पेट्रोल-डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी के संकेत, अगले 3-4 महीनों में और महंगा हो सकता है ईंधन
देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में शुक्रवार को 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद अब आम लोगों की चिंता और बढ़ गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ शुरुआत हो सकती है और आने वाले महीनों में ईंधन की कीमतों में और इजाफा देखने को मिल सकता है.

देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में शुक्रवार को 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद अब आम लोगों की चिंता और बढ़ गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ शुरुआत हो सकती है और आने वाले महीनों में ईंधन की कीमतों में और इजाफा देखने को मिल सकता है. पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचाई पर बनी हुई हैं. ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुकी है, जिसका सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ रहा है. भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में किसी भी उथल-पुथल का असर घरेलू ईंधन कीमतों पर तुरंत दिखाई देता है. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहीं, तो आम जनता को आने वाले समय में और महंगे पेट्रोल-डीजल का सामना करना पड़ सकता है.
करीब चार साल बाद 15 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है. तेल विपणन कंपनियों (OMC) पर लगातार बढ़ती लागत का दबाव था, जिसके चलते यह फैसला लिया गया. माना जा रहा है कि लंबे समय से कंपनियां घाटे में ईंधन बेच रही थीं और अब कीमतों में संशोधन कर उन्हें राहत देने की कोशिश की गई है. यदि ब्रेंट क्रूड की कीमत 90-100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती है, तो अगले तीन से चार महीनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है. तेल कंपनियां लगातार बढ़ती लागत को झेलते हुए अपनी सीमा तक पहुंच चुकी थीं.
हालिया 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से सरकारी तेल कंपनियों को केवल आंशिक राहत मिलेगी. उनके मुताबिक, ईंधन की कीमतों में प्रति लीटर 1 रुपये की बढ़ोतरी से सरकारी तेल कंपनियों के सालाना EBITDA में करीब 15,000 से 16,000 करोड़ रुपये का सुधार हो सकता है. विशेषज्ञों का अनुमान है कि मौजूदा घाटे की पूरी भरपाई के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल मिलाकर करीब 10 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है. यदि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं, तो आने वाले समय में और मूल्य वृद्धि से इनकार नहीं किया जा सकता.
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और तेल आपूर्ति में रुकावट की आशंकाओं ने वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ा दी है. इसका असर सिर्फ तेल कंपनियों के मुनाफे पर ही नहीं, बल्कि आम लोगों की जेब पर भी पड़ने वाला है. ईंधन महंगा होने से परिवहन और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ेगी, जिसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है. अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यदि ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होती रही, तो इससे महंगाई दर पर दबाव बढ़ेगा और घरेलू बजट प्रभावित होगा. हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि सरकार यदि टैक्स में राहत या अन्य हस्तक्षेप करती है, तो भविष्य में कीमतों में बढ़ोतरी को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. इनपुट : आज तक
Disclaimer: यह लेख विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों की राय के आधार पर तैयार किया गया है. पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दाम, सरकारी नीतियों और बाजार परिस्थितियों पर निर्भर करता है. भविष्य में कीमतों को लेकर दिए गए अनुमान संभावित परिस्थितियों पर आधारित हैं, इनमें समय के साथ बदलाव हो सकता है. वेबसाइट किसी भी आर्थिक निर्णय के लिए जिम्मेदार नहीं होगी.

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