मंझीलाडीह में 100 वर्षों से हो रही लख्खी माता की पूजा, भक्ति में डूबा पूरा गांव
देवघर जिले के सारवां प्रखंड स्थित मंझीलाडीह गांव की पोद्दार टोली में लख्खी माता की पूजा करीब 100 वर्षों से होती आ रही है. इस वर्ष भी मंदिर को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है और श्रद्धालु भक्ति भाव से पूजा-अर्चना कर रहे हैं। बुधवार को प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा.

देवघर:- झारखंड के देवघर जिले के सारवां प्रखंड स्थित मंझीलाडीह गांव की पोद्दार टोली में लख्खी माता की पूजा श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ की जा रही है. यहां लगभग एक शताब्दी से मां की पूजा-अर्चना होती आ रही है. वर्षों पुरानी इस परंपरा से गांव के लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है. इस वर्ष भी मंदिर में मां की प्रतिमा स्थापित कर विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं. पूजा को लेकर पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल है. मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है, जबकि भक्ति गीतों से वातावरण भक्तिमय बना हुआ है. परंपरा के अनुसार, मां की प्रतिमा तीन दिनों तक मंदिर में विराजमान रहती हैं और इसके बाद विसर्जन किया जाता है. इस वर्ष बुधवार को प्रतिमा विसर्जन होगा. आयोजन में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है.
पीढ़ियों से चली आ रही पूजा की परंपरा
मंझीलाडीह की पोद्दार टोली में लख्खी माता की पूजा लंबे समय से गांव की धार्मिक पहचान बनी हुई है. करीब 100 वर्षों से ग्रामीण इस परंपरा को निभाते आ रहे हैं. हर साल होने वाला यह आयोजन पुरानी मान्यताओं और रीति-रिवाजों को जीवित रखने का माध्यम भी है. ग्रामीण पूरे उत्साह के साथ पूजा में शामिल होते हैं.
तीन दिनों तक मंदिर में विराजती हैं मां
स्थानीय परंपरा के मुताबिक, मां की प्रतिमा तीन दिनों तक मंदिर में स्थापित रहती है. इस दौरान श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना करते हैं. इसके बाद चौथे दिन प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है. इस वर्ष विसर्जन बुधवार को निर्धारित है. इसे लेकर गांव में तैयारियां और उत्साह बना हुआ है.
पुरोहित अंगद पांडेय करा रहे पूजा
पहले मंदिर में पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी स्वर्गीय पंडित चंद्रशेखर झा निभाते थे. उनके निधन के बाद अब पुरोहित अंगद पांडेय के सान्निध्य में धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए जा रहे हैं. पूजा के दौरान पुरानी परंपराओं और विधि-विधानों का पालन किया जा रहा है.
रोशनी और भक्ति गीतों से भक्तिमय हुआ माहौल
पूजा के अवसर पर मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी विद्युत लाइटों से सजाया गया है. शाम होते ही रोशनी से जगमगाता मंदिर श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है. वहीं, ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर बज रहे भक्ति गीतों से आसपास का वातावरण भक्तिमय बना हुआ है. ग्रामीण मां के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं.
आयोजन में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी
पूजा को सफल बनाने में रितेश पोद्दार, राजू पोद्दार, दिवाकर पोद्दार, निंक्कु पोद्दार, कारू पोद्दार, कुशलदीप पोद्दार और प्रशांत पोद्दार सहित अन्य ग्रामीण सहयोग कर रहे हैं. महिलाएं, पुरुष और बच्चे भी आयोजन में भाग ले रहे हैं. सामूहिक प्रयास से गांव की पुरानी धार्मिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है.
बुधवार को प्रतिमा विसर्जन के साथ इस वर्ष का पूजा आयोजन संपन्न होगा. लगभग एक सदी से चली आ रही यह परंपरा मंझीलाडीह में धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकता और सामूहिक सहभागिता का भी प्रतीक बनी हुई है.


