Video: झारखंड में पेट्रोल-डीजल संकट: रांची में कई पंपों में 'नो स्टॉक', कोल्हान में 40% पंप बंद, डीजल खत्म!
झारखंड में पेट्रोल-डीजल का भयंकर संकट! रांची में आधे से ज्यादा पंप सूखे, जमशेदपुर में 40% पंप बंद, डीजल नदारद. बाइक को 200 रुपये और कार को 500 रुपये तक पेट्रोल मिल रहा है. जनता घंटों कतार में खड़ी है. पढ़ें पूरी खबर.

Ranchi: देशभर में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति को लेकर अफवाहों और स्थानीय स्तर पर कमी के कारण हड़कंप मचा हुआ है. झारखंड में यह संकट सबसे ज्यादा गंभीर रूप ले चुका है. रांची, जमशेदपुर समेत कई जिलों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग रही हैं, डीजल लगभग खत्म हो चुका है और कई पंप पूरी तरह बंद हो गए हैं. तेल कंपनियों की कम सप्लाई, पैनिक बाइंग और कैश पेमेंट सिस्टम ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है. आम उपभोक्ता घंटों लाइन में खड़े होकर भी सीमित मात्रा में ईंधन पा रहे हैं. बाइक वालों को 200 रुपये और कार वालों को 500 रुपये तक का पेट्रोल ही दिया जा रहा है. ट्रक चालक, दैनिक यात्री और व्यवसायी सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. यह संकट न सिर्फ रोजमर्रा की जिंदगी बाधित कर रहा है बल्कि परिवहन, स्वास्थ्य सेवाओं और अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल रहा है.
रांची: आधे से ज्यादा पंप सूखे, भारी भीड़ और राशनिंग
राजधानी रांची में पेट्रोल-डीजल का संकट गहरा गया है. आधे से अधिक पेट्रोल पंपों पर सप्लाई ठप है. नामकुम, कोकर, अरगोड़ा, कांटाटोली और दलादली जैसे इलाकों में लंबी कतारें लगी हुई हैं. कई पंपों पर "नो स्टॉक" बोर्ड लगा है. डीजल गाड़ियों को ज्यादातर पंपों से लौटाया जा रहा है. उपलब्ध पंपों पर बाइक को 200 रुपये और कार को 500 रुपये तक सीमित पेट्रोल दिया जा रहा है. लोग गैलन में तेल जमा कर रहे हैं. ट्रक चालक हाईवे पर फंस रहे हैं. डिपो से नियमित सप्लाई न मिलने से स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ रही है.
जमशेदपुर (कोल्हान): 40% पंप बंद, पैनिक बाइंग चरम पर
जमशेदपुर और कोल्हान क्षेत्र में संकट सबसे विकट है. लगभग 40% पेट्रोल पंप सूख चुके हैं. सकची, पारसुडीह, करंडीह जैसे इलाकों में कई पंप बंद हो गए हैं. ग्रामीण क्षेत्रों जैसे पोटका, हाता में तो छोटे पंप ₹100 प्रति कस्टमर तक सीमित कर रहे हैं. शहर में 35 पंपों पर रोजाना 2.3 लाख लीटर पेट्रोल और 2.8 लाख लीटर डीजल की मांग है, लेकिन सप्लाई कम होने से पैनिक बाइंग शुरू हो गई. ऑपरेटर्स ने डीजल 200 लीटर और पेट्रोल 50 लीटर प्रति ट्रांजेक्शन कैप लगा दिया है. NH-33 पर भी पंप सूखे पड़े हैं.
धनबाद और बोकारो: औद्योगिक क्षेत्रों में परेशानी
धनबाद और बोकारो जैसे औद्योगिक शहरों में भी ईंधन की कमी महसूस की जा रही है. लंबी दूरी के वाहन चालक और फैक्ट्री ट्रांसपोर्ट प्रभावित हैं. कुछ पंपों पर कतारें लगी हैं जबकि कई जगह सीमित स्टॉक उपलब्ध है. LPG संकट के साथ मिलकर यह औद्योगिक गतिविधियों को प्रभावित कर रहा है.
चतरा, लातेहार और अन्य जिले: ग्रामीण इलाकों में हाहाकार
चतरा में दर्जनों पंपों पर "नो स्टॉक" बोर्ड लगे हैं. केवल दो-तीन पंपों पर सीमित मात्रा उपलब्ध है. लातेहार में एक दिन में तीनों मुख्य पंपों का स्टॉक खत्म हो गया. जामताड़ा में दो प्रमुख पंपों पर साधारण पेट्रोल खत्म. गिरिडीह, लातेहार और अन्य ग्रामीण जिलों में हाईवे पंप बंद पड़े हैं. ट्रक चालक और आम लोग घंटों इंतजार कर रहे हैं. स्वास्थ्य सेवाएं और जरूरी सामान की सप्लाई प्रभावित हो रही है.
उपभोक्ताओं की समस्याएं और प्रभाव
• लंबी कतारें और इंतजार: लोग घंटों लाइन में खड़े रह रहे हैं.
• राशनिंग: सीमित मात्रा (200/500 रुपये) मिल रही है, डीजल लगभग बंद.
• ट्रांसपोर्ट बाधित: ट्रक, बस और टैक्सी सेवाएं प्रभावित, माल ढुलाई महंगी.
• दैनिक जीवन: काम, स्कूल, अस्पताल पहुंचना मुश्किल. ग्रामीण इलाकों में सबसे ज्यादा परेशानी.
• पैनिक और होर्डिंग: गैलन में स्टोरेज बढ़ा, ब्लैक मार्केटिंग की आशंका.
तेल कंपनियां (IOC, BPCL, HPCL) कम सप्लाई और कैश पेमेंट का हवाला दे रही हैं. चैंबर ऑफ कॉमर्स ने मामले को उठाया है. सरकार और कंपनियों को जल्द सामान्य सप्लाई बहाल करनी चाहिए, वरना अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा. उपभोक्ताओं से अपील है कि पैनिक बाइंग से बचें.

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