निशा भगत मौत मामला: महिला आयोग ने लिया संज्ञान, भाजपा ने 595 मंडलों में फूंका हेमंत सरकार का पुतला
झारखंड की सामाजिक कार्यकर्ता निशा भगत की संदिग्ध मौत का मामला गरमा गया है. राष्ट्रीय महिला आयोग ने सात दिनों में कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है. इधर, भाजपा ने प्रदेश के 595 मंडलों में हेमंत सरकार का पुतला दहन कर सीबीआई जांच और पिठौरिया थाना प्रभारी व अजय तिर्की की गिरफ्तारी की मांग की.

रांची:- सामाजिक कार्यकर्ता निशा भगत की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर तूल पकड़ता जा रहा है. एक तरफ राष्ट्रीय महिला आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों से सात दिनों के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) मांगी है, तो दूसरी तरफ भाजपा ने सीबीआई जांच की मांग को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन तेज कर दिया है. शनिवार को भाजपा ने प्रदेश के सभी 595 मंडलों में हेमंत सरकार के खिलाफ पुतला दहन कर विरोध जताया. पार्टी ने इस दौरान निशा भगत को न्याय दिलाने, पिठौरिया थाना प्रभारी और अजय तिर्की की गिरफ्तारी की मांग उठाई. वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने भी इस घटना को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. इस पूरे घटनाक्रम ने झारखंड में आदिवासी महिलाओं की सुरक्षा और पुलिस की जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है.
राष्ट्रीय महिला आयोग ने मांगी सात दिनों में रिपोर्ट
निशा भगत की मौत के मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों से सात दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है. भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष और पूर्व सांसद गीता कोड़ा ने आयोग के इस कदम का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि यह पहल निशा के परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में अहम साबित हो सकती है. गीता कोड़ा के मुताबिक, निशा ने मौत से पहले सोशल मीडिया लाइव के जरिए ऑनलाइन ट्रोलिंग, उत्पीड़न और पुलिस-प्रशासन से जुड़ी परेशानियों का जिक्र किया था. आयोग ने पुलिस की कार्रवाई, पहले दर्ज शिकायतों और फेसबुक लाइव समेत डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया है.
फेसबुक लाइव और पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
गीता कोड़ा ने कहा कि निशा ने लाइव प्रसारण के दौरान पिठौरिया थाना प्रभारी से संपर्क कर अपनी परेशानी और जीवन समाप्त करने जैसे विचारों की जानकारी दी थी. ऐसे में पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच जरूरी है. उन्होंने कहा कि अगर पुलिस या प्रशासन की तरफ से किसी स्तर पर लापरवाही हुई है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए. साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. भाजपा ने भी इस मामले में पुलिस की भूमिका की जांच और सभी डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग की है.
भाजपा ने 595 मंडलों में किया पुतला दहन
सीबीआई जांच की मांग को लेकर भाजपा ने शनिवार को प्रदेश के सभी 595 मंडलों में हेमंत सरकार का पुतला दहन किया. भाजपा एसटी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सन्नी टोप्पो ने कहा कि निशा भगत आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए मुखर होकर आवाज उठाती थीं. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस-प्रशासन की निष्क्रियता और कुछ प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण निशा को न्याय नहीं मिल पाया. सन्नी टोप्पो ने दावा किया कि निशा के घर में पहले भी डकैती हुई थी और इसकी शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई. भाजपा ने पिठौरिया थाना प्रभारी और अजय तिर्की की गिरफ्तारी के साथ मामले की सीबीआई जांच की अनुशंसा करने की मांग की.
चंपाई सोरेन ने सरकार को घेरा, आदिवासी सुरक्षा पर सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने भी निशा भगत की मौत को लेकर राज्य सरकार पर हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि शोषण, धर्मांतरण और जमीन से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाने वाली आदिवासी बेटी की मौत कई गंभीर सवाल खड़े करती है. चंपाई सोरेन ने रामेश्वर मुर्मू, सूर्या हांसदा और सोमा मुंडा का जिक्र करते हुए कहा कि आदिवासी अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले लोगों के साथ लगातार अन्याय की घटनाएं सामने आ रही हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि जल-जंगल-जमीन और आदिवासी अस्मिता की लड़ाई लड़ने वालों की सुरक्षा आखिर कौन सुनिश्चित करेगा.
कानून-व्यवस्था पर सियासी घमासान, निष्पक्ष जांच की मांग
चंपाई सोरेन ने झारखंड की कानून-व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि राज्य में आम नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा है. उन्होंने सरकार पर जनहित के मुद्दों की अनदेखी करने का आरोप लगाया और निशा भगत की मौत की निष्पक्ष जांच की मांग की. दूसरी ओर भाजपा ने साफ किया है कि जब तक मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग पूरी नहीं होती, तब तक उसका विरोध जारी रहेगा. राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से सात दिनों में रिपोर्ट मांगे जाने के बाद अब पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई पर भी नजर रहेगी. फिलहाल निशा भगत की मौत का मामला जांच के साथ-साथ झारखंड की राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बन गया है.

