13 दिन बाद खत्म हुआ इंतजार, रांची के लापता अंश-अंशिका रामगढ़ में मिले सुरक्षित
बीते कई दिनों से दोनों बच्चों की तलाश में रांची पुलिस दिन-रात जुटी हुई थी. आखिरकार पुलिस को सफलता मिली और दोनों नाबालिगों को रामगढ़ जिले के चितरपुर इलाके से सकुशल बरामद कर लिया गया.

Ranchi: रांची से लापता हुए मासूम भाई-बहन अंश और अंशिका की सुरक्षित बरामदगी ने पूरे झारखंड को बड़ी राहत दी है. बीते कई दिनों से दोनों बच्चों की तलाश में रांची पुलिस दिन-रात जुटी हुई थी. आखिरकार पुलिस को सफलता मिली और दोनों नाबालिगों को रामगढ़ जिले के चितरपुर इलाके से सकुशल बरामद कर लिया गया. इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है, जिनसे पुलिस गहन पूछताछ कर रही है. बच्चों के सुरक्षित मिलने की खबर मिलते ही परिजनों के चेहरे पर राहत और खुशी लौट आई. यह मामला न केवल पुलिस की सतर्कता और मेहनत को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि किस तरह एक संगठित जांच और तकनीकी संसाधनों के उपयोग से एक जटिल मामले को सुलझाया जा सकता है. फिलहाल बच्चों को सुरक्षित रांची लाया जा रहा है और पूरे मामले की जांच जारी है.
दुकान के लिए निकले और फिर नहीं लौटे मासूम
जानकारी के अनुसार, 2 जनवरी को धुर्वा थाना क्षेत्र के मल्लार टोली निवासी 5 वर्षीय अंश और 4 वर्षीय अंशिका घर के पास की दुकान से सामान लेने निकले थे. लेकिन काफी देर बीत जाने के बाद भी जब दोनों वापस नहीं लौटे तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की. आसपास के इलाकों में खोजबीन के बाद धुर्वा थाना में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई. घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई और परिजन गहरे सदमे में आ गए. छोटे बच्चों के अचानक लापता हो जाने से लोगों के मन में कई तरह की आशंकाएं पैदा हो गई थीं.
40 सदस्यीय SIT और चार राज्यों में छापेमारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए रांची पुलिस ने एसएसपी राकेश रंजन के नेतृत्व में 40 सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया. जांच के दौरान फॉरेंसिक टीम, डॉग स्क्वॉड और तकनीकी विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया. पुलिस ने झारखंड के साथ-साथ बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भी छापेमारी की. पूरे देश के करीब 17 हजार पुलिस थानों को अलर्ट किया गया था. इसके बावजूद शुरुआती दिनों में पुलिस को कोई ठोस सुराग नहीं मिल पा रहा था, जिससे मामले की चुनौती और बढ़ गई थी.
CCTV और मोबाइल नंबरों की गहन जांच
बच्चों की तलाश के लिए पुलिस ने तकनीकी संसाधनों का व्यापक इस्तेमाल किया. एसएसपी के निर्देश पर 5000 से अधिक मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल्स खंगाली गईं. इसके साथ ही लगभग 2000 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज की जांच की गई. रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, हाईवे और भीड़भाड़ वाले इलाकों को विशेष रूप से खंगाला गया. पुलिस की टीमें लगातार संदिग्ध गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थीं. इसी सतत प्रयास के चलते पुलिस को आखिरकार रामगढ़ जिले में बच्चों से जुड़ा सुराग मिला, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई.
इनाम की घोषणा और सोशल मीडिया की भूमिका
बच्चों का पता लगाने के लिए पहले इनाम की राशि 51 हजार रुपये रखी गई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 2 लाख और फिर 4 लाख रुपये कर दिया गया. इसके अलावा गंतव्य केयर फाउंडेशन नामक एनजीओ के साथ मिलकर पोस्टर अभियान भी चलाया गया. सोशल मीडिया पर भी बच्चों की तस्वीरें तेजी से वायरल की गईं. राहुल सिंह गिरोह की ओर से भी अलग से 2 लाख रुपये इनाम देने की घोषणा की गई थी. इन प्रयासों से जनभागीदारी बढ़ी और पुलिस को अहम जानकारियां मिलने लगीं.
रामगढ़ से सकुशल बरामद, दो गिरफ्तार
लगातार प्रयासों के बाद रांची पुलिस ने रामगढ़ जिले के चितरपुर इलाके से अंश और अंशिका को सकुशल बरामद कर लिया. इस मामले में दो लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिन्हें पूछताछ के लिए रांची लाया जा रहा है. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि बच्चों को वहां क्यों और किस उद्देश्य से रखा गया था. बच्चों के सुरक्षित मिलने की सूचना परिजनों को दे दी गई है. फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क और घटना के पीछे की साजिश को उजागर करने में जुटी हुई है.

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