राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस नहीं देगी बीजेपी, प्रस्ताव टला पर संकट नहीं, अब ‘Substantive Motion’ का साया
लोकसभा में बजट चर्चा के दौरान राहुल गांधी के भाषण पर सियासी विवाद गहरा गया है. केंद्र सरकार ने उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव फिलहाल न लाने का फैसला किया है, लेकिन बीजेपी भाषण के कथित आपत्तिजनक अंश हटाने की मांग पर कायम है.

New Delhi: लोकसभा में बजट चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. हालांकि केंद्र सरकार ने फिलहाल उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव (Privilege Motion) नहीं लाने का फैसला किया है, लेकिन विवाद थमता नजर नहीं आ रहा. बीजेपी ने साफ किया है कि राहुल गांधी के भाषण के कुछ हिस्से आपत्तिजनक हैं और उन्हें रिकॉर्ड से हटाया जाना चाहिए. लोकसभा सचिवालय द्वारा कुछ अंश पहले ही हटाए जा चुके हैं, फिर भी पार्टी इस कार्रवाई को पर्याप्त नहीं मान रही. उधर, राहुल गांधी द्वारा केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर लगाए गए आरोपों का जवाब खुद पुरी सदन में देने वाले हैं. विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव से पीछे हटने को संसद में नए गतिरोध से बचने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है. बावजूद इसके, राजनीतिक टकराव लगातार जारी है.
विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पर सरकार का रुख
राहुल गांधी ने बजट पर चर्चा के दौरान ‘एपस्टीन फाइल्स’ का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार और विशेष रूप से केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम लिया था. इसके बाद सत्तापक्ष की ओर से कड़ी आपत्ति दर्ज कराई गई और विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने की बात सामने आई थी. अब सूत्रों के हवाले से जानकारी है कि केंद्र सरकार फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं लाएगी. माना जा रहा है कि हाल ही में सदन में चले गतिरोध के बाद स्थिति सामान्य हुई थी और सरकार किसी नए टकराव से बचना चाहती है. हालांकि अंतिम औपचारिक फैसला सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं किया गया है, लेकिन संकेत साफ हैं कि तत्काल कार्रवाई नहीं होगी. इस फैसले को राजनीतिक रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है, ताकि बजट सत्र की कार्यवाही बाधित न हो और विपक्ष को अतिरिक्त मुद्दा न मिल सके.
भाषण के अंश हटाने पर अड़ी बीजेपी
भले ही विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव नहीं लाया जा रहा, लेकिन बीजेपी राहुल गांधी के भाषण के कुछ हिस्सों को लेकर अब भी सख्त रुख में है. पार्टी के चीफ व्हिप संजय जायसवाल ने लोकसभा में औपचारिक नोटिस देकर आपत्तिजनक अंशों को रिकॉर्ड से हटाने (Expungement) की मांग की है. सूत्रों के अनुसार, लोकसभा सचिवालय ने बुधवार रात ही राहुल गांधी के भाषण के कुछ हिस्से रिकॉर्ड से हटा दिए थे. इसके बावजूद बीजेपी का कहना है कि यह पर्याप्त नहीं है और बाकी विवादित टिप्पणियां भी हटाई जानी चाहिए. संसदीय परंपरा के तहत, यदि किसी सदस्य के बयान पर आपत्ति होती है तो अध्यक्ष के पास उसे रिकॉर्ड से हटाने का अधिकार होता है. इस मामले में भी अंतिम निर्णय अध्यक्ष के स्तर पर ही होगा. वहीं, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर लगाए गए आरोपों का जवाब वे स्वयं सदन में देंगे. इसे संसदीय परंपरा के अनुरूप कदम माना जा रहा है.
‘Substantive Motion’ से सदस्यता पर सवाल?
इस पूरे घटनाक्रम के बीच बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के खिलाफ एक ‘Substantive Motion’ भी दायर किया है. यह प्रक्रिया सामान्य नोटिस से अलग होती है और यदि लोकसभा अध्यक्ष इसे स्वीकार करते हैं तो इस पर चर्चा और मतदान हो सकता है. संसदीय नियमों के अनुसार, यदि ऐसा प्रस्ताव पारित होता है तो संबंधित सदस्य की सदस्यता पर असर पड़ सकता है. हालांकि फिलहाल यह प्रक्रिया प्रारंभिक चरण में है और अध्यक्ष के निर्णय पर निर्भर करेगी कि इसे आगे बढ़ाया जाए या नहीं.
कांग्रेस ने कहा- राजनीतिक दबाव की रणनीति
उधर कांग्रेस ने इसे राजनीतिक दबाव की रणनीति बताया है. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि विपक्ष के सवालों का जवाब देने के बजाय सरकार ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है. कुल मिलाकर, विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव से पीछे हटने के बावजूद मामला पूरी तरह शांत नहीं हुआ है. भाषण के अंश, संभावित प्रस्ताव और राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह विवाद आने वाले दिनों में संसद की कार्यवाही को प्रभावित कर सकता है.

specializes in local and regional stories, bringing simple, factual, and timely updates to readers.


Leave a comment