डीजीपी नियुक्ति में सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश, यूपीएससी को पैनल प्रक्रिया तेज करने को कहा
डीजीपी नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने यूपीएससी को निर्देश दिया है कि वह पैनल आधारित चयन प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाए. अदालत ने राज्यों द्वारा कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त करने और स्थापित मानकों की अनदेखी पर गंभीर आपत्ति जताई है.

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों में डीजीपी (Director General of Police) की नियुक्ति को लेकर यूपीएससी (Union Public Service Commission) को पैनल आधारित चयन प्रक्रिया को तेज करने का निर्देश दिया है. शीर्ष अदालत ने देखा है कि कई राज्य अपनी खुद की नियमावली के आधार पर डीजीपी की नियुक्ति कर रहे हैं, जिससे सुप्रीम कोर्ट के 2018 के प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ फैसले में निर्धारित ‘पैनल प्रक्रिया’ की अनदेखी हो रही है. इस फैसले के मुताबिक, डीजीपी नियुक्ति के लिए UPSC द्वारा तैयार तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का पैनल समय पर राज्य को भेजा जाना चाहिए और राज्य सरकार को उसी पैनल से चुनकर नियमित डीजीपी नियुक्त करना अनिवार्य है. सुप्रीम कोर्ट ने यूपीएससी को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि योग्य अधिकारियों के पैनल के निर्धारण में देरी न हो और प्रदेशों को चयन प्रक्रिया का पालन करना पड़े.
सुप्रीम कोर्ट का UPSC को निर्देश और पैनल प्रक्रिया का महत्व
सुप्रीम कोर्ट ने हाल की सुनवाई में राज्यों द्वारा कार्यवाहक डीजीपी (acting DGP) नियुक्त करने की प्रवृत्ति पर गंभीर आपत्ति जताई है, जिसमें UPSC द्वारा सुझाए गए नामों का पालन न करना शामिल है. अदालत ने कहा कि डीजीपी की नियुक्ति में देरी और असंगत प्रक्रियाओं से योग्य अधिकारियों को उनके उचित करियर अवसर से वंचित किया जा रहा है. कोर्ट ने UPSC को कहा है कि वह नियुक्ति पैनल को समय पर तैयार करके राज्य सरकारों तक पहुंचाए, और यदि UPSC इसे समय पर नहीं करता है तो वह सुप्रीम कोर्ट में सीधे इस मुद्दे को उठा सकता है या देरी को लेकर Contempt proceedings शुरू कर सकता है.
यह कदम विशेष रूप से उन राज्यों पर केंद्रित है जहां लंबी अवधि से “कार्यवाहक” डीजीपी कार्यरत हैं, जैसे कि पंजाब और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में देखा गया है. सुप्रीम कोर्ट ने UPSC को चार सप्ताह का समय भी दिया है ताकि वह पैनल तैयार कर सके और नाम राज्य सरकारों तक भेजे जा सकें. अदालत के अनुसार, डीजीपी नियुक्ति में पारदर्शिता और नियमितता बनाए रखना आवश्यक है ताकि पुलिस नेतृत्व में स्थिरता बनी रहे और कानून व्यवस्था पर असर न पड़े.
राज्यों में नियुक्ति विवाद और प्रक्रियागत देरी
कई राज्यों में डीजीपी नियुक्ति प्रक्रिया विवादों में फँसी हुई है, जिसमें पश्चिम बंगाल का मामला सबसे नया उदाहरण है. वहां UPSC ने पैनल को वापस लौटा दिया क्योंकि राज्य सरकार ने आवश्यक समय सीमा का पालन नहीं किया और लंबे समय बाद प्रस्ताव भेजा, जिसे UPSC ने प्रक्रियागत अनियमितता बताया. सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह निर्णय में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि किसी भी राज्य में डीजीपी नियुक्ति के लिए नाम कम से कम तीन महीने पहले UPSC को भेजे जाने चाहिए ताकि समयबद्ध और पारदर्शी चयन सुनिश्चित किया जा सके.
इसी तरह, तेलंगाना और अन्य राज्यों में UPSC के पैनल को लेकर न्यायपालिका के निर्देश और उच्च न्यायालय के आदेश भी सामने आए हैं, जहां अदालतों ने UPSC को पैनल भेजने और राज्य को प्रोजेक्शन देने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है. इन विवादों से यह स्पष्ट होता है कि डीजीपी नियुक्ति प्रक्रिया में संवैधानिक दिशा-निर्देशों और UPSC पैनल प्रक्रिया का अनुपालन क्यों महत्वपूर्ण है और सुप्रीम कोर्ट इसे लागू कराने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है.

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