नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा, जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और प्रिय भोग
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व है. जानें देवी को कौन-सा भोग चढ़ाएं, कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है और पूजा किस विधि से करनी चाहिए.

शारदीय नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जाती है. हिंदू धर्म में नवरात्रि को शक्ति की उपासना का विशेष पर्व माना गया है. इस दौरान भक्त नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की आराधना करते हैं. पहले दिन कलश स्थापना के साथ पूजा की शुरुआत होती है. मान्यता है कि विधि-विधान से मां शैलपुत्री की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना पूरी होती है. इस दिन देवी को सफेद फूल, अक्षत और सिंदूर अर्पित करने की परंपरा है. वहीं, गाय के घी का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है. नवरात्रि के पहले दिन पूजा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए कलश स्थापना का शुभ समय, पूजा की विधि और मां शैलपुत्री के प्रिय भोग की जानकारी महत्वपूर्ण होती है. आइए जानते हैं पहले दिन की पूजा से जुड़ी खास बातें.
कलश स्थापना से शुरू होती है नवरात्रि पूजा
नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना या कलश स्थापना की जाती है. इसे देवी शक्ति के आह्वान का प्रतीक माना जाता है. भक्त पूजा स्थल की सफाई कर शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित करते हैं और परिवार की खुशहाली, सुख-शांति व समृद्धि की प्रार्थना करते हैं.
जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
दिए गए पंचांग के अनुसार, कलश स्थापना के लिए दो शुभ समय बताए गए हैं.
• प्रातःकालीन मुहूर्त: सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक
• अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक
पूजा करने से पहले अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार मुहूर्त की पुष्टि जरूर कर लें.
मां शैलपुत्री को चढ़ाएं गाय के घी का भोग
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री को गाय के घी का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है. भक्त देवी को घी अर्पित कर अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. इसके अलावा पूजा में सफेद फूल, अक्षत और सिंदूर चढ़ाने की भी परंपरा है.
पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं मां शैलपुत्री
मां शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है. उनका वाहन वृषभ यानी बैल है. देवी के एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल का फूल होता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां शैलपुत्री देवी पार्वती का स्वरूप हैं. उनकी पूजा से भक्त शक्ति, धैर्य और दृढ़ संकल्प की प्रेरणा लेते हैं.
नवरात्रि के पहले दिन ऐसे करें पूजा
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल को साफ करें. इसके बाद शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करें. चौकी पर साफ वस्त्र बिछाकर मां शैलपुत्री की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें. देवी को फूल, अक्षत, सिंदूर और गाय के घी का भोग अर्पित करें. इसके बाद मां की आरती करें और परिवार की सुख-शांति व मंगलकामना के लिए प्रार्थना करें. श्रद्धा और भक्ति के साथ की गई पूजा को नवरात्रि के शुभ आरंभ का प्रतीक माना जाता है.


