TMC में फिर टूट की चर्चा, विधानसभा के बाद अब सांसदों पर मंडराया बगावत का साया!
पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सामने नया राजनीतिक संकट खड़ा होता दिखाई दे रहा है. विधानसभा में कथित तौर पर बड़ी टूट के बाद अब पार्टी के सांसदों को लेकर भी चर्चाओं का दौर तेज हो गया है.

West Bengal: पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सामने नया राजनीतिक संकट खड़ा होता दिखाई दे रहा है. विधानसभा में कथित तौर पर बड़ी टूट के बाद अब पार्टी के सांसदों को लेकर भी चर्चाओं का दौर तेज हो गया है. राजनीतिक गलियारों में अटकलें लगाई जा रही हैं कि बंगाल विधानसभा के बाद लोकसभा और राज्यसभा में भी असंतोष खुलकर सामने आ सकता है. इन चर्चाओं ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है और यही वजह है कि डैमेज कंट्रोल की कवायद तेज कर दी गई है. सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व लगातार सांसदों और विधायकों के संपर्क में है ताकि किसी भी तरह की संभावित बगावत को समय रहते रोका जा सके. विपक्षी दल भी इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं, जिससे आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति और अधिक दिलचस्प होने की संभावना जताई जा रही है.
विधानसभा में टूट के बाद संसद तक पहुंची हलचल
बताया जा रहा है कि ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में विधायकों के अलग होने के बाद TMC पहली बार इतने बड़े आंतरिक संकट का सामना कर रही है. विधानसभा में हुए इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या इसका असर संसद में भी देखने को मिलेगा. इसी बीच राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने भी इस आशंका को खुलकर व्यक्त किया है. उनका कहना है कि जिस तरह कम समय में बड़ी संख्या में विधायक अलग हुए हैं, उसी तरह की प्रतिक्रिया लोकसभा में भी देखने को मिल सकती है. हालांकि उन्होंने राज्यसभा को लेकर कोई स्पष्ट दावा नहीं किया, लेकिन ऐसी संभावना से इनकार भी नहीं किया. उनके इस बयान के बाद TMC के भीतर चल रही राजनीतिक हलचल को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं.
बीजेपी पर आरोप, पार्टी ने टूट की अटकलों को बताया बेबुनियाद
दूसरी ओर TMC के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने पार्टी में किसी बड़ी टूट की संभावनाओं को पूरी तरह खारिज कर दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) बंगाल विधानसभा की तरह संसद में भी राजनीतिक समीकरण बदलने की कोशिश कर रही है. सौगत रॉय का कहना है कि ममता बनर्जी ने पहले भी कई कठिन राजनीतिक परिस्थितियों का सामना किया है और हर बार मजबूती के साथ वापसी की है. पार्टी नेतृत्व का भी दावा है कि सांसदों और विधायकों के बीच किसी तरह का बड़ा असंतोष नहीं है. हालांकि राजनीतिक चर्चाओं में बारासात सांसद काकोली घोष दस्तीदार का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है. पार्टी के भीतर उनकी नाराजगी पहले भी सामने आ चुकी है, लेकिन उन्होंने अब तक किसी संभावित बगावत या अलग गुट का हिस्सा बनने की पुष्टि नहीं की है.
सांसदों पर नजर, दलबदल कानून भी बना चर्चा का केंद्र
सूत्रों के अनुसार हालात को संभालने के लिए ममता बनर्जी ने पिछले कुछ दिनों में कई नाराज नेताओं से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की है. पार्टी ने संसद में अपने दो भरोसेमंद सांसदों को सहयोगियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने की जिम्मेदारी भी सौंपी है. फिलहाल TMC के पास लोकसभा में 28 और राज्यसभा में 13 सांसद हैं. ऐसे में दलबदल कानून को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं. नियमों के अनुसार यदि दो-तिहाई सांसद किसी अलग गुट के साथ जाते हैं तो उनकी सदस्यता बच सकती है. इसी वजह से राजनीतिक विश्लेषक दो संभावित रास्तों पर चर्चा कर रहे हैं—पहला, अलग गुट बनाकर खुद को असली TMC बताने की कोशिश और दूसरा, किसी अन्य राजनीतिक दल के साथ विलय का विकल्प. हालांकि अंतिम फैसला संगठनात्मक बहुमत और चुनाव आयोग के समक्ष पेश किए जाने वाले दावों पर निर्भर करेगा.

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