झारखंड निकाय चुनाव: बागी नेताओं पर बीजेपी सख्त, शो-कॉज नोटिस की तैयारी
झारखंड में नगर निकाय चुनाव के बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने पार्टी लाइन से हटकर चुनाव लड़ने या अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ प्रचार करने वाले नेताओं पर सख्त रुख अपना लिया है.
झारखंड में नगर निकाय चुनाव के बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने पार्टी लाइन से हटकर चुनाव लड़ने या अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ प्रचार करने वाले नेताओं पर सख्त रुख अपना लिया है.
लातेहार नगर पंचायत चुनाव से पहले विवाद खड़ा हो गया है. बीजेपी ने प्रत्याशी बिलासी देवी के पति और सरकारी कर्मचारी निलेश टोप्पो पर पद के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से उन्हें पदमुक्त या तबादला करने की मांग की है.
पूर्व मंत्री और तीन बार विधायक रहे दुलाल भुइयां 15 फरवरी को शिवरात्रि के दिन बीजेपी में शामिल होंगे. मीडिया से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि JMM को हाईजैक कर लिया गया है और पार्टी की दिशा बदल चुकी है.
झारखंड में चल रहे नगर निकाय चुनाव के बीच राजनीतिक गठबंधनों के साथ-साथ अब पार्टियों के भीतर की खींचतान भी खुलकर सामने आने लगी है. बीजेपी में भी अंदरूनी असंतोष और नाराजगी के संकेत मिल रहे हैं.
निकाय चुनाव से पहले लाइसेंसी हथियार जमा नहीं कराने पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और सांसद आदित्य साहू ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार भय और आतंक के माहौल में चुनाव कराना चाहती है और तत्काल आदेश जारी करने की मांग की.
नगर निकाय चुनाव 2026 के बीच मंईयां योजना को लेकर सियासत गरमा गई है. बीजेपी ने आरोप लगाया है कि चुनाव आचार संहिता लागू रहते सरकार के इशारे पर 20 हजार लोन से जुड़ी खबरें छपवाकर वोटरों को प्रभावित करने की कोशिश की गई.
झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों को लेकर झामुमो के भीतर सियासी हलचल तेज है. शिबू सोरेन के निधन के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं की मांग है कि उनकी बेटी अंजनी सोरेन को राज्यसभा भेजा जाए. पार्टी के भीतर इसे सम्मान, संगठन और राजनीतिक संदेश से जोड़कर देखा जा रहा है.
बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी को लेकर विपक्ष ने जमकर हंगामा किया. सदन के भीतर और बाहर सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया गया. इसी बीच पटना सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद पप्पू यादव की जमानत पर होने वाली सुनवाई टाल दी गई.

पप्पू यादव की गिरफ्तारी को सिर्फ कानूनी कार्रवाई मानना कई सवालों को नजरअंदाज करना होगा. 30 साल पुराने केस में आधी रात को हुई गिरफ्तारी ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है. अगर मामला इतना पुराना था तो कार्रवाई अब क्यों हुई? क्या यह कानून का पालन है या फिर सवाल पूछने वाले के खिलाफ राजनीतिक संदेश?

बिहार की राजनीति में शुक्रवार देर रात बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को पटना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के कुछ घंटों बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई
बजट सत्र के दौरान लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव प्रधानमंत्री के जवाब के बिना पारित हो गया. 2004 के बाद यह पहली बार हुआ. वहीं, राज्यसभा में राहुल गांधी के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली.