झारखंड के पूर्व मंत्री माधव लाल सिंह का निधन, गोमिया से 4 बार रहे विधायक, राजनीतिक जगत में शोक
“झारखंड के पूर्व मंत्री और गोमिया से चार बार विधायक रहे माधव लाल सिंह का रांची के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया. वे लंबे समय से अस्वस्थ थे और पहले बोकारो में भर्ती रहने के बाद उन्हें रांची रेफर किया गया था. उनके निधन की खबर से गोमिया सहित पूरे झारखंड में शोक की लहर दौड़ गई है.”

Ranchi: झारखंड की राजनीति से एक बड़ी और दुखद खबर सामने आई है. राज्य के पूर्व मंत्री और गोमिया से चार बार विधायक रहे माधव लाल सिंह का निधन हो गया है. उन्होंने रांची के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली. बताया जा रहा है कि वे पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ थे और पहले बोकारो के एक अस्पताल में भर्ती थे, बाद में हालत बिगड़ने पर उन्हें रांची रेफर किया गया था. उनके निधन की खबर मिलते ही गोमिया विधानसभा क्षेत्र सहित पूरे झारखंड में शोक की लहर दौड़ गई है. समर्थकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं में गहरा दुख देखा जा रहा है. उन्हें “माधव बाबू” के नाम से जाना जाता था और वे जनता के बीच बेहद लोकप्रिय नेता थे.
अस्पताल में इलाज के दौरान निधन
जानकारी के अनुसार माधव लाल सिंह की तबीयत कुछ दिन पहले अचानक बिगड़ गई थी. इसके बाद उन्हें बोकारो के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक इलाज के बाद उनकी हालत गंभीर होती चली गई. डॉक्टरों ने बेहतर उपचार के लिए उन्हें रांची रेफर किया, जहां एक निजी अस्पताल में उन्हें भर्ती किया गया. इलाज के दौरान बुधवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली. अस्पताल सूत्रों के अनुसार, लगातार निगरानी के बावजूद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हो सका.
चार बार विधायक और मंत्री पद की जिम्मेदारी
माधव लाल सिंह गोमिया विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख नेताओं में गिने जाते थे. उन्होंने 1985, 1990, 2000 और 2009 में गोमिया से विधायक के रूप में जीत दर्ज की थी. वे बिहार सरकार में भी मंत्री रह चुके थे और झारखंड गठन के बाद राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहे. उनकी राजनीतिक यात्रा लंबे समय तक जनता के बीच मजबूत पकड़ और संगठनात्मक क्षमता के लिए जानी जाती रही.
“माधव बाबू” के नाम से थे लोकप्रिय
स्थानीय जनता के बीच वे “माधव बाबू” के नाम से प्रसिद्ध थे. उनकी पहचान एक सरल, सुलझे और जमीन से जुड़े नेता के रूप में थी. ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी गहरी पकड़ थी और वे लोगों की समस्याओं को सीधे तौर पर सुनने के लिए जाने जाते थे. विकास कार्यों और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर उनकी सक्रियता ने उन्हें एक अलग पहचान दी. उनके निधन से क्षेत्र में शोक और भावुकता का माहौल है.
राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर
उनके निधन की खबर सामने आने के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और समर्थकों ने गहरा शोक व्यक्त किया है. गोमिया और आसपास के क्षेत्रों में लोग उनके आवास और अस्पताल के बाहर एकत्र होने लगे. कई समर्थक भावुक नजर आए और उन्हें याद करते हुए श्रद्धांजलि दी. नेताओं ने इसे झारखंड की राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है.

