हाथ में कैंची, दिमाग में आतंकी एजेंडा: दर्जी बनकर छिपा था जैश–अलकायदा से जुड़ा फैजान, ATS की बड़ी कार्रवाई
नवसारी में दर्जी बनकर रह रहा फैजान शेख असल में जैश-ए-मोहम्मद और अल-कायदा से जुड़ी आतंकी साजिश का हिस्सा था. गुजरात ATS ने हथियार और विस्फोटक के साथ उसे गिरफ्तार किया है. शुरुआती जांच में ऑनलाइन कट्टरपंथ, टारगेटेड हमले और स्लीपर सेल कनेक्शन सामने आए हैं.

गुजरात के नवसारी की एक तंग गली में बैठा दर्जी, कपड़े सिलता एक नौजवान—दिखने में आम, लेकिन भीतर से खतरनाक. गुजरात ATS की ताज़ा कार्रवाई ने यही सच्चाई उजागर की है. कैंची और सुई के बीच छिपा यह युवक आतंकी संगठनों के एजेंडे पर काम कर रहा था. 19 वर्षीय फैजान शेख, जो खुद को एक मामूली टेलर के तौर पर पेश कर रहा था, असल में जैश-ए-मोहम्मद और अल-कायदा से जुड़ी विचारधारा से प्रभावित था और टारगेटेड हमलों की तैयारी में जुटा हुआ था. ATS के मुताबिक, फैजान न सिर्फ ऑनलाइन कट्टरपंथी नेटवर्क के संपर्क में था, बल्कि हथियार और विस्फोटक जुटाकर किसी बड़ी वारदात की जमीन भी तैयार कर चुका था. यह गिरफ्तारी सिर्फ एक आरोपी की नहीं, बल्कि उस बदलते आतंकी पैटर्न की तस्वीर है जिसमें छोटे शहर, युवा चेहरे और ‘नॉर्मल’ पहचान के पीछे साजिशें पल रही हैं.
कैसे पकड़ा गया फैजान
गुजरात ATS को खुफिया इनपुट मिला था कि नवसारी के चारपुल–झालावाड़ इलाके में रहने वाला एक युवक संदिग्ध गतिविधियों में शामिल है. जांच आगे बढ़ी तो सामने आया कि फैजान शेख, मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रामपुर का रहने वाला है और पिछले कुछ वर्षों से नवसारी में दर्जी का काम कर रहा था. ATS ने योजनाबद्ध तरीके से निगरानी की और छापेमारी के दौरान उसे गिरफ्तार कर लिया. तलाशी में उसके पास से अवैध हथियार, जिंदा कारतूस और विस्फोटक सामग्री बरामद हुई. जांच एजेंसियों का मानना है कि यह सामग्री किसी तात्कालिक जरूरत के लिए नहीं, बल्कि सुनियोजित हमले के लिए जुटाई गई थी.
ऑनलाइन कट्टरपंथ से ऑफलाइन साजिश तक का रास्ता
जांच में सामने आया है कि फैजान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स—इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और टेलीग्राम—के जरिए कट्टरपंथी कंटेंट के संपर्क में आया. यहीं से उसका संपर्क पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स तक पहुंचा. ATS को उसके मोबाइल से जैश और अल-कायदा से जुड़े प्रोपेगेंडा वीडियो, भड़काऊ भाषण, जिहादी साहित्य और टारगेट चिन्हित की गई तस्वीरें मिली हैं. कुछ नामों और जगहों को घेरकर मार्क किया गया था, जिससे साफ है कि वह महज विचारधारा तक सीमित नहीं था, बल्कि ज़मीन पर कार्रवाई की तैयारी कर रहा था.
मकसद था टारगेटेड किलिंग और दहशत फैलाना
पूछताछ में सामने आया है कि फैजान का मकसद टारगेटेड हत्याओं के ज़रिये डर और अस्थिरता पैदा करना था. वह खुद को ‘लोन वुल्फ’ की तरह तैयार कर रहा था—ऐसा आतंकी जो किसी बड़े मॉड्यूल का हिस्सा दिखे बिना हमला करे. ATS का मानना है कि इतनी कम उम्र में हथियारों की व्यवस्था और विचारधारात्मक प्रशिक्षण बिना बाहरी नेटवर्क के संभव नहीं है. अब एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि हथियारों की सप्लाई चेन, फंडिंग और अन्य स्लीपर सेल्स कहां तक फैले हैं.
स्लीपर सेल का नया चेहरा और सुरक्षा एजेंसियों की चुनौती
फैजान शेख की गिरफ्तारी एक चेतावनी है. आतंकी संगठन अब पारंपरिक नेटवर्क की जगह छोटे शहरों, सामान्य पेशों और डिजिटल रेडिकलाइजेशन पर फोकस कर रहे हैं. दर्जी, मजदूर या छात्र—पहचान साधारण, लेकिन एजेंडा खतरनाक. कोर्ट ने फैजान को 12 दिन की ATS रिमांड पर भेज दिया है. आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े और खुलासे होने की उम्मीद है. यह कार्रवाई दिखाती है कि खतरा सिर्फ सीमाओं पर नहीं, बल्कि भीतर, आम दिखने वाली ज़िंदगियों के बीच भी पनप रहा है.

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