JPSC और JSSC-CGL जांच पर बाबूलाल मरांडी के गंभीर सवाल, CID और ADG मनोज कौशिक की भूमिका पर उठाई आपत्ति
“JPSC और JSSC-CGL की जांच पर अब सवाल सिर्फ घोटाले के नहीं, जांच की दिशा के भी उठ रहे हैं. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने CID की कार्यप्रणाली और ADG मनोज कौशिक की भूमिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं.”

Ranchi: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड में JPSC और JSSC-CGL से जुड़े मामलों की CID जांच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लगातार दो पोस्ट कर उन्होंने आरोप लगाया कि CID की मौजूदा कार्यप्रणाली से जांच की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है और महत्वपूर्ण मामलों में वास्तविक दोषियों तक पहुंचने के बजाय जांच की दिशा सीमित की जा रही है. मरांडी ने CID के ADG मनोज कौशिक की भूमिका को भी सवालों के घेरे में रखा और उनके पूर्व कार्यकाल से जुड़े कथित भ्रष्टाचार एवं अवैध वसूली के आरोपों का उल्लेख किया. उन्होंने JPSC मामले में चेयरमैन से पूछताछ के बावजूद गिरफ्तारी नहीं होने और परीक्षा एजेंसी पर जिम्मेदारी केंद्रित किए जाने पर भी सवाल उठाया. मरांडी ने पूरे मामले की जांच CBI को सौंपने की मांग करते हुए कहा कि निष्पक्ष जांच से ही युवाओं का भरोसा बहाल हो सकता है.
JPSC-CGL जांच की दिशा पर उठाए सवाल
मरांडी ने आरोप लगाया कि JSSC-CGL परीक्षा मामले में CID ने जांच की प्रकृति को इस तरह सीमित किया, जिससे वास्तविक दोषियों तक पहुंचने के बजाय नेपाल में कोचिंग लेने वाले छात्रों पर जिम्मेदारी केंद्रित हो गई. उनका दावा है कि परीक्षा के कई प्रश्न पुराने प्रश्नपत्रों से हूबहू लिए गए थे और कुछ चयनित अभ्यर्थियों को पहले से उनकी तैयारी कराई गई थी. उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सामने नहीं लाया गया और अदालतों के समक्ष भी जांच से जुड़ी पूरी तस्वीर नहीं रखी गई. इसी आधार पर उन्होंने सवाल उठाया कि JPSC मामले में भी क्या जांच को सीमित दायरे में रखकर वास्तविक जिम्मेदार लोगों तक पहुंचने से बचा जा रहा है.
मनोज कौशिक की भूमिका पर भी निशाना
मरांडी ने CID के ADG मनोज कौशिक की भूमिका को इस पूरे विवाद के केंद्र में बताते हुए उनके पुराने कार्यकाल से जुड़े आरोपों का उल्लेख किया. उन्होंने दावा किया कि हजारीबाग में SP रहते हुए कौशिक पर कोयला चोरी और अवैध वसूली से जुड़े गंभीर आरोप लगे थे. मरांडी ने यह भी कहा कि बाद में ACB स्तर पर भी उनके खिलाफ शिकायतों की जांच हुई और जांच के दौरान आरोपों की पुष्टि किए जाने का दावा किया गया. उनके मुताबिक, इन परिस्थितियों के बावजूद मनोज कौशिक को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलना सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है.
JPSC मामले में चेयरमैन की गिरफ्तारी पर सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि JPSC मामले में चेयरमैन से कई दौर की पूछताछ हो चुकी है, लेकिन अब तक गिरफ्तारी नहीं हुई. उन्होंने आरोप लगाया कि जांच का फोकस परीक्षा आयोजित करने वाली निजी एजेंसी तक सीमित करने की कोशिश हो रही है. मरांडी ने इसे जांच की दिशा को लेकर गंभीर सवाल बताया. उन्होंने दावा किया कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में बड़े स्तर पर अनियमितता हुई है, तो केवल अभ्यर्थियों या निजी एजेंसी की भूमिका की जांच से पूरी तस्वीर सामने नहीं आएगी. उन्होंने जांच एजेंसी से यह स्पष्ट करने की मांग की कि परीक्षा प्रक्रिया में शामिल अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच किस स्तर तक पहुंची है.
CID की कार्यप्रणाली और मीडिया लीक पर भी सवाल
मरांडी ने CID पर जांच से जुड़ी सूचनाएं नियमित रूप से मीडिया में लीक करने का आरोप लगाया. उनका कहना है कि इससे जांच की निष्पक्षता प्रभावित होती है और जनता के बीच एक खास नैरेटिव बनने की स्थिति पैदा होती है. उन्होंने आरोप लगाया कि महत्वपूर्ण आपराधिक मामलों में जांच एजेंसी को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त होकर काम करना चाहिए, जबकि मौजूदा परिस्थितियां इसके उलट संकेत दे रही हैं. मरांडी ने कहा कि JPSC मामला केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया में कथित संगठित हेरफेर की जांच का विषय है.
CBI जांच की मांग, सरकार से पूछा सीधा सवाल
मरांडी ने राज्य सरकार से सवाल किया कि यदि सरकार को जांच की निष्पक्षता और अपनी भूमिका पर पूरा भरोसा है, तो JPSC और संबंधित परीक्षा विवाद की जांच CBI को सौंपने में उसे आपत्ति क्यों है. उन्होंने कहा कि इस मामले में पारदर्शी और स्वतंत्र जांच जरूरी है, क्योंकि इसका सीधा असर राज्य के हजारों अभ्यर्थियों और युवाओं के भविष्य पर पड़ता है. मरांडी के मुताबिक, जांच एजेंसी की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवालों का समाधान केवल निष्पक्ष जांच और उसके निष्कर्षों को सार्वजनिक करने से ही संभव है.



