रांची में सोशल मीडिया पर आदिवासी महिला की मॉर्फ फोटो वायरल, 'सेक्स वर्कर' बताकर बदनाम करने का आरोप, FIR दर्ज
रांची में एक आदिवासी महिला ने आरोप लगाया है कि उनकी फेसबुक प्रोफाइल फोटो को मॉर्फ कर सोशल मीडिया पर वायरल किया गया और उन्हें गलत तरीके से 'सेक्स वर्कर' के रूप में पेश किया गया. शिकायत के बाद पुलिस ने FIR दर्ज कर साइबर जांच शुरू कर दी है .

Ranchi: सोशल मीडिया पर तस्वीरों के दुरुपयोग का एक और गंभीर मामला झारखंड की राजधानी रांची से सामने आया है. एक आदिवासी महिला ने आरोप लगाया है कि उनकी फेसबुक प्रोफाइल से तस्वीर उठाकर उसे एडिट (मॉर्फ) किया गया और फिर सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर इस तरह प्रसारित किया गया, जिससे उनकी पहचान एक 'सेक्स वर्कर' के रूप में पेश की गई. महिला का कहना है कि यह न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश है, बल्कि उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा और सम्मान पर भी सीधा हमला है. मामले को लेकर पीड़िता ने रांची थाने में शिकायत दर्ज कराई है. शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर साइबर एंगल से जांच शुरू कर दी है. शुरुआती जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि तस्वीर को सबसे पहले किसने एडिट किया, किस अकाउंट से पोस्ट किया गया और इसे वायरल करने के पीछे किन लोगों की भूमिका रही.
फेसबुक से फोटो उठाकर एडिट कर किया वायरल
पीड़िता का आरोप है कि उनकी मूल फेसबुक प्रोफाइल फोटो के साथ छेड़छाड़ कर उसे भ्रामक तरीके से सोशल मीडिया पर साझा किया गया. पोस्ट में उन्हें गलत तरीके से 'सेक्स वर्कर' बताया गया, जिससे उनकी सामाजिक छवि धूमिल हुई. महिला का कहना है कि इस घटना के बाद उन्हें मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है और परिचितों के बीच भी असहज स्थिति बन गई है. शिकायत में इसे सुनियोजित मानहानि और डिजिटल माध्यम से चरित्र हनन की कोशिश बताया गया है. पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि तस्वीर को केवल एक प्लेटफॉर्म पर साझा किया गया था या फिर अलग-अलग सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए इसे व्यापक रूप से फैलाया गया.
डिजिटल सबूत खंगाल रही पुलिस
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जांच का जिम्मा साइबर टीम को भी सौंपा गया है. पुलिस संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट, यूजर प्रोफाइल, आईपी डिटेल और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी जांच के आधार पर आरोपियों की पहचान होने के बाद उनके खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी. पुलिस ने आम लोगों से भी अपील की है कि किसी की तस्वीर को एडिट कर भ्रामक जानकारी के साथ साझा करना गंभीर अपराध है. बिना सत्यापन किसी पोस्ट को आगे बढ़ाने से भी कानूनी परेशानी हो सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि एआई और फोटो एडिटिंग टूल्स के बढ़ते इस्तेमाल के बीच ऐसे मामलों में डिजिटल साक्ष्यों का संरक्षण और त्वरित जांच पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है.

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