झारखंड के लिए गौरव का क्षण: गुरुजी शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्मभूषण, पत्नी रूपी सोरेन करेंगी सम्मान ग्रहण
“झारखंड आंदोलन के अग्रणी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्मभूषण सम्मान से नवाजा जाएगा. राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में उनकी पत्नी रूपी सोरेन यह सम्मान ग्रहण करेंगी. आदिवासी अधिकारों और झारखंड राज्य निर्माण में उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है.”

Ranchi: झारखंड के इतिहास में आज का दिन एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दर्ज होने जा रहा है. राज्य आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्मभूषण सम्मान प्रदान किया जाएगा. राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले विशेष समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू यह सम्मान देंगी. गुरुजी की ओर से उनकी पत्नी रूपी सोरेन इस सम्मान को ग्रहण करेंगी. आदिवासी समाज के अधिकारों, सामाजिक न्याय और अलग झारखंड राज्य के निर्माण के लिए किए गए उनके लंबे संघर्ष को देखते हुए केंद्र सरकार ने उन्हें देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित करने का निर्णय लिया है. यह सम्मान केवल शिबू सोरेन के योगदान की पहचान नहीं है, बल्कि पूरे झारखंड और आदिवासी समाज के संघर्षों को राष्ट्रीय स्तर पर मिली एक बड़ी स्वीकृति भी माना जा रहा है.
आदिवासी अधिकारों की लड़ाई को मिला राष्ट्रीय सम्मान
शिबू सोरेन ने अपने सार्वजनिक जीवन का बड़ा हिस्सा आदिवासी समुदाय के अधिकारों और सामाजिक न्याय के लिए समर्पित किया. उन्होंने ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में शोषण के खिलाफ आवाज उठाई तथा लोगों को संगठित करने का काम किया. उनके नेतृत्व में कई सामाजिक और जनजागरण अभियान चलाए गए, जिनका व्यापक प्रभाव झारखंड के सामाजिक ढांचे पर पड़ा. पद्मभूषण सम्मान को उनके इसी दीर्घकालिक योगदान की राष्ट्रीय मान्यता के रूप में देखा जा रहा है.
अलग झारखंड आंदोलन के प्रमुख सूत्रधार
झारखंड राज्य के गठन की लड़ाई में शिबू सोरेन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही. उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना कर अलग राज्य की मांग को जनआंदोलन का स्वरूप दिया. दशकों तक चले संघर्ष के बाद वर्ष 2000 में झारखंड राज्य का गठन संभव हो सका. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य निर्माण की प्रक्रिया में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता.
भारत रत्न की मांग फिर हुई तेज
केंद्र सरकार द्वारा पद्मभूषण देने की घोषणा के बाद एक बार फिर उन्हें भारत रत्न देने की मांग चर्चा में है. विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने पहले भी यह मांग उठाई थी. झारखंड विधानसभा में भी उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित करने के पक्ष में प्रस्ताव पारित किया जा चुका है. समर्थकों का मानना है कि राज्य निर्माण और आदिवासी समाज के उत्थान में उनके योगदान को देखते हुए वे इस सम्मान के प्रबल दावेदार हैं.
संघर्षों से भरा रहा राजनीतिक जीवन
शिबू सोरेन का राजनीतिक सफर कई दशकों तक फैला रहा. वे कई बार लोकसभा सांसद चुने गए और झारखंड के मुख्यमंत्री के साथ-साथ केंद्र सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारियां भी संभालीं. 4 अगस्त 2025 को 81 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया था. हालांकि उनका निधन एक युग का अंत माना गया, लेकिन उनके विचार, आंदोलन और सामाजिक योगदान आज भी लाखों लोगों को प्रेरित करते हैं. मरणोपरांत पद्मभूषण सम्मान उनके जीवन संघर्ष और राष्ट्र निर्माण में योगदान की स्थायी पहचान बनकर सामने आया है.

