चाय पत्तियां तोड़ीं, सेल्फी खिंचवाई! असम के चाय बागान में पीएम मोदी का अनोखा अंदाज, महिलाओं संग यादगार पल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के डिब्रूगढ़ जिले में सुबह-सुबह मोनोहोरी चाय बागान का दौरा किया. यहां उन्होंने चाय तोड़ रही महिलाओं से मुलाकात की, खुद चाय की पत्तियां तोड़ीं और उनके अनुरोध पर सेल्फी भी खिंचवाई.

Assam: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के डिब्रूगढ़ जिले में सुबह-सुबह मोनोहोरी चाय बागान का दौरा किया. यहां उन्होंने चाय तोड़ रही महिलाओं से मुलाकात की, खुद चाय की पत्तियां तोड़ीं और उनके अनुरोध पर सेल्फी भी खिंचवाई. पीएम ने इस अनुभव को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए लिखा कि चाय असम की आत्मा है और यहां की चाय ने पूरी दुनिया में अपनी पहचान बना ली है. उन्होंने चाय बागान परिवारों की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि उनकी लगन ने असम की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई दी है. यह दौरा असम विधानसभा चुनाव (9 अप्रैल को मतदान, 4 मई को नतीजे) से ठीक पहले हुआ, जिसमें बीजेपी चाय मजदूर वोट बैंक को मजबूत संदेश दे रही है. पीएम मोदी का यह अनोखा अंदाज न सिर्फ चाय उद्योग से जुड़े लाखों परिवारों को सम्मान दे रहा है, बल्कि उनके चाय बेचने वाले बचपन के दिनों को भी याद दिलाता है. असम दुनिया के सबसे बड़े चाय उत्पादक क्षेत्रों में से एक है, जहां महिलाएं मुख्य कार्यबल हैं. यह दौरा चुनावी अभियान का हिस्सा है, जहां पीएम रैली भी संबोधित करने वाले हैं.

चाय बागान में पीएम मोदी का यादगार अनुभव
सुबह डिब्रूगढ़ पहुंचकर पीएम मोदी सीधे चाय बागान पहुंचे. वहां काम कर रही महिलाओं से बातचीत की. चाय की पत्तियां तोड़ते हुए उन्होंने मजदूरों की दिनचर्या, चुनौतियां और संस्कृति के बारे में जाना. महिलाओं ने अपनी परंपराओं के बारे में बताया, जिसके बाद पीएम ने उनके साथ सेल्फी ली. पीएम ने इसे “बहुत यादगार अनुभव” बताया. उन्होंने चाय बागान की हरी-भरी खूबसूरती और मजदूरों की मेहनत को सराहा. यह दौरा उनके गुजरात के रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने वाले बचपन को भी जोड़ता है, जहां असम की चाय पहुंचती थी.

सोशल मीडिया पर साझा की तस्वीरें और पोस्ट
पीएम मोदी ने एक्स पर दो पोस्ट किए. पहले पोस्ट में लिखा, “चाय असम की आत्मा है! यहां की चाय पूरी दुनिया तक पहुंची है. आज सुबह डिब्रूगढ़ में मैं एक चाय के बागान में गया और यहां काम करने वाली महिलाओं से बातचीत की. यह मेरे लिए बहुत यादगार अनुभव था.” दूसरी पोस्ट में कहा, “चाय की पत्तियां तोड़ने के बाद महिलाएं अपने संस्कृति के बारे में मुझसे बातें करती रहीं और फिर एक सेल्फी भी ली. हम सभी चाय बागान परिवारों के प्रयासों पर बहुत गर्व करते हैं. उनकी मेहनत और लगन ने असम की प्रतिष्ठा को और बढ़ाया है.” चार-चार तस्वीरें साझा की गईं, जिनमें पीएम चाय तोड़ते, महिलाओं से बात करते और सेल्फी लेते दिख रहे हैं.

चाय मजदूरों की सराहना और पीएम का व्यक्तिगत जुड़ाव
पीएम ने मजदूरों की मेहनत को राष्ट्रीय गौरव बताया. उन्होंने कहा कि चाय बागान परिवार असम की पहचान हैं और उनकी लगन ने असम की चाय को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया. महिलाएं चाय उद्योग की रीढ़ हैं, जो डिब्रूगढ़, तिनसुकिया और जोरहाट जैसे जिलों में लाखों परिवारों का आधार हैं. पीएम का यह दौरा उनके ‘चायवाला’ बैकग्राउंड को भी हाइलाइट करता है. इससे पहले मार्च में उन्होंने चाय मजदूरों को जमीन के पट्टे वितरित किए थे, जो 200 साल पुराने ऐतिहासिक अन्याय को दूर करने की दिशा में कदम था.

बीजेपी की रणनीति
यह दौरा असम विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनजर महत्वपूर्ण है. बीजेपी की सरकार सीएम हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में चाय बागान क्षेत्रों में मजबूत पकड़ रखना चाहती है. पीएम मोदी रैली में भी चाय मजदूरों के कल्याण, विकास योजनाओं और केंद्र की सहायता पर जोर देंगे. कांग्रेस के साथ टक्कर में चाय समुदाय बड़ा वोट बैंक है. पीएम का चाय बागान जाकर मजदूरों के साथ घुलमिलना बीजेपी को ‘जनता के बीच’ दिखाता है. असम की चाय अर्थव्यवस्था और संस्कृति दोनों को मजबूत करने का यह संदेश मजदूरों तक सीधा पहुंचेगा.

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