करम पर्व पर CM हेमंत सोरेन का संदेश, बोले- प्रकृति और संस्कृति से जुड़ाव ही हमारी पहचान
“करम पर्व के मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंडवासियों को शुभकामनाएं और जोहार दिया . करम पर्व को प्रकृति, मानव जीवन, भाई-बहन के प्रेम, सामाजिक एकजुटता और झारखंड की समृद्ध संस्कृति से जुड़ा पर्व बताया। सीएम ने जल, जंगल और जमीन को आने वाली पीढ़ियों की विरासत बताते हुए इनके संरक्षण पर जोर दिया. ”

रांची:- झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार, 22 सितंबर को करम पर्व के अवसर पर राज्य और देशवासियों को शुभकामनाएं और ‘जोहार’ कहा. सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में उन्होंने करम पर्व को प्रकृति, संस्कृति, भाई-बहन के रिश्ते और सामाजिक एकजुटता से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व बताया. सोरेन ने कहा कि करम पर्व झारखंड की पहचान और जीवन-पद्धति का अहम हिस्सा है. उन्होंने इस पर्व के जरिए जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के महत्व पर भी जोर दिया. मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिकता और विकास के साथ आगे बढ़ते हुए अपनी भाषा, लोक-संस्कृति, परंपराओं और प्रकृति के साथ संबंध को मजबूत बनाए रखना जरूरी है. उन्होंने करम पर्व के मौके पर प्रदेश के सभी परिवारों में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की.
करम पर्व को झारखंड की पहचान से जोड़ा
हेमंत सोरेन ने अपने संदेश में कहा कि करम पर्व प्रकृति और मानव जीवन के संबंध, भाई-बहन के स्नेह और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक है. उनके मुताबिक यह पर्व झारखंड की संस्कृति और जीवन-पद्धति में गहराई से जुड़ा हुआ है. करम पर्व के अवसर पर राज्यभर में पारंपरिक पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. प्रकृति और लोकजीवन से जुड़े इस पर्व में करम डाली की पूजा के साथ गीत और सामूहिक नृत्य की परंपरा भी देखने को मिलती है.
जल, जंगल और जमीन के संरक्षण पर जोर
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में जल, जंगल और जमीन को केवल जीवन के आधार के तौर पर नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत के रूप में भी देखने की बात कही. उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस विरासत को सुरक्षित रखना सामूहिक जिम्मेदारी है. करम पर्व की प्रकृति से जुड़ी मान्यताएं पर्यावरण और पारंपरिक जीवनशैली के साथ इसके संबंध को भी सामने लाती हैं. इस पर्व को प्रकृति के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने के अवसर के रूप में भी देखा जाता है.
मांदर की थाप और करम गीतों का किया जिक्र
हेमंत सोरेन ने करम पर्व से जुड़ी लोक परंपराओं का उल्लेख करते हुए अखड़ा में करम डाली की स्थापना, मांदर की थाप, करम गीत और सामूहिक नृत्य को झारखंड की जीवंत लोक-संस्कृति की अभिव्यक्ति बताया. करम पर्व के दौरान कई इलाकों में पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य के कार्यक्रम होते हैं. इन परंपराओं के जरिए प्रकृति, खेती और सामाजिक जीवन से जुड़े संदेश पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ते हैं.
आधुनिकता के साथ परंपराओं को बचाने का संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास और आधुनिकता की राह पर आगे बढ़ते हुए भी अपनी भाषा, संस्कृति, परंपरा और लोकज्ञान से जुड़ाव बनाए रखना जरूरी है. उन्होंने करम पर्व को अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देने वाला अवसर बताया. उनके संदेश में पारंपरिक ज्ञान और प्रकृति के साथ समाज के संबंध को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया. करम पर्व की परंपराएं आज भी झारखंड के कई हिस्सों में सामूहिक रूप से निभाई जाती हैं.
भाई-बहन के रिश्ते और खुशहाली की कामना
अपने संदेश के अंत में हेमंत सोरेन ने करम पर्व के जरिए भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम और विश्वास मजबूत होने की कामना की. उन्होंने समाज में आपसी सद्भाव और एकजुटता बढ़ने की भी शुभकामना दी. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पावन अवसर पर हर परिवार में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली बनी रहे. साथ ही उन्होंने कामना की कि झारखंड प्रकृति और संस्कृति के साथ सामंजस्य बनाते हुए आगे बढ़ता रहे.




