केंद्रीय बजट के बाद घरेलू शेयर बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है. रविवार को छुट्टी के बावजूद बजट के चलते बाजार खुला था और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के भाषण के बाद निवेशकों को जोरदार झटका लगा. जहां भाषण से पहले सेंसेक्स 400 अंकों से ज्यादा की तेजी में था, वहीं बजट खत्म होते-होते इसमें करीब 3,000 अंकों की गिरावट आ गई. अंत में सेंसेक्स 1,546 अंक टूटकर बंद हुआ, जिससे निवेशकों के करीब 11 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए.
सोमवार को सुस्त शुरुआत, फिर तेज उतार-चढ़ाव
बजट के अगले कारोबारी दिन यानी सोमवार को भी बाजार में अस्थिरता बनी रही. बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 80,722 के मुकाबले गिरकर 80,555 पर खुला और शुरुआती कारोबार में 80,480 तक फिसल गया. हालांकि कुछ ही मिनटों बाद बाजार ने जोरदार रिकवरी दिखाई और सेंसेक्स 466 अंकों की तेजी के साथ 81,211 के स्तर तक पहुंच गया. लेकिन यह तेजी टिक नहीं पाई और दोबारा बिकवाली हावी हो गई. दोपहर 11:24 बजे सेंसेक्स 315.88 अंक यानी 0.39% की गिरावट के साथ 80,407.06 अंक पर कारोबार कर रहा था. वहीं, एनएसई निफ्टी-50 इंडेक्स 143.15 अंक यानी 0.58% टूटकर 24,682.30 पर आ गया.
किन शेयरों में तेजी, किनमें गिरावट
गिरावट भरे बाजार के बावजूद कुछ बड़े शेयरों ने मजबूती दिखाई
सेंसेक्स के शेयरों में लार्सन एंड टुब्रो, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, इंटरग्लोब एविएशन, रिलायंस इंडस्ट्रीज और पावर ग्रिड में 1 से 2 फीसदी तक की तेजी दर्ज की गई. हिंदुस्तान कॉपर के शेयरों में 6.5% की जोरदार उछाल देखने को मिली, जबकि पिछले दो सत्रों में इसमें करीब 21% की गिरावट आई थी. वहीं चांदी की कीमतों में कमजोरी के बावजूद हिंदुस्तान जिंक के शेयर लगभग 4% चढ़े. दूसरी ओर, MCX के शेयरों में 4% की गिरावट दर्ज की गई. यह शेयर पिछले तीन सत्रों में करीब 20% टूट चुका है.
सिगरेट कंपनियों पर एक्साइज ड्यूटी की मार
बजट के बाद सिगरेट कंपनियों के शेयरों पर खास दबाव देखा गया. 1 फरवरी से सिगरेट पर अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी लागू होने के चलते आईटीसी, गॉडफ्रे फिलिप्स और वीएसटी इंडस्ट्रीज के शेयरों में 5.5% तक की गिरावट आई. गॉडफ्रे फिलिप्स को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ और इसका शेयर 5.5% टूटकर 1,885 रुपये पर आ गया. वीएसटी इंडस्ट्रीज में 2.6% और आईटीसी में 2.2% की गिरावट दर्ज की गई.
क्यों आई बीच में रिकवरी?
विशेषज्ञों का मानना है कि बजट में किए गए ऐलानों के नफा-नुकसान को बाजार धीरे-धीरे समझने लगा है. खासकर सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी का असर आम और लॉन्ग-टर्म निवेशकों पर सीमित रहने की उम्मीद है, जबकि इसका ज्यादा असर एफएंडओ ट्रेडिंग और बार-बार लेनदेन करने वालों पर पड़ेगा. इसी समझ के साथ कुछ बड़ी कंपनियों के शेयरों में आई खरीदारी ने बाजार को अस्थायी सहारा दिया, हालांकि कुल मिलाकर निवेशकों का मूड अब भी सतर्क बना हुआ है.

