गुमला के कस्तूरबा स्कूल में 10वीं की छात्रा ने की आत्महत्या, पांच सदस्यीय जांच टीम गठित
गुमला जिले के भरनो प्रखंड स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय स्कूल में कक्षा 10 की एक छात्रा हॉस्टल के कमरे में फंदे से लटकी मिली. घटना के बाद प्रशासन ने पांच सदस्यीय जांच टीम गठित कर मामले की जांच शुरू कर दी है. परिजनों ने स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है.

Gumla: गुमला जिले के भरनो प्रखंड स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय स्कूल में बुधवार सुबह एक छात्रा की आत्महत्या की घटना से हड़कंप मच गया. कक्षा 10 में पढ़ने वाली छात्रा अपने हॉस्टल के कमरे में दुपट्टे के सहारे फंदे से लटकी मिली. घटना की जानकारी मिलते ही स्कूल प्रबंधन ने पुलिस और प्रशासन को सूचना दी. भरनो थाना पुलिस, शिक्षा विभाग के अधिकारी और प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची तथा पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू की. पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए गुमला के उपायुक्त दिलेश्वर महतो ने पांच सदस्यीय जांच टीम का गठन किया है. यह टीम छात्रा की मौत के कारणों, हॉस्टल की व्यवस्था और घटना के समय की परिस्थितियों की विस्तृत जांच करेगी. वहीं, परिजनों ने स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है.
पीटी में नहीं गई, कमरे में अकेली थी छात्रा
स्कूल प्रबंधन के अनुसार, बुधवार सुबह रोजाना की तरह हॉस्टल की छात्राएं पीटी के लिए मैदान गई थीं. इसी दौरान छात्रा ने पेट दर्द की शिकायत की और पीटी में शामिल होने के बजाय अपने कमरे में ही रुकने की बात कही. उपस्थिति के दौरान उसके नहीं पहुंचने पर कुछ छात्राओं को उसे बुलाने भेजा गया. कमरे के अंदर से उसने तबीयत खराब होने की बात कही और बाहर आने से इनकार कर दिया. पीटी समाप्त होने के बाद जब छात्राएं वापस लौटीं तो कमरे का दरवाजा अंदर से बंद मिला. काफी देर तक आवाज देने के बाद भी जब कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो स्कूल स्टाफ को सूचना दी गई. दरवाजा तोड़कर अंदर देखा गया तो छात्रा दुपट्टे के सहारे फंदे से लटकी हुई मिली. उसे तत्काल नीचे उतारा गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी.
परिजनों ने लगाए लापरवाही के आरोप
घटना की सूचना मिलने के बाद छात्रा के परिजन भी स्कूल पहुंचे. परिवार का रो-रोकर बुरा हाल था. परिजनों का कहना है कि उनकी बेटी पढ़ाई में होनहार और शांत स्वभाव की थी. उन्होंने सवाल उठाया कि केवल पेट दर्द की शिकायत के कारण वह इतना बड़ा कदम नहीं उठा सकती. परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया कि यदि समय पर निगरानी और आवश्यक देखभाल की जाती तो शायद छात्रा की जान बचाई जा सकती थी. उन्होंने घटना के पीछे की वास्तविक वजह सामने लाने की मांग की है.
जांच टीम करेगी हर पहलू की पड़ताल
घटना के बाद जिला प्रशासन ने तत्काल पांच सदस्यीय जांच टीम गठित कर दी है. टीम हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था, छात्राओं की निगरानी, स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी और घटना से पहले की परिस्थितियों की जांच करेगी. पुलिस ने घटनास्थल से आवश्यक साक्ष्य जुटाने के साथ स्कूल स्टाफ और छात्राओं के बयान भी दर्ज करने शुरू कर दिए हैं. प्रशासन का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक तथ्यों और जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी.

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