हिमाचल में मानव तस्करी का बड़ा भंडाफोड़, झारखंड से लाए गए बच्चों का शोषण—दो आरोपी गिरफ्तार
हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर में मानव तस्करी और बाल मजदूरी का गंभीर मामला सामने आया है. झारखंड से लाए गए नाबालिग बच्चों से मजदूरी कराई जा रही थी. चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिला में मानव तस्करी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें झारखंड से लाए गए नाबालिग बच्चों को बाल मजदूरी के लिए काम पर लगाया जा रहा था। पुलिस और जिला बाल संरक्षण समिति (CWC) की संयुक्त जांच के बाद इस गिरोह का भंडाफोड़ हुआ और दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस कार्रवाई चाइल्ड हेल्पलाइन और बाल कल्याण समिति को मिली शिकायत के आधार पर की गई, जिसमें बताया गया कि बच्चों को झारखंड से मजदूरी के इरादे से यहां लाया गया था। पुलिस ने जांच में पाया कि महिला आरोपी ने खुद को बच्चों की बुआ बताया था, लेकिन पूछताछ में यह दावा झूठ पाया गया। दोनों आरोपियों को 16 फरवरी तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है और मामले में उनके बैंक खातों तथा अन्य संपर्कों की भी जांच की जा रही है। सुरक्षित रेस्क्यू किए गए बच्चों को उनके परिवार से मिलाने के प्रयास जारी हैं।
झारखंड से बच्चों को लाया जा रहा था हिमाचल
शुरुआती जांच में पता चला है कि दुलारी देवी नामक महिला, जो झारखंड की रहने वाली है, ने पांच नाबालिग बच्चों को हिमाचल प्रदेश के एक व्यक्ति के कहने पर लाया था। शिकायत चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के हेल्पलाइन नंबर पर मिली थी, जिसके आधार पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। आरोप है कि बच्चों से बाल मजदूरी करवाने के लिए उनका शोषण किया जा रहा था। महिला आरोपी ने शुरुआती पूछताछ में खुद को बच्चों की बुआ बताया, लेकिन जांच के दौरान यह दावा झूठ साबित हुआ। पुलिस ने पर्याप्त सबूत मिलने के बाद दोनों आरोपियों को महिला थाना हमीरपुर के तहत गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें 16 फरवरी तक पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।
बचाए गए बच्चों की सुरक्षा और आगे की कार्रवाई
इस मामले में अब तक दो नाबालिग बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया जा चुका है—एक बच्चे को कुल्लू और दूसरे को हमीरपुर से मुक्त कराया गया है। जिला बाल संरक्षण समिति के अध्यक्ष मनीष राणा ने बताया कि बच्चों को झारखंड में उनके परिवारों से मिलाने की प्रक्रिया जारी है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि गिरोह किस तरह काम करता था और क्या इसके दुष्चक्र में और भी बच्चे फंसे हुए हैं। आरोपियों के बैंक खातों और लेनदेन का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन लोगों और लॉकडाउन के बाद किस तरह के नेटवर्क से यह गिरोह जुड़ा था।

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