खूंटी में पड़हा राजा के चयन पर विवाद, मनीष मुंडा और जेवियर सांगा के दावे से छप्पन मौजा में बढ़ी बहस
“खूंटी के छप्पन मौजा क्षेत्र में पड़हा राजा के चयन को लेकर नया विवाद सामने आया है. एक पक्ष ने मनीष मुंडा को तो दूसरे ने जेवियर सांगा को पड़हा राजा घोषित किया है. दोनों पक्ष पारंपरिक व्यवस्था का हवाला देते हुए अपने-अपने दावे पर कायम हैं, जिससे समाज में इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है.”

Khunti: खूंटी जिले में पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था के अहम पद पड़हा राजा के चयन को लेकर नया विवाद सामने आया है. छप्पन मौजा क्षेत्र में दिवंगत पड़हा राजा सोमा मुंडा के निधन के बाद उनके उत्तराधिकारी के चयन को लेकर दो अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं. एक पक्ष का कहना है कि पारंपरिक मुंडा-पाहनों और प्रतिनिधियों की सर्वसम्मति से सोमा मुंडा के पुत्र मनीष मुंडा को नया पड़हा राजा चुना गया है, जबकि दूसरे पक्ष ने जेवियर सांगा को पड़हा राजा घोषित किया है. दो समानांतर दावों के बाद इस मुद्दे पर सामाजिक और पारंपरिक स्तर पर बहस तेज हो गई है. दोनों पक्ष अपने-अपने चयन को परंपरा के अनुरूप बता रहे हैं, जिससे छप्पन मौजा क्षेत्र में पड़हा व्यवस्था को लेकर चर्चा का दौर जारी है.
मनीष मुंडा के चयन का दावा, परंपरा का दिया गया हवाला
दिवंगत पड़हा राजा सोमा मुंडा की पत्नी अमृता मुंडा ने दावा किया कि तीन जुलाई को जेरापा बाजार में छप्पन मौजा के मुंडा, पाहन और पारंपरिक प्रतिनिधियों की मौजूदगी में सर्वसम्मति से मनीष मुंडा को पड़हा राजा चुना गया. उनका कहना है कि पड़हा व्यवस्था मुंडा समाज की प्राचीन स्वशासन प्रणाली है, जिसकी परंपरा महाराजा मदरा मुंडा के समय से चली आ रही है. उन्होंने कहा कि पड़हा राजा का पद केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आदिवासी संस्कृति, रीति-रिवाज, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक व्यवस्था के संरक्षण से भी जुड़ा हुआ है. उनके अनुसार समाज में एक समय में केवल एक ही पड़हा राजा हो सकता है और चयन भी पारंपरिक व्यवस्था के अनुरूप होना चाहिए.
दूसरे चयन पर उठे सवाल, धार्मिक आधार पर बढ़ी चर्चा
अमृता मुंडा ने दूसरे पक्ष द्वारा जेवियर सांगा को पड़हा राजा घोषित किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि पारंपरिक व्यवस्था में वही व्यक्ति इस पद के योग्य माना जाता है, जो समाज की रूढ़िवादी परंपराओं और पूजा-पद्धति का पालन करता हो. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि दिवंगत सोमा मुंडा सभी धर्मों और समुदायों के लोगों को साथ लेकर चलते थे तथा उनके कार्यकाल में कभी धार्मिक आधार पर ऐसा विवाद सामने नहीं आया. उन्होंने समाज से अपील की कि पड़हा व्यवस्था को धार्मिक मतभेद का विषय बनाने के बजाय सामाजिक एकता और पारंपरिक व्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान दिया जाए.
'समाज को एकजुट रखना पहली प्राथमिकता' : मनीष मुंडा
नवनिर्वाचित होने का दावा करने वाले मनीष मुंडा ने कहा कि वे अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए पड़हा व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास करेंगे. उनके अनुसार गांवों के बीच समन्वय बनाए रखना, सामाजिक विवादों का समाधान करना और पारंपरिक व्यवस्था को संरक्षित रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी होगी. उन्होंने भी दोहराया कि समाज में केवल एक ही पड़हा राजा होना चाहिए और चयन हमेशा पारंपरिक नियमों के अनुसार ही होना चाहिए. फिलहाल छप्पन मौजा क्षेत्र में पड़हा राजा के दो अलग-अलग दावों को लेकर विवाद बना हुआ है और दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं.

