नथवानी और बैद्यनाथ जीते, प्रणव झा हार गए! झारखंड राज्यसभा चुनाव में क्या हुआ अंदरखाने?
झारखंड राज्यसभा चुनाव के नतीजों में झामुमो के बैद्यनाथ राम ने 31 वोटों के साथ पहली सीट पर जीत दर्ज की, जबकि बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवाणी ने 28 वोट पाकर दूसरी सीट हासिल की। कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को 21 वोट मिले.


Ranchi: झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव का नतीजा सामने आते ही सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गई है. झामुमो के बैद्यनाथ राम ने सबसे ज्यादा 31 वोट हासिल कर अपनी जीत दर्ज की, जबकि बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवाणी ने 28 वोट हासिल कर दूसरी सीट पर कब्जा जमाया. हालांकि, नाथवाणी के पक्ष में पड़े दो वोट अमान्य घोषित किए गए. दूसरी ओर कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को 21 वोट मिले, जिनमें एक वोट रद्द हो गया. नतीजों ने सिर्फ दो सांसद नहीं चुने, बल्कि यह भी दिखा दिया कि विधानसभा के भीतर वोटों का गणित और राजनीतिक रिश्तों की हकीकत कितनी अलग हो सकती है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कांग्रेस का गणित कहां गड़बड़ा गया और नाथवाणी के खाते में अतिरिक्त वोट कहां से पहुंचे?
बैद्यनाथ राम ने दिखाया दम, सबसे ज्यादा मिले 31 वोट
महागठबंधन के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम ने चुनाव में सबसे मजबूत प्रदर्शन किया. उन्हें 31 वोट मिले, जो जीत के लिए जरूरी आंकड़े से भी अधिक हैं. मतदान के दौरान महागठबंधन ने एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की थी और नतीजों में उसका असर भी दिखाई दिया. बैद्यनाथ राम की जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह हेमंत सोरेन सरकार के लिए राजनीतिक मजबूती का संकेत है. मतदान से पहले ही महागठबंधन के पास विधानसभा में बहुमत का दावा था और पहली सीट पर उसकी पकड़ मजबूत मानी जा रही थी.
नाथवाणी की जीत ने बढ़ाई सियासी हलचल
सबसे ज्यादा चर्चा बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवाणी की जीत को लेकर हो रही है. नाथवाणी को 28 वोट मिले, लेकिन उनके पक्ष में पड़े दो वोट अमान्य घोषित कर दिए गए. इसके बावजूद वे दूसरी सीट जीतने में सफल रहे. दिलचस्प बात यह है कि बीजेपी ने इस बार अपना उम्मीदवार उतारने के बजाय नाथवाणी का समर्थन किया था, क्योंकि उसके पास अपने दम पर जीत के लिए जरूरी संख्या नहीं थी. चुनाव से पहले ही यह चर्चा थी कि नाथवाणी को एनडीए के अलावा भी कुछ विधायकों का समर्थन मिल सकता है और नतीजों के बाद क्रॉस वोटिंग को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं.
कांग्रेस का दावा और नतीजों का गणित
मतदान के बाद कांग्रेस विधायक अनुप सिंह ने दावा किया था कि पार्टी के सभी 16 विधायकों ने कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा के पक्ष में वोट किया है. लेकिन जब नतीजे सामने आए तो प्रणव झा को 21 वोट मिले, जिनमें से एक वोट अमान्य हो गया. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर महागठबंधन के भीतर वोटों का बंटवारा किस तरह हुआ और क्या कांग्रेस अपने सहयोगियों के वोट पूरी तरह अपने पक्ष में रखने में सफल नहीं हो पाई? चुनाव से पहले कांग्रेस ने एकजुटता का दावा जरूर किया था, लेकिन नतीजों ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं.
अब चर्चा नतीजों से ज्यादा 'क्रॉस वोटिंग' की
राज्यसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद अब राजनीतिक बहस का केंद्र क्रॉस वोटिंग और इनवैलिड वोट बन गए हैं. कुल 81 विधायकों ने मतदान किया था और तीन वोट अमान्य होने की खबर सामने आई है. सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज है कि आखिर ये वोट किसके थे और किस रणनीति के तहत मतदान हुआ. नाथवाणी की जीत ने यह भी दिखा दिया कि झारखंड की राजनीति में संख्या बल जितना अहम है, उतना ही अहम है अंदरखाने की राजनीतिक समझ और रिश्तों का समीकरण. आने वाले दिनों में यह चुनाव सिर्फ एक नतीजे के रूप में नहीं, बल्कि विधानसभा के बदलते राजनीतिक समीकरण के तौर पर याद किया जाएगा.

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