ईरान युद्ध के 17 दिन: एल्युमिनियम में तेज उछाल, सोना-चांदी के दाम गिरे
पश्चिम एशिया में जारी ईरान युद्ध का असर अब वैश्विक कमोडिटी बाजार पर साफ दिखने लगा है. युद्ध का आज 17वां दिन है और इस दौरान कई धातुओं की कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है.

New Delhi: पश्चिम एशिया में जारी ईरान युद्ध का असर अब वैश्विक कमोडिटी बाजार पर साफ दिखने लगा है. युद्ध का आज 17वां दिन है और इस दौरान कई धातुओं की कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. जहां सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट आई है, वहीं एल्युमिनियम ने निवेशकों को चौंकाते हुए शानदार रिटर्न दिया है.
17 दिनों में एल्युमिनियम में 11% की तेजी
सोमवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर मार्च डिलीवरी वाला एल्युमिनियम 0.40% की बढ़त के साथ 347.50 रुपये प्रति किलो पर कारोबार करता दिखा. ईरान युद्ध शुरू होने से एक दिन पहले यानी 27 फरवरी को एल्युमिनियम का भाव करीब 313 रुपये प्रति किलो था. इसके बाद युद्ध के दौरान कीमतों में लगातार तेजी आई और अब यह 347.50 रुपये तक पहुंच गया है. इस तरह पिछले 17 दिनों में एल्युमिनियम करीब 11% तक मजबूत हो चुका है.
सोना पड़ा कमजोर
आमतौर पर वैश्विक तनाव के समय सोने की कीमतों में तेजी देखने को मिलती है, लेकिन इस बार तस्वीर उलट है. पिछले 17 दिनों में सोने की कीमतों में गिरावट का रुख देखने को मिला. सोमवार को MCX पर अप्रैल डिलीवरी वाला सोना करीब 2000 रुपये की गिरावट के साथ 1,56,596 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता नजर आया. 27 फरवरी को सोने का भाव 1,62,104 रुपये प्रति 10 ग्राम था. इस तरह इस अवधि में सोने की कीमत में करीब 3.40% की गिरावट दर्ज की गई.
चांदी में भी भारी गिरावट
सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी तेज गिरावट देखने को मिली है. सोमवार को MCX पर मई डिलीवरी वाली चांदी 5000 रुपये से ज्यादा गिरकर 2,54,000 रुपये प्रति किलो पर आ गई. 27 फरवरी को चांदी 2,82,644 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी. यानी पिछले 17 दिनों में चांदी करीब 10% तक सस्ती हो चुकी है.
एल्युमिनियम क्यों बना स्टार?
विशेषज्ञों के मुताबिक, ईरान युद्ध के कारण पश्चिम एशिया से एल्युमिनियम की आपूर्ति प्रभावित हुई है. होर्मुज की खाड़ी से जहाजों की आवाजाही बाधित होने के कारण कतर और बहरीन के बड़े एल्युमिनियम स्मेल्टर प्लांट से सप्लाई में रुकावट आई है. कतर एनर्जी ने एल्युमिनियम और कुछ केमिकल्स की बिक्री भी रोक दी है. इंटरनेशनल एल्युमिनियम इंस्टीट्यूट के अनुसार, पिछले साल फारस की खाड़ी के उत्पादकों ने दुनिया की कुल एल्युमिनियम आपूर्ति का करीब 8% हिस्सा निर्यात किया था. ऐसे में सप्लाई प्रभावित होने से एल्युमिनियम की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है.

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