BREAKING: सोरेन परिवार की सबसे वरिष्ठ कड़ी टूटी, CM हेमंत की मां रूपी सोरेन का निधन, राजनीतिक जगत में शोक की लहर
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां और दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन का रांची के निजी अस्पताल में निधन हो गया. लंबे समय से बीमार चल रहीं रूपी सोरेन ने सोरेन परिवार की कई दशकों की संघर्ष यात्रा को करीब से देखा और परिवार को मजबूती से संभाला.

Ranchi: झारखंड की राजनीति के सबसे बड़े और प्रभावशाली परिवारों में शामिल सोरेन परिवार पर एक और बड़ा दुख टूट पड़ा. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां और दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन का रांची के निजी अस्पताल में निधन हो गया. वह लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रही थीं और हाल के दिनों में इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती थीं. रूपी सोरेन के निधन के साथ ही सोरेन परिवार ने महज एक साल के भीतर अपने परिवार के दो बेहद महत्वपूर्ण सदस्यों को खो दिया. अगस्त 2025 में उनके पति और झारखंड आंदोलन के बड़े चेहरे शिबू सोरेन का निधन हुआ था. अब रूपी सोरेन के जाने से परिवार की वह पीढ़ी, जिसने संघर्ष के दिनों में पूरे परिवार को संभाला, पीछे छूट गई है. हेमंत सोरेन, कल्पना सोरेन और परिवार के दूसरे सदस्यों के लिए यह निजी क्षति बेहद गहरी है.
संघर्ष में परिवार को संभाला
रूपी सोरेन का सार्वजनिक जीवन उनके पति शिबू सोरेन की तरह राजनीतिक मंचों पर नहीं रहा, लेकिन सोरेन परिवार की कहानी में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही. उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, शिबू सोरेन के राजनीतिक और सामाजिक संघर्ष के दौरान उन्होंने परिवार की जिम्मेदारी संभाली और बच्चों की परवरिश की. खासकर उन दौर में जब शिबू सोरेन लंबे समय तक राजनीतिक गतिविधियों और आंदोलन में सक्रिय रहे, परिवार के भीतर की जिम्मेदारियां रूपी सोरेन ने संभालीं. हेमंत सोरेन के बचपन और शुरुआती जीवन से जुड़ी रिपोर्टों में भी रूपी सोरेन का उल्लेख उस मां के तौर पर मिलता है, जिसने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और परिवार को संभालने में बड़ी भूमिका निभाई. एक रिपोर्ट के मुताबिक, शिबू सोरेन की अनुपस्थिति के दौर में रूपी सोरेन ने दुर्गा, हेमंत और बसंत सोरेन की देखभाल और पढ़ाई पर ध्यान दिया.
1962 में शिबू सोरेन से विवाह
रूपी सोरेन का मूल नाम रूपी किस्कू बताया जाता है. शिबू सोरेन से उनका विवाह 1 जनवरी 1962 को हुआ था. उपलब्ध जीवनी संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, वह जमशेदपुर के चांडिल क्षेत्र से थीं. विवाह के बाद वह सोरेन परिवार का हिस्सा बनीं और दशकों तक परिवार की जिम्मेदारियां संभालती रहीं. शिबू और रूपी सोरेन के परिवार में तीन बेटे और एक बेटी हुए. सबसे बड़े बेटे दुर्गा सोरेन, उसके बाद बेटी अंजलि सोरेन, हेमंत सोरेन और सबसे छोटे बेटे बसंत सोरेन. परिवार के कई सदस्य आगे चलकर राजनीति से जुड़े. हेमंत सोरेन आज झारखंड के मुख्यमंत्री हैं, जबकि बसंत सोरेन भी सक्रिय राजनीति में हैं.
बेटे हेमंत की राजनीतिक यात्रा
रूपी सोरेन की जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा उनके बच्चों की राजनीतिक यात्रा के साथ जुड़ा रहा. हेमंत सोरेन का जन्म 10 अगस्त 1975 को रामगढ़ के नेमरा गांव में हुआ था. बचपन से ही उनका परिवार झारखंड आंदोलन और आदिवासी अधिकारों की राजनीति के बीच रहा. हेमंत ने शुरुआती शिक्षा के बाद इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए रांची के बीआईटी मेसरा में दाखिला लिया था. बाद में उन्होंने पढ़ाई छोड़कर राजनीति की राह पकड़ी. हेमंत की राजनीतिक यात्रा आगे बढ़ती गई और वह झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रमुख नेताओं में शामिल हुए. आज वह राज्य के मुख्यमंत्री हैं. रूपी सोरेन के लिए बेटे की यह राजनीतिक यात्रा सिर्फ सत्ता तक पहुंचने की कहानी नहीं थी. यह उस परिवार की कहानी भी थी, जिसने दशकों तक झारखंड के अलग राज्य और आदिवासी अधिकारों की राजनीति के बीच अपना जीवन गुजारा.
पति शिबू सोरेन को खोया
रूपी सोरेन के जीवन का सबसे बड़ा निजी आघात कुछ ही समय पहले आया था. 4 अगस्त 2025 को उनके पति शिबू सोरेन का दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में निधन हुआ था. लंबी बीमारी के बाद 81 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली थी. शिबू सोरेन के निधन के बाद भी रूपी सोरेन परिवार के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा बनी रहीं. जून 2026 में जब शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण दिया गया, तो उनकी पत्नी रूपी सोरेन ने राष्ट्रपति भवन में जाकर यह सम्मान ग्रहण किया था. उस समय उनकी तबीयत ठीक नहीं होने के बावजूद उन्होंने यह सम्मान स्वीकार किया था. यह दृश्य इसलिए भी भावुक था क्योंकि सम्मान उस व्यक्ति के लिए था, जिसके साथ उन्होंने जीवन के छह दशक से ज्यादा का सफर तय किया था.
परिवार के लिए लगातार कठिन दौर
सोरेन परिवार ने पिछले डेढ़ दशक में कई निजी क्षतियां झेली हैं. सबसे बड़े बेटे दुर्गा सोरेन का 2009 में निधन हो गया था. उनके निधन के बाद उनकी पत्नी सीता सोरेन और तीन बेटियां परिवार का हिस्सा रहीं. इसके बाद अगस्त 2025 में शिबू सोरेन का निधन हुआ. और अब रूपी सोरेन के निधन की खबर परिवार के लिए एक और बड़ा सदमा होगी. एक ऐसा परिवार, जिसने झारखंड की राजनीति को दशकों तक प्रभावित किया, उसके भीतर की यह कहानी सत्ता और राजनीति से अलग एक मां, पत्नी और परिवार की कहानी भी है.
अस्पताल से घर तक पसरा सन्नाटा
रूपी सोरेन की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें रांची के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. 18 सितंबर की रिपोर्टों में सांस लेने में परेशानी और छाती में संक्रमण की जानकारी दी गई थी. चिकित्सकों ने उस समय उनकी स्थिति नियंत्रित बताई थी. इसके बाद अस्पताल में उनसे मिलने के लिए राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र के लोग पहुंचे. रूपी सोरेन का जीवन किसी राजनीतिक पद या सार्वजनिक भाषणों की वजह से नहीं, बल्कि उस परिवार की मजबूत कड़ी के रूप में याद किया जाएगा, जिसने झारखंड की राजनीति के सबसे लंबे दौर को करीब से देखा. पति शिबू सोरेन के संघर्ष से लेकर बेटे हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्री बनने तक, उन्होंने परिवार को भीतर से संभाले रखा. उनके जाने के साथ सोरेन परिवार की एक ऐसी पीढ़ी विदा होगी, जिसकी कहानी झारखंड के राजनीतिक इतिहास से अलग नहीं की जा सकती.

