झारखंड के 6 राज्यसभा सांसद, लेकिन MPLADS पोर्टल पर सिर्फ 5 के नाम! कहां है परिमल नाथवानी के फंड का हिसाब?
झारखंड के छह राज्यसभा सांसदों में से MPLADS पोर्टल पर केवल पांच का रिकॉर्ड दिखने का दावा सामने आया है. परिमल नाथवानी के नाम पर सांसद निधि का विवरण उपलब्ध नहीं होने से पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

Ranchi: झारखंड से राज्यसभा के छह सांसद हैं, लेकिन केंद्र सरकार के सांसद निधि यानी MPLADS पोर्टल पर पांच सांसदों का ही रिकॉर्ड दिखाई देने का दावा सामने आया है. उद्योग जगत से जुड़े परिमल नाथवानी के नाम पर फंड का विवरण नहीं मिलने से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर उनके सांसद निधि का हिसाब सार्वजनिक पोर्टल पर क्यों नहीं दिख रहा. जून 2026 में झारखंड से राज्यसभा पहुंचे नाथवानी का संसदीय सफर नया नहीं है. वह इससे पहले भी राज्यसभा के सदस्य रह चुके हैं. ऐसे में सवाल उनके राजनीतिक अनुभव का नहीं, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड की पारदर्शिता का है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इसी चुनाव में निर्वाचित बैद्यनाथ राम के नाम पर पोर्टल में 4.90 करोड़ रुपये का आवंटन दिखाई दे रहा है. फिर नाथवानी के नाम पर जानकारी क्यों नहीं मिल रही? क्या पोर्टल अपडेट नहीं हुआ है या रिकॉर्ड दर्ज करने में देरी हुई है? इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग से मिलना जरूरी है, क्योंकि सांसद निधि का संबंध सीधे जनता के विकास कार्यों से है.
पांच सांसदों का रिकॉर्ड, छठे का हिसाब कहां?
मामला केंद्र सरकार के MPLADS पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी से जुड़ा है. झारखंड के राज्यसभा सांसदों की संख्या छह है, लेकिन उपलब्ध विवरण के अनुसार पोर्टल पर केवल पांच सांसदों का रिकॉर्ड दिखाई दे रहा है. परिमल नाथवानी के नाम पर सांसद निधि का विवरण नहीं मिलने से पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं. हालांकि, केवल पोर्टल पर नाम नहीं दिखने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि उनके नाम पर फंड आवंटित नहीं हुआ है. इसकी पुष्टि आधिकारिक रिकॉर्ड और संबंधित विभाग के जवाब से ही हो सकती है.
बैद्यनाथ राम के खाते में 4.90 करोड़, नाथवानी का रिकॉर्ड गायब
जून 2026 में झारखंड की दो राज्यसभा सीटों पर चुनाव हुआ था. इनमें बैद्यनाथ राम और परिमल नाथवानी निर्वाचित हुए. उपलब्ध पोर्टल विवरण के मुताबिक, बैद्यनाथ राम के नाम पर 4.90 करोड़ रुपये का आवंटन दिख रहा है, जबकि नाथवानी के नाम पर संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं होने की बात कही जा रही है. ऐसे में सवाल उठता है कि दोनों सांसदों के रिकॉर्ड में यह अंतर क्यों है. क्या यह डेटा अपडेट करने में देरी का मामला है या किसी प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण जानकारी प्रदर्शित नहीं हो रही? इसकी स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है.
सांसद निधि का हिसाब सार्वजनिक होना जरूरी
परिमल नाथवानी वर्ष 2008 और 2014 में झारखंड से तथा 2020 में आंध्र प्रदेश से राज्यसभा पहुंचे थे. वर्ष 2026 में उन्होंने फिर झारखंड का प्रतिनिधित्व संभाला. उनका संसदीय अनुभव लंबा रहा है, लेकिन मौजूदा सवाल उनके अनुभव पर नहीं, सरकारी पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी पर है. सांसद निधि जनता के विकास कार्यों के लिए निर्धारित सरकारी व्यवस्था का हिस्सा है. इसलिए आवंटन, कार्यों की सिफारिश, स्वीकृति और खर्च से जुड़ी जानकारी नागरिकों के लिए सुलभ होनी चाहिए. यदि पोर्टल पर रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, तो संबंधित विभाग को इसकी वजह स्पष्ट करनी चाहिए और जरूरी अपडेट करना चाहिए.

