‘गोदी मीडिया’ का मुद्दा, ‘आंदोलन हाईजैक’ का आरोप और विधानसभा में 8,399 करोड़ का अनुपूरक बजट…
“झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र में JPSC-JSSC विवाद को लेकर सियासी हलचल तेज रही. ‘गोदी मीडिया’ और ‘प्रोपगेंडा’ के बयान से लेकर ‘छात्र आंदोलन हाईजैक’ करने के आरोप तक सत्ता पक्ष के नेताओं ने कई मुद्दों पर अपनी बात रखी.”

Ranchi: झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब सिर्फ परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है. विधानसभा के भीतर और बाहर इसे लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है. शुक्रवार को जहां विपक्षी विधायक JPSC-JSSC की परीक्षाएं रद्द करने और CBI जांच की मांग को लेकर सदन के वेल में नारेबाजी करते रहे, वहीं सत्ता पक्ष ने आंदोलन के राजनीतिक इस्तेमाल पर सवाल खड़े किए. मंत्री सुदिव्य सोनू ने आरोप लगाया कि बीजेपी नेता और कोचिंग माफिया छात्र आंदोलन को हाईजैक करने की कोशिश कर रहे हैं. कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव ने सरकार की ओर से छात्रों से सीधे बातचीत की पहल का हवाला दिया. वहीं मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने मीडिया की भूमिका पर सवाल उठाते हुए ‘गोदी मीडिया’ और प्रोपगेंडा का मुद्दा उठाया. इस पूरे घटनाक्रम में सरकार का जोर बातचीत और CID जांच पर है, जबकि विपक्ष CBI जांच और परीक्षाएं रद्द करने की मांग पर अड़ा है.
‘गोदी मीडिया’ से लेकर प्रोपगेंडा तक, शिल्पी नेहा तिर्की का हमला
JPSC-JSSC विवाद के बीच मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने मीडिया की भूमिका को लेकर भी तीखी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि झारखंड में ‘गोदी मीडिया’ आ गई है और अगर मीडिया सच सामने रखने के बजाय प्रोपगेंडा का हिस्सा बनती है, तो पूरा राज्य उसी नैरेटिव का हिस्सा बनकर रह जाएगा. उनका बयान ऐसे समय आया है जब परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. शिल्पी नेहा तिर्की ने सरकार के रुख का बचाव करते हुए यह भी कहा कि उनके शासन में अपनी संस्थाओं पर जांच बैठाने की हिम्मत दिखाई गई है. उन्होंने बीजेपी को चुनौती दी कि अगर उसमें हिम्मत है तो अपने शासन वाले राज्यों में भी इसी तरह की जांच कराए.
सुदिव्य सोनू बोले- छात्रों के आंदोलन को ‘हाईजैक’ न करें BJP और कोचिंग माफिया
मंत्री सुदिव्य सोनू ने छात्रों के प्रस्तावित डेलिगेशन को लेकर सरकार की स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की. उनका कहना है कि सरकार की बातचीत सीधे छात्रों से होनी चाहिए और छात्र प्रतिनिधिमंडल में राजनीतिक लोगों की मौजूदगी नहीं होनी चाहिए. सुदिव्य सोनू ने आरोप लगाया कि बीजेपी नेताओं और कोचिंग माफिया की ओर से आंदोलन को हाईजैक करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें पर्दे के पीछे से राजनीति करने के बजाय सामने आना चाहिए. मंत्री ने जंतर-मंतर के आंदोलनों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां छात्र चेहरे दिखाई देते थे, राजनीतिक चेहरे नहीं. सरकार के इस तर्क का मूल संदेश यही है कि JPSC-JSSC आंदोलन की वैधता पर सवाल नहीं है, लेकिन उसके नेतृत्व और राजनीतिक दिशा को लेकर सत्ता पक्ष आपत्ति जता रहा है.
प्रदीप यादव बोले- सरकार बातचीत चाहती है, CID जांच स्वतंत्र है
कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं का समाधान चाहती है. इसी उद्देश्य से चार मंत्रियों की कमेटी गठित कर छात्रों से बातचीत की पहल की गई है. उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि बातचीत सीधे छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से हो. पत्रकारों और वकीलों को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन सरकार उनसे भी बातचीत के लिए तैयार है. JPSC-JSSC विवाद की जांच को लेकर प्रदीप यादव ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के उस रुख का हवाला दिया, जिसमें CID को स्वतंत्र रूप से जांच करने की बात कही गई है. उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी पर कोई दबाव नहीं है और अगर जरूरत पड़ी तो मुख्यमंत्री के घर की भी तलाशी ली जा सकती है.
विधानसभा में विपक्ष का हंगामा, ‘नौकरी चोर, गद्दी छोड़’ के नारे
सरकार के इन दावों के बीच विधानसभा के भीतर तस्वीर अलग रही. दोपहर 12:30 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होते ही विपक्षी विधायक फिर वेल में पहुंच गए और नारेबाजी शुरू कर दी. ‘नौकरी चोर, गद्दी छोड़’ जैसे नारों के बीच विपक्ष JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं पर सरकार से जवाब मांगता रहा. हंगामे के बावजूद स्पीकर रवींद्र नाथ महतो ने सदन की कार्यवाही आगे बढ़ाई और विभिन्न समितियों की रिपोर्ट पेश की गईं. इसी दौरान वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने 8,399 करोड़ रुपये का पहला अनुपूरक बजट भी सदन में पेश किया. विपक्ष के लगातार विरोध के बावजूद निर्धारित कार्यवाही जारी रही और बाद में सदन को सोमवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया.
बाबूलाल मरांडी की CBI जांच की मांग, सरकार पर गंभीर आरोप
विपक्ष की ओर से नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने JPSC-JSSC विवाद की जांच हाईकोर्ट की निगरानी में CBI से कराने की मांग की है. उनका आरोप है कि CID और ACB की जांच से छात्रों को न्याय मिलने की उम्मीद कम हो रही है. विपक्ष का तर्क है कि परीक्षा प्रक्रिया में अगर बड़े स्तर पर गड़बड़ी के आरोप हैं तो जांच ऐसी एजेंसी से होनी चाहिए जिस पर राजनीतिक प्रभाव का सवाल न उठे. बीजेपी ने संबंधित परीक्षाओं को रद्द करने की मांग भी दोहराई है. इस तरह विवाद का सबसे बड़ा फर्क यही है—सरकार CID जांच और संवाद की बात कर रही है, जबकि विपक्ष CBI जांच और परीक्षा रद्द करने पर जोर दे रहा है.
विधानसभा के बाहर BJP-AJSU का धरना, जयराम महतो की टी-शर्ट भी चर्चा में
सदन के बाहर भी JPSC-JSSC मुद्दे पर विपक्ष का दबाव जारी रहा. BJP-AJSU के विधायक लगातार दूसरे दिन विधानसभा परिसर के बाहर धरने पर बैठे और छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया. डुमरी विधायक जयराम महतो भी अलग अंदाज में विधानसभा पहुंचे. उनकी लाल टी-शर्ट पर JPSC-JSSC परीक्षाओं से जुड़ी मांगें लिखी थीं. इनमें संबंधित नियुक्ति परीक्षाओं को रद्द करने, दोषियों की गिरफ्तारी और CBI/ED जांच जैसी मांगें शामिल थीं.



