परिसीमन में आदिवासी आरक्षण बचाने की मांग, केंद्रीय कानून मंत्री से मिले बंधु तिर्की
झारखंड में आदिवासी राजनीतिक प्रतिनिधित्व की सुरक्षा को लेकर पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से मुलाकात की. उन्होंने परिसीमन के बाद आरक्षित सीटों का अनुपात बनाए रखने और संविधान के अनुच्छेद 330(2) व 332(3) में संशोधन की मांग करते हुए विस्तृत ज्ञापन सौंपा.

27 अक्टूबर 2026. झारखंड में आदिवासी समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को सुरक्षित रखने की मांग को लेकर पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने परिसीमन के संभावित प्रभावों पर विस्तृत ज्ञापन और कानूनी विशेषज्ञों की राय सौंपी. तिर्की ने मांग की कि लोकसभा और विधानसभा की सीटों की संख्या बढ़ने पर अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित सीटों में भी आनुपातिक वृद्धि सुनिश्चित की जाए. उनका कहना है कि ऐसा नहीं होने पर झारखंड समेत पांचवीं अनुसूची वाले राज्यों में आदिवासी समुदाय का राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है. उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 330(2) और 332(3) में आवश्यक संशोधन करने का आग्रह किया. मुलाकात में ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय समन्वयक शशि पन्ना भी मौजूद रहे. तिर्की ने केंद्र से आदिवासी अधिकारों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट संवैधानिक और कानूनी प्रावधान करने की मांग रखी.
आरक्षित सीटों का अनुपात बनाए रखने पर जोर
बंधु तिर्की ने कहा कि परिसीमन के बाद सदन में सीटों की कुल संख्या बढ़ती है, तो अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित सीटों में भी उसी अनुपात में बढ़ोतरी होनी चाहिए. उन्होंने इसे आदिवासी समुदाय की राजनीतिक भागीदारी और संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया.
पांचवीं अनुसूची वाले राज्यों को भी मिले संरक्षण
तिर्की ने प्रस्तावित 131वें संविधान संशोधन विधेयक, 2026 का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ पूर्वोत्तर राज्यों के लिए विशेष प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं. उन्होंने झारखंड सहित अन्य पांचवीं अनुसूची वाले राज्यों के लिए भी समान प्रकृति की सुरक्षा व्यवस्था विकसित करने की मांग की.
वर्ष 2007 के परिसीमन का दिया उदाहरण
ज्ञापन में वर्ष 2007 की परिसीमन प्रक्रिया का हवाला देते हुए तिर्की ने कहा कि उस समय झारखंड में आदिवासी आरक्षित विधानसभा सीटों की संख्या 28 से 22 और लोकसभा सीटों की संख्या पांच से चार करने का प्रस्ताव सामने आया था. उनके अनुसार, उस अनुभव को ध्यान में रखते हुए भविष्य के लिए स्पष्ट कानूनी सुरक्षा आवश्यक है.
संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका बढ़ाने की मांग
तिर्की ने परिसीमन से जुड़े फैसलों में राज्यपाल, जनजातीय सलाहकार परिषद और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की भूमिका को महत्व देने की मांग की. उन्होंने अनुच्छेद 338A(9) के अनुरूप संबंधित मामलों में आयोग से परामर्श सुनिश्चित करने, कानूनी संशोधन करने और विशेषज्ञ समिति गठित कर संभावित प्रभावों का अध्ययन कराने का सुझाव भी दिया.
कानून मंत्री ने ज्ञापन का संज्ञान लिया
मुलाकात के दौरान अर्जुन राम मेघवाल ने सौंपे गए ज्ञापन और कानूनी पहलुओं का संज्ञान लिया. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त जानकारी के लिए संपर्क किया जाएगा. तिर्की को उम्मीद है कि केंद्र सरकार आगामी नीतिगत फैसलों में आदिवासी प्रतिनिधित्व की सुरक्षा को प्राथमिकता देगी. प्रतिनिधिमंडल ने रिपोर्ट के साथ झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता शुभाशिष रसिक सोरेन और एनयूएसआरएल, रांची के सहायक प्राध्यापक रामचंद्र उराँव के कानूनी अभिमत भी सौंपे.


