JPSC मेंस परीक्षा मामला: झारखंड हाईकोर्ट में डबल बेंच की सुनवाई, 342 चयनित अभ्यर्थी होंगे पक्षकार
11वीं से 13वीं संयुक्त JPSC मेंस परीक्षा के परिणाम को लेकर दाखिल याचिकाओं का मामला एक बार फिर झारखंड हाईकोर्ट में पहुंच गया है. पहले एकल पीठ द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद अब याचिकाकर्ताओं ने उस आदेश को चुनौती देते हुए डिवीजन बेंच में अपील दाखिल की है.

Ranchi: 11वीं से 13वीं संयुक्त JPSC मेंस परीक्षा के परिणाम को लेकर दाखिल याचिकाओं का मामला एक बार फिर झारखंड हाईकोर्ट में पहुंच गया है. पहले एकल पीठ द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद अब याचिकाकर्ताओं ने उस आदेश को चुनौती देते हुए डिवीजन बेंच में अपील दाखिल की है. इस अपील पर बुधवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान अदालत ने यह स्पष्ट किया कि इस मामले के अंतिम फैसले का सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ेगा, जिन्हें पहले ही नियुक्ति पत्र मिल चुके हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए अदालत ने याचिकाकर्ताओं को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं. मामला राज्य की सबसे अहम प्रशासनिक परीक्षाओं में से एक से जुड़ा होने के कारण कानूनी और प्रशासनिक दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
342 चयनित अभ्यर्थियों को बनाना होगा पक्षकार
अपील पर सुनवाई जस्टिस एमएस सोनक और राजेश शंकर की खंडपीठ के समक्ष हुई. अदालत ने याचिकाकर्ताओं के वकील को निर्देश दिया कि 342 ऐसे अभ्यर्थी, जिन्हें JPSC की ओर से नियुक्ति पत्र जारी किए जा चुके हैं, उन्हें दो सप्ताह के भीतर इस मामले में प्रतिवादी बनाया जाए. अदालत का मानना है कि यदि इन अभ्यर्थियों को पक्षकार नहीं बनाया गया, तो मामले का अंतिम निर्णय एकतरफा हो सकता है. पिछली सुनवाई में भी कोर्ट ने संकेत दिया था कि चयनित उम्मीदवारों के अधिकार इस केस से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं.
सुनवाई के दौरान JPSC और याचिकाकर्ताओं की दलीलें
सुनवाई के दौरान झारखंड लोक सेवा आयोग की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन, अधिवक्ता संजय पिपरवाल और प्रिंस कुमार ने अपना पक्ष रखा. वहीं, अपीलकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सुभाशीष रसिक सोरेन और शोभा लकड़ा ने तर्क पेश किए. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मूल्यांकन प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया और इसी आधार पर परिणाम को चुनौती दी गई है.
एकल पीठ पहले ही कर चुकी है याचिका खारिज
गौरतलब है कि अक्टूबर 2025 में हाईकोर्ट की एकल पीठ, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस दीपक रोशन कर रहे थे, ने इस मामले में दायर रिट याचिका को खारिज कर दिया था. अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि याचिकाकर्ताओं ने मूल्यांकन प्रक्रिया पर समय रहते आपत्ति दर्ज नहीं कराई. परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद उठाए गए सवाल कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं हैं. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि जांच में ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया, जिससे परीक्षा परिणाम रद्द करने का आधार बनता हो. अब इसी आदेश के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील दाखिल की गई है, जिस पर आगे सुनवाई होनी है.

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