कुमार. यानी पुरानी सूची के मुकाबले केवल नाम हटाए ही नहीं गए, बल्कि छात्र प्रतिनिधियों के स्तर पर भी बदलाव किया गया है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अजीत कुमार, शंभूनाथ चौधरी और विकास वर्मा अब प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा नहीं हैं. अब छात्रों ने बिना पत्रकार और वकील के सरकार से बातचीत के लिए तैयार होने का रास्ता चुना है.
वार्ता अब किस दिशा में जाएगी?
प्रतिनिधिमंडल में बदलाव से एक बात साफ है कि छात्र आंदोलन और सरकार के बीच बातचीत को लेकर सबसे बड़ा विवाद अब गैर-छात्र प्रतिनिधियों की मौजूदगी नहीं, बल्कि बातचीत के एजेंडे पर होगा. छात्रों ने पहले ही साफ किया है कि उनकी मांगें परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की जांच, पारदर्शी भर्ती और दोषियों पर कार्रवाई से जुड़ी हैं. दूसरी ओर सरकार बातचीत के जरिए समाधान की दिशा में बढ़ना चाहती है. अब संशोधित प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत होने की स्थिति में सरकार के सामने सीधे छात्र अपनी मांगें रखेंगे. ऐसे में कल तक जिस सवाल पर सबसे ज्यादा चर्चा थी कि ‘अजीत कुमार और पत्रकारों की मौजूदगी में वार्ता होगी या नहीं’, वह फिलहाल खत्म होता दिख रहा है. अब असली परीक्षा इस बात की होगी कि छात्र और सरकार एक-दूसरे की शर्तों के बीच कितना रास्ता निकाल पाते हैं.

specializes in local and regional stories, bringing simple, factual, and timely updates to readers.
Related Posts
झारखंड विधानसभा मार्च में हंगामा: नेहा बोरा समेत छात्र नेताओं पर फेंकी गई स्याही, मचा बवाल





Leave a comment