JPSC-JSSC छात्रों के मुद्दे पर कांग्रेस के 4 मंत्री क्यों उतरे मैदान में? बीजेपी से पूछे सवाल, घेराव की बताई कहानी
JPSC-JSSC छात्र आंदोलन को लेकर कांग्रेस के चार मंत्रियों ने बीजेपी के आरोपों पर जवाब दिया. राधाकृष्ण किशोर, इरफान अंसारी, दीपिका पांडेय सिंह और शिल्पी नेहा तिर्की ने आंदोलन और सरकार की कार्रवाई पर बात रखी.


Ranchi: झारखंड में JPSC और JSSC की प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच कांग्रेस ने बीजेपी के आरोपों पर अपना पक्ष रखा है. राज्य सरकार में कांग्रेस कोटे के चार मंत्रियों—राधाकृष्ण किशोर, इरफान अंसारी, दीपिका पांडेय सिंह और शिल्पी नेहा तिर्की—ने आंदोलन, छात्रों की मांगों और सरकार की कार्रवाई को लेकर अलग-अलग बातें रखीं. मंत्रियों ने कहा कि सरकार छात्रों से बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश कर रही है, जबकि बीजेपी पर आंदोलन को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया. वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने विधानसभा में चर्चा की जरूरत बताई. इरफान अंसारी ने छात्रों के बीच पहुंचकर बातचीत और मेडिकल व्यवस्था का जिक्र किया. वहीं दीपिका पांडेय सिंह ने पेपर लीक और जांच का मुद्दा उठाया, जबकि शिल्पी नेहा तिर्की ने राहुल गांधी के खिलाफ बीजेपी की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दी.
राधाकृष्ण किशोर ने विधानसभा में चर्चा का सवाल उठाया
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने JPSC और JSSC परीक्षाओं को लेकर जारी आंदोलन पर बीजेपी की भूमिका पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष छात्रों की समस्याओं को लेकर गंभीर है तो विधानसभा के भीतर इस मुद्दे पर चर्चा की जानी चाहिए. किशोर ने कहा कि छात्रों की मांगों पर चर्चा के लिए सदन एक उचित मंच है. उन्होंने विधानसभा घेराव के दौरान दूसरे राज्यों से लोगों को बुलाए जाने का आरोप भी लगाया. हालांकि, यह आरोप राजनीतिक दलों के दावों का हिस्सा हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि का दावा नहीं किया गया है. मंत्री के मुताबिक, सरकार ने प्रदर्शन के दौरान स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए संयम बरता और छात्रों के प्रति संवेदनशील रुख अपनाया.
इरफान अंसारी ने छात्रों से बातचीत का किया जिक्र
स्वास्थ्य एवं आपदा प्रबंधन मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि सरकार और छात्रों के बीच संवाद बना हुआ है. उन्होंने बताया कि वह बिना औपचारिक प्रोटोकॉल के आंदोलन स्थल पर पहुंचे और प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत की. अंसारी के मुताबिक, बातचीत के दौरान कुछ छात्रों ने सरकार के साथ शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की इच्छा जताई. उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के बीच कुछ राजनीतिक ताकतें इसे अपने प्रभाव में लेने की कोशिश कर रही हैं. मंत्री ने आंदोलन स्थल पर स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था का भी उल्लेख किया. उनके अनुसार, छात्रों की तबीयत खराब होने की स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए मेडिकल टीम तैनात की गई है. उन्होंने दावा किया कि सरकार छात्रों की ज्यादातर मांगों को लेकर सकारात्मक है और करीब 95 फीसदी मांगों पर कार्रवाई की दिशा में काम चल रहा है.
पेपर लीक के मुद्दे पर दीपिका पांडेय सिंह ने उठाए सवाल
मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मुद्दे को व्यापक संदर्भ में उठाया. उन्होंने दावा किया कि पिछले वर्षों में देश के अलग-अलग हिस्सों से प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले सामने आते रहे हैं. उन्होंने जांच एजेंसियों की कार्रवाई और मामलों में दोषसिद्धि की स्थिति पर भी सवाल खड़े किए. उनका कहना था कि पेपर लीक जैसी घटनाओं पर केवल जांच शुरू करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि दोषियों तक कार्रवाई पहुंचना भी जरूरी है. दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि झारखंड सरकार ने 2023 में पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं से निपटने के लिए कड़ा कानून बनाया था. मौजूदा मामलों में भी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की बात उन्होंने कही.
शिल्पी नेहा तिर्की ने राहुल गांधी का किया बचाव
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने बीजेपी सांसद आदित्य साहू की ओर से राहुल गांधी को लेकर की गई टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी पहले भी छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को संसद और सार्वजनिक मंचों पर उठाते रहे हैं. उन्होंने NEET पेपर लीक के मुद्दे का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्रों से जुड़े मामलों में राहुल गांधी की भूमिका पर सवाल उठाने से पहले बीजेपी को अपने राजनीतिक रुख को भी देखना चाहिए. शिल्पी नेहा तिर्की ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलनों का उदाहरण देते हुए बीजेपी से पूछा कि अलग-अलग राज्यों में छात्र आंदोलनों को लेकर उसका नजरिया अलग क्यों दिखाई देता है. उन्होंने कानून-व्यवस्था से जुड़े पुराने मामलों का उल्लेख करते हुए विपक्ष से सभी घटनाओं पर एक समान रुख अपनाने की बात कही.
छात्र आंदोलन पर सरकार और विपक्ष के दावे अलग
JPSC-JSSC परीक्षाओं से जुड़े विवाद में अब छात्रों की मांगों के साथ सरकार और विपक्ष के दावे भी चर्चा का हिस्सा बन गए हैं. सरकार का कहना है कि छात्रों की शिकायतों पर कार्रवाई की जा रही है और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश जारी है. विपक्ष दूसरी ओर परीक्षा व्यवस्था, कथित अनियमितताओं और सरकार की जवाबदेही को लेकर सवाल उठा रहा है. छात्र संगठनों की ओर से भी केवल आश्वासन के बजाय भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया में पारदर्शिता और स्थायी सुधार की मांग की जा रही है. ऐसे में इस पूरे मामले में सरकार के फैसलों के साथ छात्रों की अगली रणनीति भी महत्वपूर्ण होगी. JPSC-JSSC परीक्षाओं का विवाद अब सिर्फ परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि झारखंड में युवा, रोजगार और परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़े बड़े सवालों का विषय बन गया है.

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