Stock Market Crash: मिनटों में डूबे ₹7.5 लाख करोड़, सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट से मचा हड़कंप
“शेयर बाजार में गुरुवार को अचानक आई भारी गिरावट ने निवेशकों के बीच हड़कंप मचा दिया. बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों में तेज गिरावट देखने को मिली, जिससे कुछ ही मिनटों में निवेशकों की करीब 7.5 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति साफ हो गई. ”

Share Market: शेयर बाजार में गुरुवार को अचानक आई भारी गिरावट ने निवेशकों के बीच हड़कंप मचा दिया. बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों में तेज गिरावट देखने को मिली, जिससे कुछ ही मिनटों में निवेशकों की करीब 7.5 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति साफ हो गई. बुधवार को जहां बाजार मजबूत बढ़त के साथ बंद हुआ था, वहीं अगले ही दिन यह तेजी पूरी तरह गायब हो गई. बीएसई के लार्जकैप से लेकर मिडकैप शेयरों तक हर सेक्टर में बिकवाली हावी रही और बाजार लाल निशान में डूब गया. इस गिरावट के पीछे वैश्विक कारण प्रमुख माने जा रहे हैं, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की अस्थिरता आगे भी बनी रह सकती है.
सेंसेक्स-निफ्टी में तेज गिरावट
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स बुधवार को 609 अंकों की तेजी के साथ 77,496 पर बंद हुआ था, लेकिन गुरुवार को यह 77,014 पर कमजोर शुरुआत के साथ खुला. ओपनिंग के कुछ ही मिनटों में सेंसेक्स 1,238 अंक गिरकर 76,258 के स्तर पर पहुंच गया. वहीं एनएसई निफ्टी भी 24,177 से गिरकर 23,996 पर खुला और जल्द ही 381 अंक टूटकर 23,796 तक पहुंच गया. बाजार में शुरुआत से ही बिकवाली का दबाव देखने को मिला, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा और लगभग सभी सेक्टर नुकसान में नजर आए.
निवेशकों को भारी नुकसान
इस भारी गिरावट का सबसे बड़ा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा. बुधवार को बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप 4.69 लाख करोड़ रुपये था, जो गुरुवार को शुरुआती कारोबार में घटकर 4.61 लाख करोड़ रुपये रह गया. इसका मतलब है कि महज कुछ मिनटों में ही निवेशकों को 7.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ. बाजार में आई इस तेज गिरावट ने छोटे और बड़े दोनों तरह के निवेशकों को प्रभावित किया है. खासकर रिटेल निवेशकों के बीच घबराहट का माहौल देखने को मिला, जिससे बिकवाली और बढ़ गई.
गिरावट के पीछे वैश्विक कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण वैश्विक तनाव है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तनातनी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दिए गए बयानों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है. इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 121 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है, जिसका असर वैश्विक और भारतीय शेयर बाजारों पर साफ देखने को मिल रहा है.

