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सरना vs सनातन विवाद: Nisha Oraon के बयान पर गरमाई सियासत, BJP के समर्थन से डिलिस्टिंग बहस तेज
राजनीति

सरना vs सनातन विवाद: Nisha Oraon के बयान पर गरमाई सियासत, BJP के समर्थन से डिलिस्टिंग बहस तेज

झारखंड में सरना और सनातन को लेकर छिड़ा विवाद अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है. IRS अधिकारी Nisha Oraon के बयान के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है और Bharatiya Janata Party खुलकर उनके समर्थन में उतरती नजर आ रही है.

वाराणसी में अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा बयान– गिरफ्तारी देंगे, विरोध नहीं करेंगे, CCTV में कैद है पूरी सच्चाई
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वाराणसी में अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा बयान– गिरफ्तारी देंगे, विरोध नहीं करेंगे, CCTV में कैद है पूरी सच्चाई

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने वाराणसी में अपने खिलाफ दर्ज मामले और संभावित गिरफ्तारी को लेकर स्पष्ट कहा है कि पुलिस कार्रवाई होने पर वे विरोध नहीं करेंगे, बल्कि पूरा सहयोग देंगे। उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप झूठे हैं और समय के साथ सच्चाई सामने आ जाएगी।

सरना धर्म कोड पर फिर गरमाई राजनीति, विधानसभा में हेमलाल मुर्मू ने केंद्र पर साधा सीधा निशाना
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झारखंड

सरना धर्म कोड पर फिर गरमाई राजनीति, विधानसभा में हेमलाल मुर्मू ने केंद्र पर साधा सीधा निशाना

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन सरना धर्म कोड का मुद्दा फिर गरमा गया. हेमलाल मुर्मू ने केंद्र सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि आदिवासी समाज की अलग धार्मिक पहचान की मांग लंबे समय से लंबित है.

पेसा को लेकर झारखंड में सियासी संग्राम, कांग्रेस का पलटवार—आदिवासी स्वशासन से खिलवाड़ नहीं चलेगा
झारखंड

पेसा को लेकर झारखंड में सियासी संग्राम, कांग्रेस का पलटवार—आदिवासी स्वशासन से खिलवाड़ नहीं चलेगा

पेसा नियमावली को लेकर झारखंड की राजनीति में टकराव तेज हो गया है. कांग्रेस ने भाजपा पर आदिवासी समाज को भ्रमित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पेसा कोई साधारण कानून नहीं, बल्कि आदिवासी स्वशासन और ग्रामसभा की संवैधानिक ताकत है.

पेसा पर आदिवासी संगठनों की आशंका, सरना समिति ने कहा: बाहरियों को लाभ देने पर होगा पुरजोर विरोध
झारखंड

पेसा पर आदिवासी संगठनों की आशंका, सरना समिति ने कहा: बाहरियों को लाभ देने पर होगा पुरजोर विरोध

कैबिनेट से पेसा नियमावली को मंजूरी मिलने के बाद अब आदिवासी संगठनों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं. केंद्रीय सरना समिति ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि नियमावली आदिवासी समाज और ग्राम सभा को मजबूत करने वाली होनी चाहिए.