हेमंत से मुलाकात के बाद बढ़ी सियासी हलचल: क्या JMM की ओर बढ़ रहे हैं संजीव सिंह?
धनबाद के नवनिर्वाचित मेयर संजीव सिंह ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की. इसके बाद झारखंड की सियासत में नए राजनीतिक समीकरण और उनके JMM में जाने की अटकलें तेज हो गई हैं.

Ranchi : धनबाद नगर निगम के नवनिर्वाचित महापौर Sanjeev Singh की Hemant Soren से मुलाकात के बाद झारखंड की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं. विधानसभा के बजट सत्र के दौरान हुई इस मुलाकात को केवल शिष्टाचार भेंट नहीं बल्कि संभावित सियासी संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है. हाल ही में हुए नगर निकाय चुनाव में संजीव सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल की थी और BJP समर्थित उम्मीदवार को हराया था. ऐसे में मुख्यमंत्री से उनकी मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कोयलांचल की राजनीति में कोई नया समीकरण बनने जा रहा है. खासकर तब, जब भाजपा के साथ उनके रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण रहे हैं.
रिकॉर्ड जीत के बाद मुख्यमंत्री से मुलाकात
नगर निकाय चुनाव में बड़ी जीत के बाद संजीव सिंह सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलने झारखंड विधानसभा पहुंचे. इस दौरान उन्होंने धनबाद नगर निगम क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर राज्य सरकार से सहयोग का आग्रह किया. मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में संजीव सिंह ने कहा कि धनबाद की जनता ने उन्हें आशीर्वाद देकर महापौर बनाया है और वे शहर के विकास के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने भी नगर निगम के विकास कार्यों में पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है. संजीव सिंह ने यह भी कहा कि विधायक और महापौर की भूमिका अलग-अलग होती है और दोनों पदों का अनुभव भी अलग होता है. फिलहाल उनका लक्ष्य धनबाद की जनता की समस्याओं का समाधान करना है.
बीजेपी से दूरी और नए समीकरण की चर्चा
सियासी चर्चा इसलिए भी तेज है क्योंकि संजीव सिंह का हालिया चुनावी सफर भाजपा से अलग रास्ते पर चला. वे पहले झरिया से विधायक रह चुके हैं और उनकी पत्नी Ragini Singh वर्तमान में भाजपा की विधायक हैं. लेकिन धनबाद महापौर चुनाव में भाजपा ने उन्हें आधिकारिक समर्थन नहीं दिया और अपना अलग उम्मीदवार उतारा. इसके बावजूद संजीव सिंह निर्दलीय मैदान में उतरे और रिकॉर्ड वोट हासिल कर जीत दर्ज की. उन्होंने 1.14 लाख से अधिक वोट पाकर जेएमएम समर्थित उम्मीदवार को करीब 31,900 वोटों से हराया. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह जीत केवल व्यक्तिगत प्रभाव नहीं बल्कि स्थानीय राजनीति में उनके मजबूत जनाधार का संकेत भी है. ऐसे में मुख्यमंत्री से उनकी मुलाकात को कुछ लोग नए राजनीतिक समीकरण की शुरुआत के रूप में देख रहे हैं.
क्या JMM में जा सकते हैं संजीव सिंह?
फिलहाल संजीव सिंह ने किसी भी राजनीतिक दल में शामिल होने को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई संकेत नहीं दिया है. उन्होंने अपनी प्राथमिकता शहर के विकास और जनता की समस्याओं के समाधान को बताया है. हालांकि झारखंड की राजनीति में दल बदल और नए गठबंधन की घटनाएं अक्सर देखने को मिलती रही हैं. ऐसे में एक प्रभावशाली स्थानीय नेता का सत्ता पक्ष के शीर्ष नेतृत्व से मिलना अपने आप में राजनीतिक संदेश माना जा रहा है.
कोयलांचल की राजनीति पर नजर रखने वाले जानकारों का कहना है कि आने वाले महीनों में यह साफ हो सकेगा कि यह मुलाकात सिर्फ विकास के मुद्दों तक सीमित रहती है या फिर इससे झारखंड की राजनीति में कोई नया समीकरण भी बनता है. फिलहाल इतना तय है कि धनबाद की राजनीति में संजीव सिंह की जीत और उनकी सक्रियता ने नई हलचल जरूर पैदा कर दी है.

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