निकाय चुनाव में ‘20 हजार लोन’ का मुद्दा, चुनाव आयोग के दरवाजे पर BJP
“नगर निकाय चुनाव 2026 के बीच मंईयां योजना को लेकर सियासत गरमा गई है. बीजेपी ने आरोप लगाया है कि चुनाव आचार संहिता लागू रहते सरकार के इशारे पर 20 हजार लोन से जुड़ी खबरें छपवाकर वोटरों को प्रभावित करने की कोशिश की गई.”

Ranchi: झारखंड में नगर निकाय चुनाव 2026 की प्रक्रिया चल रही है और इसी बीच मंईयां योजना को लेकर सियासत तेज हो गई है। बीजेपी ने राज्य निर्वाचन आयोग से शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि चुनाव आचार संहिता लागू रहने के बावजूद राज्य सरकार के इशारे पर अखबारों में मंईयां योजना के लाभुकों को रोजगार के लिए 20 हजार रुपये लोन देने की खबरें प्रकाशित कराई गईं। बीजेपी का दावा है कि यह खबरें सामान्य सूचना नहीं, बल्कि वोटरों को प्रभावित करने की सोची-समझी कोशिश हैं। पार्टी ने इसे आदर्श चुनाव आचार संहिता का सीधा उल्लंघन बताते हुए चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग की है। अब यह मामला चुनाव आयोग के संज्ञान में है और राजनीतिक हलकों में इस पर तीखी बहस शुरू हो चुकी है।
चुनाव के बीच लोन की खबर पर उठे सवाल
बीजेपी की ओर से दी गई शिकायत में कहा गया है कि 27 जनवरी 2026 को नगर निकाय चुनाव की घोषणा हो चुकी थी और 23 फरवरी तक आचार संहिता लागू है। इसके बावजूद 8 फरवरी को सभी बड़े अखबारों में मंईयां योजना के तहत 20 हजार रुपये लोन की खबरें एक साथ छपीं। पार्टी का आरोप है कि यह खबरें सरकार के इशारे पर प्रकाशित कराई गईं ताकि चुनाव के दौरान मतदाताओं को प्रभावित किया जा सके। बीजेपी का कहना है कि जब आचार संहिता लागू हो, तब किसी भी तरह की नई घोषणा या लाभ की बात करना नियमों के खिलाफ है।
“महिलाओं के नाम पर वोट साधने की कोशिश”
बीजेपी ने साफ कहा है कि वह महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण के पक्ष में है, लेकिन चुनाव के समय योजनाओं का प्रचार कर वोट साधना गलत है। पार्टी का आरोप है कि निकाय चुनाव के दौरान महिलाओं को कोई वास्तविक लोन नहीं दिया जा रहा, बल्कि सिर्फ चुनावी माहौल बनाने के लिए ऐसी घोषणाएं करवाई जा रही हैं। बीजेपी ने चुनाव आयोग से मांग की है कि चुनाव परिणाम तक सरकार को किसी भी तरह की प्रलोभन वाली घोषणा से रोका जाए और इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।



