अधिकारी से नेता बनने की तैयारी! योगी समर्थक GST डिप्टी कमिश्नर ने 2022 में चुनाव लड़ने को मांगा था BJP टिकट
CM योगी के समर्थन में इस्तीफा देने वाले अयोध्या के GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह को लेकर नया खुलासा हुआ है. सामने आया है कि उन्होंने 2022 में विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए BJP से टिकट की दावेदारी की थी. अब उनके खिलाफ फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र की जांच चल रही है.

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में तैनात जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह को लेकर सामने आई जानकारी ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है. हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में इस्तीफा देकर सुर्खियों में आए इस अधिकारी की भूमिका अब सवालों के घेरे में है. एक तरफ जहां उन्होंने अपने इस्तीफे को आत्मसम्मान और वैचारिक असहमति से जोड़कर पेश किया, वहीं दूसरी ओर उनके खिलाफ फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी सेवा में आने के गंभीर आरोप सामने आए हैं. मामले को और पेचीदा बनाता है यह तथ्य कि वर्ष 2022 में वे भारतीय जनता पार्टी से विधानसभा टिकट पाने की कोशिश भी कर चुके थे. इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन, राजनीति और व्यक्तिगत टकराव की एक जटिल तस्वीर पेश की है, जिसकी सच्चाई अब जांच और मेडिकल रिपोर्ट पर निर्भर करेगी.
टिकट के लिए लगाए गए थे पोस्टर
सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रशांत कुमार सिंह ने मऊ जिले से भारतीय जनता पार्टी का टिकट पाने के लिए प्रयास किए थे. उस समय वे जीएसटी विभाग में असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर कार्यरत थे. स्थानीय स्तर पर उनके समर्थन में बैनर और पोस्टर भी लगाए गए थे, जिससे यह संकेत मिलता है कि वे सक्रिय रूप से राजनीतिक प्रवेश की तैयारी कर रहे थे. हालांकि पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया. टिकट न मिलने के बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवा जारी रखी और बाद में पदोन्नति के जरिए डिप्टी कमिश्नर बने. यह तथ्य अब इसलिए चर्चा में है क्योंकि उनके इस्तीफे और मौजूदा विवाद को उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से जोड़कर देखा जा रहा है.
फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र का आरोप, शिकायतकर्ता खुद सगा भाई
प्रशांत कुमार सिंह पर फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने का आरोप उनके बड़े भाई डॉ. विश्वजीत सिंह ने लगाया है. डॉ. विश्वजीत का कहना है कि प्रशांत ने आंख से जुड़ी एक बीमारी का हवाला देकर दिव्यांग कोटे का लाभ लिया, जबकि ऐसी बीमारी कम उम्र में संभव नहीं होती. उन्होंने इस संबंध में वर्ष 2021 में ही शिकायत दर्ज कराई थी और दिव्यांग प्रमाण पत्र की दोबारा जांच की मांग की थी. आरोप है कि मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होने के लिए बुलाए जाने के बावजूद प्रशांत कुमार सिंह दो बार अनुपस्थित रहे. इस मामले में अब स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी है.
इस्तीफा या रणनीति? जांच से बचने का आरोप
डॉ. विश्वजीत सिंह ने यह भी दावा किया है कि प्रशांत कुमार सिंह का इस्तीफा महज भावनात्मक फैसला नहीं बल्कि एक सोची-समझी रणनीति हो सकता है. उनका आरोप है कि इस्तीफे के जरिए वे संभावित जांच, कार्रवाई और रिकवरी से बचने की कोशिश कर रहे हैं. एक पत्र भी सामने आया है, जिसमें मुख्य चिकित्सा अधिकारी से दिव्यांग प्रमाण पत्र की पुनः जांच कराने की बात कही गई थी. इस घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक स्तर पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या इस्तीफे के पीछे सिर्फ वैचारिक कारण थे या इसके पीछे कानूनी दबाव भी भूमिका निभा रहा था.
मुख्यमंत्री के समर्थन में दिया गया था इस्तीफा
इस्तीफे के समय प्रशांत कुमार सिंह ने सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पक्ष में बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री के खिलाफ की गई टिप्पणी से वे आहत हैं और इसे स्वीकार नहीं कर सकते. उन्होंने अपने पत्र में लिखा था कि लोकतंत्र में विरोध के तरीके तय हैं, लेकिन सार्वजनिक मंच से अपमानजनक भाषा समाज को विभाजित करती है. उन्होंने यह भी कहा था कि जिस सरकार के वेतन से उनका परिवार चलता है, उसी सरकार के मुखिया का अपमान उन्हें मंजूर नहीं. इसी बयान के बाद उनका इस्तीफा राजनीतिक बहस का विषय बन गया था.
पोस्टिंग और निजी जीवन से जुड़ी बातें
48 वर्षीय प्रशांत कुमार सिंह मूल रूप से मऊ जिले के निवासी हैं. उनकी पहली तैनाती सहारनपुर में हुई थी, इसके बाद वे कानपुर में भी तैनात रहे. 21 अक्टूबर 2023 को उनकी पोस्टिंग अयोध्या में हुई. इस्तीफे के बाद एक फोन कॉल का जिक्र भी सामने आया, जिसमें उन्होंने अपनी पत्नी से भावुक बातचीत करते हुए मानसिक तनाव की बात कही थी. उन्होंने कहा था कि वे कई दिनों से सो नहीं पाए हैं और आत्मसम्मान से समझौता नहीं कर सकते. साथ ही यह भी कहा कि इस्तीफा स्वीकार होने तक वे अपने कर्तव्यों का पालन करते रहेंगे.

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