देवघर में गोबर से नालियां जाम करने वाले 7 खटाल संचालकों को अंतिम नोटिस, 7 दिन का अल्टीमेटम
देवघर नगर निगम ने गोबर और मवेशियों का अपशिष्ट डालकर नालियां जाम करने वाले सात खटाल संचालकों को अंतिम नोटिस जारी किया है. सभी को सात दिनों के भीतर व्यवस्था सुधारने का निर्देश दिया गया है. ऐसा नहीं करने पर झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी गई है.

Deoghar: शहर की गलियों और मोहल्लों में गोबर व मवेशियों के अपशिष्ट से फैल रही गंदगी और नालियों के जाम होने की शिकायतों पर देवघर नगर निगम ने सख्ती शुरू कर दी है. अपर नगर आयुक्त रजनीश कुमार के निर्देश पर मंगलवार को नगर निगम की टीम ने विभिन्न इलाकों में स्थित खटालों का निरीक्षण किया. इस दौरान नियमों की अनदेखी करने वाले सात खटाल संचालकों को अंतिम नोटिस दिया गया. सभी को सात दिनों के भीतर व्यवस्था सुधारने का अल्टीमेटम दिया गया है. नगर प्रबंधक मनीष कुमार तिवारी के नेतृत्व में पहुंची टीम ने संचालकों को गोबर और अन्य अपशिष्ट गलियों, सड़कों तथा नालियों में नहीं डालने का निर्देश दिया.
चार वार्डों में सात खटाल संचालकों को नोटिस
नगर निगम की जांच के दौरान वार्ड संख्या 35 के कटिया स्थित श्रीराम कॉलोनी रोड में एक, वार्ड संख्या 22 के हरिहरबाड़ी में एक, वार्ड संख्या 24 के जनकपुर में एक और बत्तीसी में तीन तथा वार्ड संख्या 23 के शिवपुरी में एक खटाल संचालक को नोटिस दिया गया. निगम के अनुसार, खटालों से निकलने वाले अपशिष्ट का उचित प्रबंधन नहीं होने से नालियां जाम हो रही हैं. इससे जलनिकासी प्रभावित होने के साथ आसपास गंदगी फैलती है और स्थानीय लोगों को परेशानी होती है. नगर निगम ने सभी संबंधित संचालकों को अपशिष्ट के सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था करने और सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने से बचने का निर्देश दिया है.
सात दिनों में सुधार नहीं हुआ तो होगी कानूनी कार्रवाई
नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि निर्धारित सात दिनों की समय सीमा में व्यवस्था नहीं सुधारी गई, तो झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 की सुसंगत धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी. खटाल संचालकों को गोबर नालियों में बहाने और सार्वजनिक स्थलों पर जमा करने से रोकने का निर्देश दिया गया है. निगम की इस कार्रवाई का उद्देश्य शहर की सफाई व्यवस्था दुरुस्त करना, नालियों को जाम होने से बचाना और नागरिकों को गंदगी से राहत दिलाना है. अब निर्धारित समय सीमा पूरी होने के बाद संबंधित खटालों की स्थिति और संचालकों द्वारा किए गए सुधार की निगरानी की जाएगी.

