Petrol-Diesel और LPG Price Hike: महंगाई की नई मार से मिडिल क्लास परेशान !
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का असर अब भारत पर भी साफ दिखाई देने लगा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच चुका है, जिससे भारतीय तेल कंपनियों पर भारी दबाव बन गया है.

Petrol-Diesel Price: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का असर अब भारत पर भी साफ दिखाई देने लगा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच चुका है, जिससे भारतीय तेल कंपनियों पर भारी दबाव बन गया है. लंबे समय से देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि कच्चा तेल लगातार महंगा होता जा रहा है. ऐसे में सरकारी तेल कंपनियों को रोजाना करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है. अब माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है. इसका सीधा असर आम आदमी की जेब और मिडिल क्लास के मासिक बजट पर पड़ेगा. बढ़ती महंगाई के बीच ईंधन के दामों में संभावित वृद्धि ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है.
कब और कितनी बढ़ सकती हैं कीमतें?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 15 मई के बाद देश में पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में इजाफा देखने को मिल सकता है. अनुमान लगाया जा रहा है कि पेट्रोल और डीजल के दाम में 4 से 5 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हो सकती है, जबकि घरेलू एलपीजी सिलेंडर 40 से 50 रुपये तक महंगा हो सकता है. हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार एकमुश्त बड़ा झटका देने के बजाय कीमतों को धीरे-धीरे बढ़ा सकती है. यानी पेट्रोल-डीजल के दाम 2 से 4 रुपये की किश्तों में बढ़ाए जा सकते हैं ताकि महंगाई का असर थोड़ा नियंत्रित रखा जा सके. दरअसल भारत अपनी जरूरत का करीब 88 प्रतिशत कच्चा तेल और 60 प्रतिशत एलपीजी विदेशों से आयात करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल आयात की लागत तेजी से बढ़ी है, जिससे तेल कंपनियों के लिए पुराने दामों पर ईंधन बेचना मुश्किल हो रहा है.
आम आदमी और मिडिल क्लास पर क्या होगा असर?
ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था पर दिखाई देता है. पेट्रोल और डीजल महंगे होने से सबसे पहले माल ढुलाई की लागत बढ़ती है, जिसका असर फल, सब्जियां, दूध, राशन और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों पर पड़ता है. इसके अलावा कैब, ऑटो और बस किराया भी बढ़ सकता है, जिससे रोजाना यात्रा करने वाले लोगों का खर्च बढ़ जाएगा. हवाई यात्रा भी महंगी हो सकती है क्योंकि एविएशन फ्यूल की कीमतों पर भी असर पड़ता है. वहीं एलपीजी सिलेंडर महंगा होने से घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, खासकर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों से ईंधन की बचत करने, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाने और जरूरत पड़ने पर वर्क-फ्रॉम-होम अपनाने की अपील की थी. आने वाले समय में अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं तो महंगाई का दबाव और ज्यादा बढ़ सकता है.

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