उषा मार्टिन को 5 करोड़ रुपये लौटाने का आदेश रद्द, हाईकोर्ट ने मामले की दोबारा सुनवाई का दिया निर्देश
“25 साल पुराने बिजली चोरी से जुड़े मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. अदालत की खंडपीठ ने उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसमें बिजली विभाग को उद्योग समूह Usha Martin Limited को 7.5 प्रतिशत ब्याज के साथ 5 करोड़ रुपये लौटाने का निर्देश दिया गया था.”

Ranchi: 25 साल पुराने बिजली चोरी से जुड़े मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. अदालत की खंडपीठ ने उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसमें बिजली विभाग को उद्योग समूह Usha Martin Limited को 7.5 प्रतिशत ब्याज के साथ 5 करोड़ रुपये लौटाने का निर्देश दिया गया था. अदालत ने कहा कि मामले की सुनवाई के दौरान कुछ प्रक्रियात्मक पहलुओं का सही तरीके से पालन नहीं किया गया था. इसलिए पूरे मामले की फिर से सुनवाई कर उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया गया है. न्यायमूर्ति Sujit Narayan Prasad और न्यायमूर्ति Arun Kumar Rai की खंडपीठ ने इस मामले में दायर अपीलों पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया.
एकल पीठ के आदेश को खारिज किया
हाईकोर्ट की एकल पीठ ने वर्ष 2025 में सुनवाई करते हुए कंपनी की याचिका स्वीकार कर ली थी और बिजली बोर्ड को 5 करोड़ रुपये 7.5 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने का निर्देश दिया था. हालांकि खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि तकनीकी विशेषज्ञ एस.एन. द्विवेदी की रिपोर्ट को आधार बनाकर निर्णय लिया गया था, लेकिन उस रिपोर्ट की प्रति संबंधित पक्ष को उपलब्ध नहीं कराई गई थी. अदालत ने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत माना. इसी आधार पर खंडपीठ ने 4 सितंबर 2025 को दिए गए एकल पीठ के आदेश को निरस्त कर दिया. साथ ही 4 अगस्त 2001 को दिए गए अधिनिर्णायक के आदेश को भी रद्द कर दिया गया. अदालत ने मामले की नई सुनवाई के लिए Jharkhand State Electricity Board के चेयरमैन को अधिनिर्णायक नियुक्त करते हुए तीन महीने के भीतर फैसला देने का निर्देश दिया है.
बिजली चोरी के आरोप से जुड़ा है मामला
यह विवाद वर्ष 2000 से जुड़ा है, जब कंपनी के जमशेदपुर स्थित स्टील मेल्टिंग शॉप की बिजली बिजली चोरी के आरोप में काट दी गई थी. इसके बाद बिजली बोर्ड की ओर से करीब 40.39 करोड़ रुपये का अस्थायी बिल जारी किया गया था. कंपनी ने इस कार्रवाई को अदालत में चुनौती दी थी. प्रारंभिक सुनवाई के दौरान अदालत ने बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए कंपनी को 5 करोड़ रुपये जमा करने और 15 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी देने का निर्देश दिया था. बाद में कंपनी ने अदालत से यह मांग की थी कि यदि जांच में उसकी कोई देनदारी साबित नहीं होती है तो जमा की गई राशि उसे वापस की जाए. अब खंडपीठ ने पूरे मामले को दोबारा सुनने का आदेश देते हुए संबंधित प्राधिकारी को तय समय में निर्णय लेने को कहा है.

