सदन की गरिमा, सामाजिक न्याय और विकास का रोडमैप… राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संसद में संबोधन
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि बीते एक दशक में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए और 95 करोड़ नागरिक सामाजिक सुरक्षा से जुड़े.

संसद के बजट सत्र 2026–27 की शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संबोधन के साथ हुई. लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने सरकार की उपलब्धियों, प्राथमिकताओं और भविष्य की दिशा को सामने रखा. विपक्ष के शोर-शराबे के बीच दिए गए इस अभिभाषण में सामाजिक न्याय, अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा, अंतरिक्ष क्षेत्र, पूर्वी भारत के विकास और रोजगार जैसे अहम मुद्दे छाए रहे. राष्ट्रपति ने संसद की गरिमा बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए सभी सांसदों को सदन चलाने में सहयोग करना होगा, जिस पर सत्ता पक्ष की ओर से तालियां गूंजी. उन्होंने कहा कि सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ के विजन के साथ आगे बढ़ रही है और बीते एक दशक में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में सफलता मिली है. यह संबोधन आगामी बजट और नीति चर्चाओं की दिशा तय करता नजर आया.
संसद की गरिमा और सहयोग की अपील
अपने भाषण की शुरुआत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद को लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच बताते हुए सभी सांसदों से सहयोग की अपील की. उन्होंने कहा कि संसद में स्वस्थ चर्चा और संवाद से ही जनता की अपेक्षाओं को पूरा किया जा सकता है. राष्ट्रपति का यह संदेश ऐसे समय आया है, जब लगातार हंगामे और व्यवधान संसद की कार्यवाही पर सवाल खड़े करते रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि मतभेद लोकतंत्र की ताकत हैं, लेकिन टकराव से समाधान नहीं निकलता. सरकार और विपक्ष—दोनों की जिम्मेदारी है कि संसद को सुचारु रूप से चलने दें, ताकि देशहित से जुड़े मुद्दों पर ठोस फैसले लिए जा सकें.
सामाजिक न्याय और गरीबी उन्मूलन पर जोर
राष्ट्रपति ने कहा कि केंद्र सरकार सच्चे सामाजिक न्याय के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने बताया कि पिछले 10 वर्षों में करीब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं, जो सरकार की नीतियों का परिणाम है. उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि 2014 तक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ सीमित लोगों तक था, लेकिन आज लगभग 95 करोड़ नागरिक किसी न किसी सामाजिक सुरक्षा योजना से जुड़े हैं. राष्ट्रपति के अनुसार, सरकार का तीसरा कार्यकाल गरीबों, वंचितों और कमजोर वर्गों को और अधिक सशक्त बनाने पर केंद्रित है.
दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्गों के लिए योजनाएं
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार दलितों, पिछड़े वर्गों और आदिवासी समुदायों के लिए संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है. शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और रोजगार से जुड़ी योजनाओं का लाभ इन वर्गों तक पहुंचाया जा रहा है. उन्होंने बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती और अन्य महान व्यक्तित्वों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश अपने पूर्वजों के योगदान को याद कर रहा है, जिससे नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है और सामाजिक समरसता मजबूत होती है.
अर्थव्यवस्था, सुधार और रोजगार पर फोकस
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है और बुनियादी ढांचे पर बड़ा निवेश किया गया है. उन्होंने वंदे भारत ट्रेनों, नए सुधारों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों का जिक्र किया. उनके अनुसार, यूरोपीय संघ के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौता सेवा और विनिर्माण क्षेत्रों को गति देगा, जिससे युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर पैदा होंगे. सरकार भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नियमों और कानूनों में सुधार कर रही है.
अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की नई उड़ान
राष्ट्रपति मुर्मू ने अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों को ऐतिहासिक बताया. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक भारतीय अंतरिक्ष यात्री की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह देश के लिए गर्व का क्षण है. उन्होंने बताया कि भारत अपना खुद का स्पेस स्टेशन बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और गगनयान मिशन पर तेजी से काम हो रहा है. आने वाले समय में अंतरिक्ष पर्यटन भी भारतीयों के लिए एक नई संभावना बन सकता है.
राष्ट्रीय सुरक्षा और ऑपरेशन सिंदूर
राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय सुरक्षा का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार आतंकवाद के खिलाफ सख्त नीति अपना रही है. उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अभियान ने दुनिया को भारत की निर्णायक क्षमता दिखाई है. इसके साथ ही माओवादी हिंसा पर नियंत्रण की बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह चुनौती अब सीमित जिलों तक सिमट गई है, जो सुरक्षा बलों की सफलता को दर्शाता है.
पूर्वी भारत के विकास को प्राथमिकता
राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार पूर्वी भारत के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है. बुनियादी ढांचे, उद्योग और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए कई योजनाएं लागू की जा रही हैं. उनके अनुसार, क्षेत्रीय असंतुलन को दूर किए बिना विकसित भारत का सपना पूरा नहीं हो सकता, इसलिए सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठा रही है.

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