दमयंती सेन की वापसी: पार्क स्ट्रीट केस की सुपरकॉप को शुभेंदु सरकार में मिली बड़ी जिम्मेदारी
“पश्चिम बंगाल की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में एक बार फिर वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी दमयंती सेन चर्चा में हैं. साल 2012 के चर्चित पार्क स्ट्रीट गैंगरेप केस की निष्पक्ष जांच कर सुर्खियों में आईं दमयंती सेन को अब शुभेंदु अधिकारी सरकार ने बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है. ”

West bengal: पश्चिम बंगाल की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में एक बार फिर वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी दमयंती सेन चर्चा में हैं. साल 2012 के चर्चित पार्क स्ट्रीट गैंगरेप केस की निष्पक्ष जांच कर सुर्खियों में आईं दमयंती सेन को अब शुभेंदु अधिकारी सरकार ने बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है. महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ अपराधों की जांच के लिए गठित विशेष आयोग में उन्हें सदस्य-सचिव बनाया गया है. यह आयोग टीएमसी शासनकाल के दौरान महिलाओं, बच्चों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक समुदायों पर हुए कथित अत्याचारों की जांच करेगा. दमयंती सेन वही अधिकारी हैं, जिन्होंने ममता बनर्जी सरकार के दावों के विपरीत जाकर पार्क स्ट्रीट रेप केस की सच्चाई सामने लाई थी. इसके बाद उनका तबादला कर दिया गया और लंबे समय तक उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से दूर रखा गया. अब उनकी वापसी को पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा संकेत माना जा रहा है.
शुभेंदु अधिकारी सरकार ने क्यों बनाई विशेष जांच कमेटी?
पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी सरकार ने पिछली टीएमसी सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए कथित संस्थागत भ्रष्टाचार, महिलाओं और बच्चियों के उत्पीड़न तथा चुनावी हिंसा की जांच के लिए विशेष समितियों का गठन किया है. इन समितियों का उद्देश्य राज्य में बीते 15 वर्षों के दौरान सामने आए गंभीर मामलों की निष्पक्ष जांच करना बताया जा रहा है. महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों की जांच के लिए बनाई गई कमेटी की अध्यक्षता रिटायर्ड जज समाप्ति चटर्जी करेंगी, जबकि वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी दमयंती सेन को इसका सदस्य-सचिव नियुक्त किया गया है. यह आयोग खास तौर पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हुए अपराधों की जांच करेगा.
इसके अलावा संस्थागत भ्रष्टाचार की जांच के लिए गठित समिति की कमान कलकत्ता हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज न्यायमूर्ति विश्वजीत बसु को सौंपी गई है. सरकार के मुताबिक, दोनों समितियां 1 जून से अपना काम शुरू करेंगी. राजनीतिक हलकों में इन समितियों को लेकर चर्चाएं तेज हैं और इसे टीएमसी शासनकाल की कार्यप्रणाली की जांच के तौर पर देखा जा रहा है.
कौन हैं IPS अधिकारी दमयंती सेन?
1996 बैच की आईपीएस अधिकारी दमयंती सेन पश्चिम बंगाल पुलिस की सबसे चर्चित महिला अधिकारियों में गिनी जाती हैं. वह कोलकाता पुलिस की पहली महिला ज्वाइंट कमिश्नर (क्राइम) रह चुकी हैं. दमयंती सेन साल 2012 में उस वक्त सुर्खियों में आई थीं, जब उन्होंने चर्चित पार्क स्ट्रीट गैंगरेप केस की जांच का नेतृत्व किया था. 6 फरवरी 2012 को कोलकाता के पार्क स्ट्रीट इलाके में एक महिला के साथ चलती कार में गैंगरेप हुआ था. उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस घटना को सरकार को बदनाम करने की साजिश और “मनगढ़ंत कहानी” बताया था. हालांकि दमयंती सेन की अगुवाई में पुलिस टीम ने तेजी से जांच करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और साबित कर दिया कि घटना वास्तविक थी.
जांच पूरी होने के तुरंत बाद दमयंती सेन का तबादला लालबाजार क्राइम ब्रांच से बैरकपुर पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज कर दिया गया. सरकार ने इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताया, लेकिन विपक्ष और आलोचकों ने इसे सच सामने लाने की सजा करार दिया. इसके बाद लंबे समय तक उन्हें किसी बड़े पद पर जिम्मेदारी नहीं दी गई.
हाईकोर्ट का भरोसा और दमयंती सेन की वापसी
दमयंती सेन की ईमानदार और सख्त अधिकारी की छवि हमेशा प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय रही है. साल 2022 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन पर भरोसा जताते हुए राज्य के चार रेप मामलों और चर्चित रसिका जैन मौत मामले की जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी. इसके बाद 2023 में उन्हें एडीजी (ट्रेनिंग) बनाया गया. अब शुभेंदु अधिकारी सरकार ने उन्हें महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों की जांच करने वाले विशेष आयोग में अहम जिम्मेदारी देकर फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नियुक्ति सिर्फ प्रशासनिक फैसला नहीं बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी है.
1970 में जन्मीं दमयंती सेन ने जादवपुर विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई की है. वह पढ़ाई में हमेशा फर्स्ट क्लास छात्रा रहीं. दमयंती सेन अपनी निजी जिंदगी को सार्वजनिक रूप से ज्यादा साझा नहीं करतीं. बताया जाता है कि उन्होंने शादी नहीं की, लेकिन वह एक बच्चे को गोद लेकर उसका पालन-पोषण कर रही हैं.




