झारखंड सचिवालय सेवा संघ नाराज: संवर्ग समीक्षा समिति पर पक्षपात और पारदर्शिता की कमी का आरोप
झारखंड सचिवालय सेवा की संवर्ग समीक्षा समिति की दूसरी बैठक 20 मई 2026 को हुई, लेकिन बैठक खत्म होने के बाद सचिवालय सेवा संघ ने समिति की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

झारखंड सचिवालय सेवा की संवर्ग समीक्षा समिति की दूसरी बैठक 20 मई 2026 को हुई, लेकिन बैठक खत्म होने के बाद सचिवालय सेवा संघ ने समिति की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. संघ ने आरोप लगाया है कि समिति निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रही और कर्मचारियों के पक्ष को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा.
अन्य राज्यों से तुलना के प्रस्ताव पर संघ ने जताई आपत्ति
बैठक के दौरान कार्मिक सचिव की ओर से विभिन्न राज्यों में सचिवालय सेवाओं के पदों और संरचना की जानकारी जुटाने का प्रस्ताव रखा गया. इस पर सचिवालय सेवा संघ के अध्यक्ष ने कड़ी आपत्ति दर्ज की. संघ का कहना है कि राज्यकर्मियों को केंद्र सरकार के अनुरूप सेवा शर्तें और संरचना देने को लेकर पहले ही सहमति बनी थी. ऐसे में अन्य राज्यों के आधार पर तुलना करना उचित नहीं है. संघ ने आरोप लगाया कि यह कदम केवल मामले को लंबा खींचने और निर्णय टालने की कोशिश है.
लिखित पक्ष सौंपने के बावजूद नहीं दिखाई गई गंभीरता
संघ ने बताया कि उसने समिति के सामने अपना लिखित पक्ष भी रखा, लेकिन समिति अध्यक्ष और सदस्यों की ओर से इस मुद्दे पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई. संघ का दावा है कि उनकी मांगों और आपत्तियों पर पर्याप्त चर्चा नहीं हुई.
समिति की कार्यशैली पर उठे सवाल, ‘पहले फैसला फिर सूचना’ का आरोप
सचिवालय सेवा संघ ने समिति की बैठक प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं. संघ के अनुसार समिति के कुछ सदस्य अध्यक्ष के साथ अलग बैठक कर पहले निर्णय लेते हैं और बाद में सचिवालय सेवा के प्रतिनिधियों को बुलाकर केवल फैसलों की जानकारी दे दी जाती है. संघ का आरोप है कि प्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर नहीं दिया जा रहा, जिससे समिति की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
महासचिव की जगह प्रतिनिधि को अनुमति नहीं, संघ ने बताया एकतरफा रवैया
बैठक में समिति सदस्य के रूप में नामित राजस्व विभाग के सचिव की जगह दूसरे पदाधिकारी को शामिल होने की अनुमति दी गई. वहीं सचिवालय सेवा संघ के महासचिव अस्पताल में भर्ती होने के कारण मौजूद नहीं हो सके, लेकिन उनके स्थान पर किसी अन्य प्रतिनिधि को शामिल होने की अनुमति नहीं मिली. संघ ने इसे समिति के एकपक्षीय रवैये का उदाहरण बताते हुए आपत्ति जताई है.
विरोध तेज करने का संकेत
सचिवालय सेवा संघ का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में समिति से निष्पक्ष और न्यायसंगत निर्णय की उम्मीद करना मुश्किल है. संघ ने चेतावनी दी है कि यदि समिति की कार्यप्रणाली में जल्द सुधार नहीं हुआ तो वह समिति के विरोध और बैठकों में भागीदारी को लेकर अपने रुख पर पुनर्विचार कर सकता है.

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