JSCB ने रचा नया वित्तीय रिकॉर्ड, 4,000 करोड़ के पार पहुंचा कारोबार; घाटे से मुनाफे तक की मिसाल बना बैंक
झारखंड स्टेट कोऑपरेटिव बैंक (JSCB) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में पहली बार 4,000 करोड़ रुपये से अधिक का कुल कारोबार दर्ज किया है. बैंक का कुल बिजनेस 4,042.53 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि डिपॉजिट 9.2 प्रतिशत बढ़कर 2,866.28 करोड़ रुपये हो गया.

Ranchi: झारखंड स्टेट कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (JSCB) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में ऐसा प्रदर्शन दर्ज किया है, जिसने राज्य के सहकारी बैंकिंग सेक्टर में एक नया बेंचमार्क स्थापित किया है. 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्तीय वर्ष में बैंक का कुल बिजनेस पहली बार 4,000 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार करते हुए 4,042.53 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. जमा राशि (डिपॉजिट) में 9.2 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज हुई, जबकि ऋण वितरण (एडवांस) में भी लगातार विस्तार बना रहा. बैंक ने 26.23 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट अर्जित किया और टैक्स के बाद 19.01 करोड़ रुपये का लाभ दर्ज किया. सबसे अहम बात यह है कि करीब तीन वर्ष पहले लगभग 90 करोड़ रुपये के संचित घाटे से जूझ रहा बैंक अब लगातार लाभ कमाने वाली संस्था बन चुका है. वित्तीय अनुशासन, जोखिम आधारित बैंकिंग, बेहतर गवर्नेंस और बिजनेस विस्तार की रणनीति ने JSCB को एक स्थिर और मजबूत सहकारी बैंक के रूप में स्थापित किया है.
जमा राशि में सबसे तेज बढ़ोतरी
वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान बैंक का कुल बिजनेस 4,042.53 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो पिछले वित्तीय वर्ष के 3,766 करोड़ रुपये की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है. बैंक के डिपॉजिट 2,624.61 करोड़ रुपये से बढ़कर 2,866.28 करोड़ रुपये हो गए, यानी एक वर्ष में 9.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. वहीं एडवांस 1,141.39 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,176.25 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. आंकड़े बताते हैं कि बैंक ने केवल कारोबार बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि संसाधनों की गुणवत्ता और वित्तीय संतुलन बनाए रखने पर भी समान रूप से ध्यान दिया. जमा राशि में मजबूत वृद्धि यह संकेत देती है कि ग्राहकों का भरोसा बैंक पर लगातार बढ़ा है, जबकि नियंत्रित ऋण विस्तार बैंक की सतर्क क्रेडिट नीति को दर्शाता है.
मुनाफे में निरंतर सुधार, रिजर्व और बैलेंस शीट भी हुई मजबूत
JSCB ने वर्ष 2025-26 में 26.23 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया. टैक्स प्रावधान के बाद बैंक का शुद्ध लाभ (PAT) 19.01 करोड़ रुपये रहा. लगातार लाभ अर्जित करने का असर बैंक की वित्तीय स्थिति पर भी दिखाई दिया. संचित मुनाफा बढ़कर 32.85 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि रिजर्व एवं सरप्लस 75.19 करोड़ रुपये से बढ़कर 94.28 करोड़ रुपये हो गया. बैंक की बैलेंस शीट का आकार बढ़कर 4,389.64 करोड़ रुपये दर्ज किया गया. पूंजी 163.35 करोड़ रुपये और उधारी 886.53 करोड़ रुपये रही. इन संकेतकों से स्पष्ट है कि बैंक ने केवल लाभ कमाने पर ही नहीं, बल्कि अपनी पूंजीगत मजबूती और दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता पर भी समान फोकस रखा है.
90 करोड़ के घाटे से लाभकारी संस्था बनने तक का सफर
आज के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन को समझने के लिए तीन वर्ष पीछे जाना जरूरी है. उस समय JSCB करीब 90 करोड़ रुपये के संचित घाटे से जूझ रहा था और बैंक की वित्तीय स्थिति गंभीर चुनौती के दौर में थी. इसके बाद बैंक ने वित्तीय अनुशासन, खर्च नियंत्रण, लोन मॉनिटरिंग, संसाधनों के बेहतर उपयोग और गवर्नेंस सुधार पर लगातार काम किया. चेयरपर्सन विभा सिंह के नेतृत्व में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और प्रबंधन टीम ने बैंक के परिचालन ढांचे को मजबूत करने, बिजनेस मोबिलाइजेशन बढ़ाने और जोखिम प्रबंधन को प्राथमिकता दी. यही कारण है कि कुछ ही वर्षों में बैंक घाटे से निकलकर लगातार लाभ अर्जित करने की स्थिति में पहुंच गया. यह बदलाव केवल बैलेंस शीट के आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्थागत प्रबंधन और वित्तीय अनुशासन में आए सुधार को भी दर्शाता है.
अब अगली चुनौती—ग्रोथ के साथ एसेट क्वालिटी बनाए रखना
JSCB के मौजूदा वित्तीय संकेतक बैंक की स्थिरता और बेहतर संचालन क्षमता की पुष्टि करते हैं. हालांकि आने वाले वर्षों में बैंक के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वह जमा राशि में जारी तेज वृद्धि को उत्पादक ऋण वितरण में परिवर्तित करते हुए एसेट क्वालिटी को भी मजबूत बनाए रखे. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बैंक ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि वित्त, स्वयं सहायता समूहों और सहकारी संस्थाओं के बीच अपनी पहुंच को योजनाबद्ध तरीके से विस्तार देता है तथा जोखिम प्रबंधन की मौजूदा रणनीति को बनाए रखता है, तो आने वाले वर्षों में JSCB न केवल कारोबार बल्कि लाभप्रदता के मामले में भी नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है. वित्तीय वर्ष 2025-26 के परिणाम इस बात का संकेत हैं कि झारखंड का यह सहकारी बैंक अब केवल रिकवरी की कहानी नहीं, बल्कि सतत विकास और संस्थागत मजबूती का उदाहरण बनता जा रहा है.

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